scriptMarkets buzzed on Eid, rained 10 crores | ईद पर गुलजार हुए बाजार, बरसे 10 करोड़ | Patrika News

ईद पर गुलजार हुए बाजार, बरसे 10 करोड़

- 45 डिग्री के आसपास की गर्मी में भी बाजारों में दिख रही रौनक
- दो वर्ष कोरोना का दंश झेलने के बाद पर्व का उल्लास

जैसलमेर

Updated: May 01, 2022 07:41:47 pm

जैसलमेर. आसमान से बरसती आग और पर्यटकों का आगमन लगभग ठप होने के बावजूद जैसलमेर के बाजार इन दिनों गुलजार हैं। ऐसा ईद उल-फितर की वजह से है। संभवत: आगामी 3 मई को मुस्लिम समुदाय यह त्योहार कोरोना की पिछले दो सालों के दौरान की बंदिशों के बाद इस बार दिल खोल कर मनाने की तैयारियां कर रहा है। इसके चलते जैसलमेर के बाजारों में विशेषकर कपड़े, जूते, खान-पान की वस्तुओं और अन्य साजो सामान की दुकानों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है। एक अंदाज के मुताबिक ईद के मौके पर बाजार में कम से कम दस करोड़ रुपए का कारोबार सीमावर्ती जिले में होगा। जिससे बाजार में छाई मंदी पर कुछ हद तक अंकुश भी लगेगा। इसी के चलते संबंधित वस्तुओं के व्यापारी समुदाय में भी उत्साह नजर आ रहा है। वर्तमान में रमजान का महीना चल रहा है और यह समय इबादत के लिए सबसे पाक माना जाता है। इन दिनों कई प्रतिष्ठित मुस्लिमों के यहां सामूहिक इफ्तारी के कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। जिनमें मुसलमानों के अलावा बहुसंख्यक हिंदू समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भी शामिल हो रहे हैं। गौरतलब है कि मुस्लिम धर्मावलम्बियों के लिए ईद का त्योहार सबसे बड़ा और खुशियों का पैगाम लाने वाला माना जाता है तथा इस दिन सभी लोग नए परिधान पहनकर अपने-अपने क्षेत्र की मस्जिदों में सामूहिक नमाज अदा करते हैं। कोरोना की पहली तीन लहरों के दौरान साल 2020 और 2021 में सामूहिक नमाज के आयोजन भी कम ही जगहों पर हो पाए। ऐसे में तीसरे साल ईद मनाने की खुशियां मुस्लिम समाज में बहुत ज्यादा है।
खरीदारी का जज्बा
जैसलमेर के पुराने बाजारों तथा चुनिंदा स्थानों पर ईद की ग्राहकी का दौर सबसे ज्यादा है। इनमें पंसारी बाजार, सदर बाजार, गुलासतला, मदरसा रोड, गड़ीसर प्रोल, आसनी पथ के साथ पुराने ग्रामीण बस स्टेंड पर आई दुकानों में सबसे ज्यादा व्यवसाय देखने को मिल रहा है। मुख्यत: ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले मुस्लिम समाज के लोग सुबह जल्दी गांवों से रवाना होकर शहर पहुंच जाते हैं और उनकी चहल-पहल चारों तरफ नजर आ रही है। इनमें महिलाओं तथा बच्चों की खुशी देखते ही बनती है। महिलाएं पारम्परिक खान-पान से जुड़ी वस्तुओं तथा सजावटी सामान की खरीदारी भी भरपूर ढंग से कर रही हैं तो युवाओं की पहली पसंद नए परिधान बने हुए हैं। जैसलमेर के सिंधी अल्पसंख्यक समाज में पहनावे के तौर पर आज भी पहली पसंद परम्परागत कपड़े बने हुए हैं। हालांकि अब अन्य लोगों की तरह इस समाज के युवाओं में भी रेडिमेड कपड़ों का आकर्षण बहुत बढ़ गया है।
एक चौथाई आबादी मुस्लिम
एक अनुमान के अनुसार सीमावर्ती जिले में मुस्लिमों की आबादी करीब एक-चौथाई यानी 25 प्रतिशत के आसपास है। इनमें अधिकांश सिंधी हैं। शहर में अवश्य पूर्व रियासतकाल में बाहरी जिलों व क्षेत्रों से आए अन्य समाज बसे हुए हैं। पूर्व के दो सालों में कोरोना के कारण अन्य त्योहारों की भांति ईद की रौनक पर भी ग्रहण लगा था। इस बार यह त्योहार ऐसे समय में आया है, जब कोरोना की तीसरी लहर का असर पूरी तरह खत्म हो चुका है और चौथी लहर कम से कम जैसलमेर से काफी दूर है। यही कारण है कि जिले के अल्पसंख्यकों में ईद की विशेष खुशी है। जानकारी के अनुसार प्रत्येक मुस्लिम इस दिन नए कपड़े-जूते आदि धारण करता है। यही वजह है कि शहर के वस्त्र और जूते-चप्पले विक्रेताओं, टेलरिंग का काम करने वालों के यहां खासतौर पर ग्राहकों की भीड़ नजर आती है। इसके अलावा इन दिनों रमजान का महीना चल रहा है और रोजा खोलने के लिए अल्पसंख्यक समाज खजूर, फलों को जरूर रखते हैं।
ईद पर गुलजार हुए बाजार, बरसे 10 करोड़
ईद पर गुलजार हुए बाजार, बरसे 10 करोड़
फैक्ट फाइल -
- 02 बार ईद आती है एक साल में
- 25 प्रतिशत जिले में मुस्लिम आबादी
- 03 मई को ईद मनेगी (चांद दिखने पर)

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