Corona virus: एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना

-न मजदूर मिल रहे हैं और न ही हार्वेस्टर मशीन

By: Deepak Vyas

Published: 18 Apr 2020, 08:30 PM IST

जैसलमेर. कोरोना संक्रमण का प्रकोप खेत-खलिहानों पर भी पड़ रहा है। जिले में किसानों की फसलों पर भी असर पड़ रहा है। फसलें पककर तैयार हैं। मगर उन्हें काटने के लिए न मजदूर मिल रहे हैं और न ही हार्वेस्टर मशीन, जिससे किसान अपनी फसल काट सकें। मजदूर और मशीन न मिलने से किसान अपने परिवार सहित खेतों के मोर्चे पर उतर आए हैं और कटाई शुरू कर दिया है। फसल कब तक कटेगी यह कहना मुश्किल है। लाठी व आसपास के क्षेत्र में गेहूं की फसल ही दिखाई दे रही है। चना व सरसों की पैदावार कम है। अब गर्मी पडऩे के कारण गेहूं की फसल एक साथ पककर तैयार हो गई है, लेकिन अब किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण फसल की कटाई है। वह खेत में खड़ी फसल को देखकर चिंतित है। मेहनत का फल उसे मिलेगा या वह खेत में ही सूख जाएगी।
परिवार के साथ कटाई में जुटे किसान
मजदूर व हार्वेस्टर मशीन न मिलने के कारण कुछ छोटे किसान तो अपने परिवार सहित फसल काटने खेतों में उतर आए हैं, लेकिन बड़े खेतों के मालिक किसानों के लिए ऐसा करना आसान नहीं है। ऐसे किसान ज्यादा चिंतित नजर आ रहे हैं। फसलें पककर तैयार हैं और आगामी १० दिनों में उन्हें काटने की व्यवस्था नहीं हुई तो किसानों की फसलें खेतों में ही खराब हो जाएगी। क्षेत्र में ज्यादातर किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पककर कटने के लिए तैयार हो गई है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से न तो मजदूर मिल रहे हैं और न ही हार्वेस्टर मशीन। कोरोना के चलते जिलेभर में धारा 144 लागू की गई है। मजदूरों की कमी होने की वजह से क्षेत्र के छोटे किसान जैसे-तैसे अपने गेहूं की फसल को खेतों में काटकर उसे थ्रेसर से काटने की तैयारी करने लगे हैं, लेकिन बड़े आकार के खेतों वाले किसानों को गेहूं की फसल कटाई में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अपनों ने दिया सहारा
रामगढ़. कस्बे के नहरी खेत्र में इन दिनों फसल निकालने और बोरियां ट्रेक्टर में लादने का काम जोर शोर से चल रहा है लेकिन हर बार से हालात पूरी तरह जुदा है। लॉकडाउन होने की वजह से बाहरी मजदूर बहुत कम संख्या में पहुंचे हैं और किसानों को आपस मे एक दूसरे को सहारा देने आगे आना पड़ा है। निकाली गई फसल को ट्रेक्टर में लाद कर मंडी भी स्वयं किसान ही एक दूसरे की मदद से पहुंचा रहे हैं। इस तरह वे एक दूसरे के लिए संकटमोचक बने हुए हैं।
लौट आए पुराने दिन
नाचना. क्षेत्र में रबी की फसल की कटाई का कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है। बाहरी मजदूरों की अनुपलब्धता के कारण किसान अपने खेतों में फसल कटाई का कार्य हो अथवा खलिहान में एक जगह एकत्रित करना व उसे थ्रेसर से निकलवाना हो तो पड़ोसी लोग आपस में सहयोग कर एक दूसरे के संकट के साथी बन रहे हैं।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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