व्यवस्था पर जमा 'फ्लोराइड' लाखों रुपयों को लगा पानी, फिर भी नहीं मिला मीठा पानी


-सरहदी जैसलमेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में नकारा हालत में आरओ प्लांट
-केवल दो रूपए में 20 लीटर शुद्ध पानी मुहैया कराने की योजना को झटका

By: Deepak Vyas

Published: 20 Jun 2021, 12:41 PM IST

रामदेवरा(जैसलमेर). सरहदी जैसलमेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लोराइड युक्त पानी से निजात दिलाने के लिए लाखों रुपए खर्च कर लगाए गए आरओ प्लांट्स जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते बंद हंै। पत्रिका पड़ताल में निराशाजनक स्थिति सामने आई है। रामदेवरा ग्राम पंचायत के राजस्व मावा गांव में करीब पांच साल पहले लगाया गया आरओ प्लांट वर्तमान में बंद है, कई गांवो में तो आरओ प्लांट शुरू ही नहीं हो पाए हैं। उधर, एका, छायण, सूजासर आसपास के गांवों की स्थिति भी जुदा नहीं है। गौरतलब है कि पाक सीमा से सटे सरहदी जैसलमेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पानी में फ्लोराइड अधिक है, उन ग्रामीण क्षेत्रों के ग्रामीणों को मीठे पानी की उपलब्धता को लेकर लाखों रुपए खर्च कर आरओ प्लांट लगाने की कवायद की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए आरओ प्लांट समय पर शुरू नहीं होने से और जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते नकारा हो गए। यही नहीं इन आरओ प्लांट्स के चारों और झाडिय़ां भी उग आई है। उधर, छायण, एका, मावा, सूजासर सहित समीपवर्ती गांवों में भी स्थिति जुदा हीं है। ऐसे में आज भी यहां ग्रामीण फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर है।
सामने आ रहा संसाधनों का भी टोटा
ग्रामीण क्षेत्रों में राज्य सरकार की ओर से केवल 2 रुपए कीमत पर 20 लीटर शुद्ध और मीठे पानी को उपलब्ध करवाने के लिहाज से ग्राम पंचायत क्षेत्रों के साथ राजस्व गांवो में भी करीब पांच साल पहले आरओ प्लांट स्थापित कर दिए गए। जानकार बताते हैं कि आरओ प्लांट स्थापित करने के बाद नियमित रूप से मशीन जांच और विद्युतापूर्ति के साथ आरओ में आने वाली जलापूर्ति पर भी ध्यान रखने की जरूरत है। बिना किसी कार्मिक को लगाए आरओ प्लांट को ग्रामीण क्षेत्रो में नियमित रूप से शुरू रखना बेहद ही मुश्किल है। ऐसे में यह भी खामी यहां सामने आई है।
दो बार टेंडर, फिर भी शुरू नहीं
सरहदी जैसलमेर जिले के रामदेवरा क्षेत्र सहित अन्य जगहों पर आरओ प्लांट्स को लगाने वाली एक निजी फर्म ने गांवो में आरओ प्लांट स्थापित करने के बाद टेंडर की शर्तो के अनुसार निजी फर्म को सात साल तक आरओ प्लांट्स की देख रेख करनी थी, लेकिन व्यावहारिक तौर पर ऐसा देखने को नहीं मिला। गांवो में लगाए गए आरओ प्लांट्स के बंद रहने पर इन्हें वापस शुरू करवाने को लेकर विभाग की ओर से दो बार टेंडर भी किया गया, लेकिन कोई फर्म टेंडर लेने सामने नहीं आई।
दो बार टेंडर, लेकिन नहीं आया कोई
क्षेत्र के गांवों में बंद आरओ प्लांट्स की जानकारी है। विभाग की ओर से जिस फर्म के माध्यम से ये आरओ प्लांट्स लगाए, उसकी जिम्मेदारी थी कि वह 7 साल तक सार-संभाल करें। बंद आरओ प्लांट्स को शुरू करवाने को लेकर दो बार टेंडर भी किए, लेकिन कोई फर्म टेंडर लेने ही नहीं आई। फिर से टेंडर की कार्यवाही करेंगे।
-प्रयाग स्वामी, अधिशाषी अभियंता, जलदाय विभाग, पोकरण।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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