JAISALMER NEWS- परंपरागत पेयजल स्त्रोत संरक्षण पर लाखों खर्च, फिर नहीं सुधरे हालात, नतीजा आपके सामने है

मुख्य तालाब व परंपरागत पेयजल स्त्रोत उपेक्षा के शिकार

By: jitendra changani

Updated: 05 Apr 2018, 11:46 AM IST

जैसलमेर. पेयजल स्त्रोतों को संरक्षित कर पानी का भंडारण करने के नाम पर सरकार के करोड़ों रुपए खर्च हो गए है, लेकिन फिर भी हालात जस के तस बने हुए है। पुरातन काल से सैकड़ों लोगों की प्यास बुझाने वाले पेयजल स्त्रोत तालाब और नाडियों को संरक्षित करने के लिए सरकार ने योजना शुरू कर इनके संरक्षण की कवायद शुरू की थी और जैसलमेर जिले में अब तक लाखों रुपए खर्च भी कर दिए गए है, लेकिन फिर भी यह पेयजल स्त्रोत अपने वजूद पर आंसू बहा रहे है। हालात यह है कि यहां साफ-सफाई और देखरेख के अभाव में इनकी दुर्दशा हो रही है।

कैसे होगा परंपरागत पेयजल स्त्रोतों का संरक्षण?
पोकरण. कस्बे के मुख्य तालाब व परंपरागत पेयजल स्त्रोत लम्बे समय से उपेक्षा के शिकार होने से उनका अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है, जिसको लेकर जिम्मेदारों की ओर से कोई प्रयास नहीं किए जा रहे है। गौरतलब है कि सैंकड़ों वर्षों तक पोकरण कस्बे में निर्मित तालाब यहां के परंपरागत पेयजल स्त्रोत रहे है। जिनमें महासागर, रामदेवसर, बांदोलाई, सूधलाई, साधोलाई, मेहरलाई, परबतसर आदि कस्बे के मुख्य तालाब है। इन तालाबों में बारिश के दौरान जल संग्रहण किया जाता था तथा वर्ष भर कस्बेवासी उसका पेयजल के रूप में उपयोग करते थे।
तालाबों का करवाया जाएगा जीर्णोद्धार
कस्बे के मुख्य तालाबों व परंपरागत पेयजल स्त्रोतों के रख रखाव के लिए बजट में प्रस्ताव लिए गए है तथा इसी वर्ष तालाबों की खुदाई, घाटों की मरम्मत व पौधरोपण का कार्य करवाया जाएगा।
-जोधाराम विश्रोई, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका, पोकरण।

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मुख्य तालाबों की हो रही उपेक्षा
-कस्बे के बीचोंबीच पोकरण फोर्ट के पीछे स्थित सालमसागर मुख्य तालाब व परंपरागत पेयजल स्त्रोत माना जाता था।
-हालांकि इस तालाब की गत दो वर्ष पूर्व स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व कस्बेवासियों के जनसहयोग से लाखों रुपए खर्च कर पायतन की खुदाई, घाटों की मरम्मत व रेलिंग लगाने का कार्य किया गया था।
-नगरपालिका की ओर से भी तालाब के उत्तरी, पूर्वी व दक्षिणी घाटों पर रेलिंग लगाने का कार्य शुरू किया गया है। सालमसागर तालाब में बीलिया नदी से पानी बहकर आता है।
-इस तालाब के पायतन में आसपास क्षेत्र में निवास कर रहे लोगों की ओर से कचरा डाला जा रहा है तथा इसके जल संग्रहण क्षेत्र बीलिया नदी में नगरपालिका के गंदे पानी के नाले व सीवरेज लाइन लाकर छोड़ दी गई है। -नदी में गंदगी व बबूल की झाडिय़ां लग जाने व उसमें अतिक्रमण होने के कारण जलग्रहण क्षेत्र भी कम होता जा रहा है।
-ऐसे में तालाब में बारिश के पानी की अच्छी आवक होने तथा यहां जमा पानी में गंदगी हो जाने के कारण इस पानी का पीने के पानी के रूप में उपयोग नहीं लिया जा रहा है।
-इसी प्रकार रामदेवसर तालाब के आगोर व जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ते जा रहे है।
-बांदोलाई, सूधलाई व मेहरलाई तालाब के चारों तरफ व जलग्रहण क्षेत्र में भी गंदगी के ढेर लगे है तथा अतिक्रमण हो चुके है। जिससे इनका अस्तित्व बचाए रखना भी मुश्किल हो रहा है।
-उत्तर की तरफ पहाड़ी की गोद में स्थित महासागर तालाब में भी बबूल की झाडिय़ां लग जाने से बारिश के दौरान उसमें जमा पानी तक पहुंच पाना व्यक्ति व पशु के लिए मुश्किल हो रहा है।
तालाबों के जीर्णोद्धार की जरूरत
-कस्बे के सभी तालाब प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार होने के कारण उनका पेयजल स्त्रोत के रूप में उपयोग नहीं लिया जा रहा है।
-लगभग सभी तालाबों की पर्याप्त आगोर होने व बारिश के पानी की अच्छी आवक होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं हो रहा है।
-प्रशासन की ओर से इन सभी तालाबों व परंपरागत पेयजल स्त्रोतों की खुदाई, जीर्णोद्धार, तालाब के पायतन व जलग्रहण क्षेत्र की सफाई की जाती है, तो इन तालाबों में जमा पानी का पेयजल के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है।

 

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jitendra changani Desk/Reporting
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