एक वर्ष से लगे हैं मिड-वे पर ताले, वर्ष 1983 में करवाया गया था निर्माण

पोकरण में करीब 36 वर्ष पूर्व राजस्थान पर्यटन विकास निगम की ओर से बनाए गए गोडावण मिड-वे के पर्यटन निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों की उदासीनता के चलतेे गत वर्ष दिसम्बर माह के प्रथम सप्ताह में ताले लगा दिए गए हैं।

By: Deepak Vyas

Published: 18 Dec 2018, 06:50 PM IST

पोकरण. पोकरण में करीब 36 वर्ष पूर्व राजस्थान पर्यटन विकास निगम की ओर से बनाए गए गोडावण मिड-वे के पर्यटन निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों की उदासीनता के चलतेे गत वर्ष दिसम्बर माह के प्रथम सप्ताह में ताले लगा दिए गए हैं। ऐसे में यहां पर्यटन विकास अभियान को धक्का लग रहा है। कस्बे के जोधपुर-जैसलमेर, बीकानेर-जैसलमेर व पोकरण-रामदेवरा राष्ट्रीय राजमार्ग के तिराहे पर सरकारी जमीन आवंटित कर करीब 30 बीघा भूमि पर यहां पोकरण के लाल पत्थर से कलात्मक मिड-वे का निर्माण करवाया गया था। राजस्थान पर्यटन विकास निगम की ओर से मिड-वे का निर्माण करवाकर इसका नामकरण भी लुप्त हो रहे राज्यपक्षी गोडावण के नाम से किया गया था तथा इसे आरटीडीसी गोडावण मिड-वे के रूप में जाना जाता है। जिसका लोकार्पण केन्द्रीय पर्यटन उपमंत्री गहलोत की ओर से 21 जुलाई 1983 को किया गया था। यह मिड-वे गत 35 वर्षों से निरंतर चल रहा था तथा यहां आने वाले देशी विदेशी पर्यटकों, केन्द्र व राज्य सरकार के मंत्रियो, सरकारी अधिकारियों को अच्छी सेवाएं दे रहा था।
..और बंद करने का निर्णय
गौरतलब है कि गत दिसम्बर 2017 के प्रथम सप्ताह में राज्य सरकार की ओर से पर्यटन निगम की कई होटलों व मिड-वे को बंद करने, उनकी नीलामी करने अथवा उन्हें निजी हाथों में लीज पर देने का निर्णय लिया गया। जिसके अंतर्गत स्थानीय आरटीडीसी गोडावण मिड-वे को भी सम्मिलित कर दिया गया। जिस पर इसे बंद करने का निर्णय लिया गया तथा यहां ताले लगा दिए गए।
बदहाल स्थिति में भवन व वाटिकाएं
गत दिसम्बर 2017 में यहां कार्यरत कार्मिकों को अन्यत्र लगाकर मिड-वे को बंद कर दिया गया है, जिससे यहां लाखों रुपए की राशि से निर्मित कलात्मक भवन, डाइनिंग हॉल, किचन, मिड-वे के अंदर निर्मित तीन कमरे, परिसर में निर्मित तीन कलात्मक हट, तीन वाटिकाएं देखरेख के अभाव में खराब हो रही है। यदि इस मिड-वे को पुन: शुरू नहीं किया गया, तो यहां लाखों रुपए की राशि से निर्मित भवन खण्डहर हो जाएंगे। वाटिकाएं उजड़ जाएगी तथा यहां लगे दर्जनों पेड़ देखरेख के अभाव में जलकर समाप्त हो जाएंगे। यही नहीं निगरानी के अभाव में कस्बे की बस्ती से एक तरफ सूनसान जगह पर निर्मित इस भवन के ताले तोडक़र दरवाजे ले जाने व अन्य सामान चोरी हो जाने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
..इसलिए जरूरी है सरकारी मिड-वे
-कस्बे के पर्यटन विकास में सरकार की भागीदारी होना जरूरी है।
-यहां आरटीडीसी की ओर से संचालित होटलों में सस्ते दर पर खाना, चाय पानी व आवास की व्यवस्था की जाती है।
-यहां सुविधा नहीं मिलने से जैसलमेर, जोधपुर या बीकानेर जाकर सरकारी अथवा बड़ी निजी होटलों में रुकते है।

नए मुख्यमंत्री से यह आस
पर्यटन विकास के लिए 36 वर्ष पूर्व शुरू किए गए स्थानीय आरटीडीसी गोडावण मिड-वे को पुन: शुरू करना राज्य सरकार व राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है। गत राज्य सरकार की ओर से इसे बंद कर दिया गया। मिड-वे का शुभारंभ करने वाले तत्कालीन केन्द्रीय पर्यटन उपमंत्री अशोक गहलोत अब राज्य के मुख्यमंत्री बन चुके है। ऐसे में स्थानीय लोगों को आरटीडीसी मिड-वे के पुन: शुरू होने व यहां देशी विदेशी पर्यटकों की चहल पहल बढऩे की आस जगी है।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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