स्वच्छता का संदेश देने वाले गिद्धों की बढ़ रही है तादाद

स्वच्छता का संदेश देने वाले गिद्धों की बढ़ रही है तादाद
स्वच्छता का संदेश देने वाले गिद्धों की बढ़ रही है तादाद

Deepak Vyas | Updated: 23 Sep 2019, 06:05:54 PM (IST) Jaisalmer, Jaisalmer, Rajasthan, India

लाठी. क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। प्रकृति में स्वच्छता का संदेश देने वाले गिद्धों की क्षेत्र में संख्या बढ़ रही है। गिद्धों की तादाद बढ़ाने व आमजन को जागरुक करने के लिए इआरडीएस फाउण्डेशन की ओर से गिद्ध संरक्षण एवं जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है।

जैसलमेर/लाठी. क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। प्रकृति में स्वच्छता का संदेश देने वाले गिद्धों की क्षेत्र में संख्या बढ़ रही है। गिद्धों की तादाद बढ़ाने व आमजन को जागरुक करने के लिए इआरडीएस फाउण्डेशन की ओर से गिद्ध संरक्षण एवं जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। गौरतलब है कि भारत में गिद्धों की आठ प्रजातियां पाई जाती है। पश्चिमी राजस्थान में सात प्रजातियों को चिह्नित किया गया है। गिद्धों का मुख्य भोजन मृत पशु होता है तथा एक मृत पशु पर दर्जनों की संख्या में गिद्धों का झुण्ड उमड़ पड़ता है, जो कुछ ही समय में मृत पशु के शव को चट कर जाता है। ऐसे में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी माने जाते है और पारिस्थितिकी तंत्र की अहम कड़ी है। फाउण्डेशन के अध्यक्ष व वैज्ञानिक डॉ.ममता, क्षेत्रीय समन्वयक राधेश्याम पेमाणी व वैज्ञानिक सलाहकार डॉॅ.सुमित डूकिया की ओर से जिले में गिद्ध की संख्या व स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है।
बढऩे लगी संख्या
क्षेत्र के ओढ़ाणिया-लाठी रेलवे लाइन के बीच वर्ष 2017 में रेल की चपेट में आने से बड़ी संख्या में गिद्धों की मौत हुई। सूचना पर संस्थान की ओर से क्षेत्र में जनजागरण अभियान चलाया गया। संस्थान के पदाधिकारियों ने रेलवे, वन विभाग व ग्रामीणों से संपर्क किया और लुप्त होती गिद्धों की प्रजाति के संरक्षण में सहयोग की अपील की। जिसके बाद गिद्धों के संरक्षण का कार्य किया गया। आमजन ने भी इस कार्य में सहयोग किया। जिसके बाद अब गिद्धों की संख्या बढऩे लगी है। गौरतलब है कि सफेद पीठ व लम्बी चोंंच के गिद्धों की प्रजाति पर एक बार संकट की स्थिति हो गई थी और इनकी संख्या 90 प्रतिशत तक कम हो गई थी। वर्तमान में भी गिद्ध संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल है। जिसके संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है।
बढ़ रहे गिद्ध
गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न अंग है। मृत जानवर को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखते है। क्षेत्र के भादरिया ओरण में गिद्धों की संख्या बढ़ रही है, जो अच्छी बात है।
डॉ.सुमित डूकिया, वैज्ञानिक सलाहकार

गत कुछ वर्षों से वन्यजीव सर्वे व संरक्षण के लिए संस्थान के साथ जुडक़र कार्य किया जा रहा है। जिले में गिद्धों के प्रजनन के तीन स्थल चिह्नित किए गए है। गिद्धों के संरक्षण के लिए प्रयास किए जा रहे है।
राधेश्याम पेमाणी, क्षेत्रीय समन्वयक।

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