100 जवानों के साथ स्थानीय लोगों ने दो घंटे तक किया श्रमदान

- सालमसागर का निखर उठा सौंदर्य

By: Deepak Vyas

Published: 07 Jul 2020, 08:15 PM IST

पोकरण. कस्बे के ऐतिहासिक व पौराणिक सालमसागर तालाब पर मंगलवार को पुलिस, आरएसी, होमगार्ड के जवानों व स्थानीय लोगों ने नगरपालिका के सहयोग से दो घंटे तक श्रमदान कर सफाई की। जिससे तालाब के घाटों का सौंदर्य निखर उठा। गौरतलब है कि फोर्ट के पीछे ऐतिहासिक सालमसागर तालाब स्थित है। यहां कुछ वर्ष पूर्व जनसहयोग से खुदाई करवाई गई थी। प्रतिवर्ष राजस्थान पत्रिका के अमृतं जलम् अभियान के अंतर्गत यहां खुदाई व सफाई का कार्य भी किया जाता है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण पत्रिका की ओर से सोशल डिस्टेंसिंग व सरकार की गाइडलाइन की पालना करते हुए कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया था। मंगलवार को पुलिस व स्थानीय लोगों की ओर से नगरपालिका के सहयोग से दो घंटे तक श्रमदान किया गया।
साथी हाथ बढ़ाना...
कस्बे के वैद्य व योगगुरु हरिवंश व्यास के सानिध्य में गत कई वर्षों से सालमसागर तालाब पर योग व प्राणायाम का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। पुलिस थानाधिकारी सुरेन्द्रकुमार प्रजापति के निर्देशन में पुलिस व आरएसी के जवान भी योग चौकी पहुंचकर कार्यक्रम में भाग ले रहे है। थानाधिकारी प्रजापति ने सालमसागर तालाब के घाटों व पायतन में जमा कचरे व गंदगी को देखकर यहां श्रमदान अभियान चलाने का निर्णय लिया। जिसके अंतर्गत मंगलवार को सुबह उनके नेतृत्व में पुलिस, आरएसी के जवानों तथा योग चौकी पर आने वाले लोगों एवं बच्चों ने छह बजे श्रमदान अभियान शुरू किया। करीब दो घंटे तक उनकी ओर से घाटों, सीढिय़ों पर जमा कचरे की सफाई की। साथ ही पायतन में जमा कचरे को बाहर निकाला गया और झाडिय़ों की कटाई की। तालाब में मिली भगवान की मूर्तियों को एक किनारे रखवाया गया। आठ बजे बाद नगरपालिका के जमादार घनश्याम जोशी व नेमीचंद के नेतृत्व में सफाई कर्मचारी भी ट्रैक्टर व जेसीबी मशीन के साथ यहां पहुंचे। उनकी ओर से यहां एकत्र किए गए कचरे व झाडिय़ों को ट्रैक्टर में भरकर कस्बे से बाहर ले जाकर डाला गया। साथ ही जेसीबी मशीन से पायतन की खुदाई कर समतलीकरण का कार्य भी किया गया।
मिट्टी की हो मूर्ति : प्रजापति
श्रमदान कार्यक्रम के दौरान जब जवान व लोग पायतन में पहुंचे, तो यहां बड़ी संख्या में देवी देवताओं की मूर्तियां मिली। थानाधिकारी प्रजापति ने बताया कि गणेश चतुर्थी व नवरात्रा के दौरान लोग गली मोहल्लों में प्रतिमाओं की स्थापना करते है और अनुष्ठान के बाद प्रतिमाओं का तालाब में विसर्जन करते है। उन्होंने बताया कि वर्तमान मेें लोग अलग-अलग प्रकार की मूर्तियां लाते है, जो मिट्टी की बनी हुई नहीं होती है। ऐसे में तालाब में विसर्जन करने पर वे मूर्तियां गलने की बजाय वैसी ही पड़ी रहती है। ऐसे में तालाब सूखने पर वे मूर्तियां बाहर आ जाती है। जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत होती है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग करने का आह्वान किया है, ताकि विसर्जन करने के बाद मिट्टी पानी में घुल सके और मूर्तियां यथावत तालाब में नहीं रहे। जिससे लोगों की आस्था को ठेस नहीं पहुंचेगा।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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