JAISALMER NEWS- नाचना के इस सरोवर पर पानी की आवक पर अंकुश

पानी की आवक का रुका रास्ता, कैसे बनेगा मॉडर्न तालाब

By: jitendra changani

Updated: 26 Mar 2018, 10:59 PM IST

जैसलमेर. प्राकृतिक जल स्त्रोतों को जीवित कर पानी संग्रहण के रास्ते खोलने के लिए बनाई योजनाओं पर का अंकुश होने से पानी की आवक नहीं बढ़ रही। जिले के नाचना स्थित ईंटो की नाडी के भी हालात कुछ इसी तरह के है। सरकार ने इस सरोवर को मॉर्डन तालाब के रुप में चिन्हित किया है। ऐसे में तालाब के सौन्दर्यकरण से लेकर पानी संग्रहण की क्षमता बढ़ाने की योजना है, लेकिन पानी की आवक पर अतिक्रमण का अंकुश होने से यह सरोवर पानी को अब भी मोहताज है। ग्रामीणों के अनुसार पानी की आगोर में हुए अतिक्रमण हटाकर सरोवर की पानी की आवक को खोला जा सकता है। मॉर्डन तालाब की स्वीकृति के बाद पानी की आवक बढऩे की उम्मीद जगी थी, लेकिन यह उम्मीद समय के साथ धूमिल हो रही है।

 

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IMAGE CREDIT: patrika

पानी की आवक का रुका रास्ता, कैसे बनेगा मॉडर्न तालाब
नाचना. मॉडर्न तालाब की श्रेणी में चयनित नाचना गांव की ईंटों वाली नाडी पर अब तक लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी बारिश के पानी की आवक के रास्ते रुक जाने से नाडी की उपयोगिता पर प्रश्न चिह्न लग गया है। गौरतलब है कि गांव के करीब दो किमी दूर स्थित ईंटों वाली नाडी स्थित है। यहां स्थित चिकनी मिट्टी व उसमें चूने की मात्रा होने के कारण ग्रामीणों की ओर से ईंटें बनाई जाती है। जिसके चलते इसे ईंटों वाली नाडी कहा जाता है। इस नाडी को हाल ही में मॉडर्न तालाब के रूप में विकसित करने के लिए ग्राम पंचायत की ओर से दक्षिण दिशा में दीवार, सीढिय़ां, उत्तर दिशा में बड़ी चौकी व टांके का निर्माण करवाया गया है। वर्षों पूर्व सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं में यहां लाखों रुपए खर्च किए जा चुके है, लेकिन नाडी में बारिश के पानी की आवक का रास्ता अवरुद्ध हो जाने से यह नाडी मॉडर्न तालाब के रूप में विकसित नहीं हो पा रही है।
गड्ढे बन रहे हं रोड़ा
नाडी के एक ओर रेत का टीला है तथा दूसरी तरफ आगोर है। यहां से बारिश के पानी का रास्ता है। मनरेगा के तहत अलग-अलग आकार की गहरी खाइयां व गड्ढे यहां खोद दिए गए हैं। खुदाई के बाद मिट्टी निकालकर पूर्व व पश्चिम दिशा में डाल दी गई है। जिससे पानी की आवक पर रोक लग गई है। पानी की आवक नहीं होने से नाडी का लाभ आमजन व पशुओं को नहीं मिल सकेगा। यदि बारिश से पूर्व पायतन का समतलीकरण नहीं किया जाता है, तो यहां बारिश के दौरान पानी की आवक नहीं होगी तथा नाडी के सूखी ही रह जाने की आशंका जताई जा रही है।

jitendra changani Desk/Reporting
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