JAISALMER NEWS- जैसलमेर में कुशोक बकुला के जन्म शताब्दी समारोह के वक्ता ने कहा कुछ ऐसा कि....

By: jitendra changani

Published: 03 May 2018, 04:30 PM IST

Jaisalmer, Rajasthan, India

Rajasthan patrika

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अलगाववाद का डटकर मुकाबला

उन्होंने लद्दाख के मठों, गोम्याओ को लेण्ड सीलिंग एक्ट से मुक्त दिलाई। वर्ष 1951 में कश्मीर विधानसभा चुनावों में निर्विरोध निर्वाचित हुए। अलगाववाद का डटकर मुकाबला किया। उन्हें राष्ट्रपति ने पदमविभूषण से सम्मानित किया। कुशोक बकुला को मंगोलिया में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया। वे कहते थे भारत में जन्मा बौद्ध धर्म हिन्दुत्व को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है।

जैसलमेर. आधुनिक लद्दाख के निर्माता कुशोक बकुला मुख्यत: आध्यात्मिक गुरु थे, लेकिन उन्होंने आजादी के बाद समाज सुधार, शिक्षक, राजनेता से लेकर कुशल राष्ट्रदूत की भूमिका बखूबी निभाई। उक्त उद्गार सीमाजन कल्याण समिति की ओर से आयोजित ‘कुशोक बकुला रिम्पौछे’ जन्म शताब्दी समारोह के अंतर्गत मनाए गए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. चन्द्रभान शर्मा ने व्यक्त किए जो कि समिति के अखिल भारतीय कार्यालय प्रमुख है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के परम शिष्यों में से एक 19वें कुशक बकुला लोबजंग धुबतन छोगनोर ने लद्दाख को समर्पित करते हुए परिव्राजक बनकर समूचे क्षेत्र में घूमें। वर्ष 1947-48 में पाकिस्तान की तरफ से कबाईलियों के आक्रमण को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के निकटतम लोगों में से एक थे।

 

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