एक करोड़ लोगों का होगा सीधा जुड़ाव, जुड़ेगा उत्तर भारत

जैसलमेर/बाड़मेर. भाभर रेलवे लाइन को अनार्थिक घोषित कर 2009 में केन्द्र ने मंजूरी पर रोक लगा दी लेकिन अब 2021 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री से पैरवी कर नई राह प्रशस्त की है।

By: Deepak Vyas

Published: 09 Jan 2021, 01:03 PM IST

जैसलमेर/बाड़मेर. भाभर रेलवे लाइन को अनार्थिक घोषित कर 2009 में केन्द्र ने मंजूरी पर रोक लगा दी लेकिन अब 2021 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री से पैरवी कर नई राह प्रशस्त की है। विकास की डगर पर दौड़ रहे बाड़मेर जैसलमेर जिलों के लिए आर्थिक रफ्तार तेज करने के साथ ही यह रेल लाइन यहां के लोगों के लिए महत्वपूण है। करीब एक करोड़ लोग गुजरात व राजस्थान के सीधे तौर पर इस रेलवे लाइन से जुड़ेंगे और यह रेल शुरू होते ही संपूर्ण उत्तरभारत से भी सीमांत क्षेत्र का जुड़ाव होगा।
बाड़मेर की आबादी 26 लाख के पार है और जैसलमेर की 7 लाख के करीब। इसके अलावा गुजरात के थरादए भाभर और बनासकांठा जिले के एक दर्जन से बड़े गांव कस्बे इस रेल लाइन से सीधे जुड़ेंगे। करीब एक करोड़ राजस्थान और गुजरात के लोगों का जुड़ाव इस रेलवे लाइन के 41 स्टेशन और सैकड़ों गांवों से होना तय है।
हारी-बीमारी बड़ा फायदा
आम लोगों के लिए इस रेल का सबसे बड़ा फायदा हारी बीमारी में है। बाड़मेर और जैसलमेर के लोग बेहतर उपचार के लिए गुजरात पर निर्भर है। सीमांत चौहटन, धोरीमन्ना इलाके के लोग तो सीधा गुजरात का ही रुख करते है। जहां डीसा, भाभर, धानेरा सहित अन्यत्र पहुंच रहे है। सीधी रेल होने से इनके लिए आगे तक क्रास की अन्य सुविधा मिल जाए तो गुजरात आना जाना आसान होगा।
नाते रिश्तेदारी भी गुजरात में
गुजरात के थरादए भाभर और अन्य इलाकों में बाड़मेर के लोग रोटी-बेटी के रिश्ते से भी जुड़े हुए है। रेल की सुविधा से जाना हों तो इनका अब समदड़ी से होते हुए क्रॉस लेकर जाना पड़ता है जो दूरी पर है। इस कारण बसों का सफर कर रहे है। रेल की सुविधा इन परिवारों के लिए सुगम व सस्ती है।

सीधे तौर पर मिलेगा लाभ
जैसलमेर-बाड़मेर-भाभर के बीच रेल सम्पर्क कायम हो जाए तो जैसलमेर का प्रत्येक बाशिंदा सीधे तौर पर लाभान्वित होगा। जैसलमेर और बाड़मेर सबसे नजदीकी जिले हैं और यहां के बाशिंदों के बीच रोटी.बेटी के संबंध दशकों पुराने हैं। इसके अलावा जैसलमेर का पर्यटन सहित व्यापार.वाणिÓय का बड़ा हिस्सा गुजरात से जुड़ा है। जैसलमेर से प्रतिदिन करीब एक दर्जन सरकारी व निजी क्षेत्र की बसों का संचालन गुजरात के विभिन्न शहरों के बीच होता रहा है। विगत अर्से से रोजाना दो विमानों की आवाजाही जैसलमेर और अहमदाबाद व एक विमान सेवा सूरत के लिए संचालित होती रही है। यह रेल परियोजना आर्थिक तौर पर पिछड़े जैसलमेर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे जैसलमेर आने वाले हजारों गुजराती सैलानियों को तो बड़ी सुविधा मिलेगी ही, बाड़मेर भी पर्यटन नक्शे पर उभर सकेगा।

यह बहुत जरूरी है
2009 में सांसद रहते हुए सर्वे का कार्य पूर्ण करवाया था। इस रेल के लिए पूरी तरह से पैरवी की गई लेकिन बाद में यह मामला अटक गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री से ठोस तरीके से मांग रखी है। प्रधानमंत्री इसी बजट में रेल लाइन की घोषणा करें तो यह क्षेत्र को बड़ी मदद होगी। यह रेल लाइन यहां की लाइफ लाइन बनेगी।. -हरीश चौधरी, राजस्व मंत्री राजस्थान सरकार

बीमारों को बड़ी मदद
बीमार लोगों के लिए यह रेल लाइन जीवनदायनी बनेगी। अभी गुजरात उपचार को पालयन होता है। कोरोनाकाल में भी गुजरात से द वाइयां मंगवाकर बड़ी संख्या में केमिस्ट एसोसिएशन ने दी है। यह रेल लाइन शुरू होती है तो बाड़मेर के आम आदमी को राहत मिलेगी।
-बद्रीप्रसाद शारदा, अध्यक्ष केमिस्ट एसोसिएशन

केंद्र तुरंत उठाए सकारात्मक कदम
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जैसलमेर.बाड़मेर.भाभर रेल प्रोजेक्ट की पैरवी कर सीमावर्ती क्षेत्रों के हित में कदम उठाया है। अब केंद्र सरकार को इसे अनार्थिक मान कर नजरअंदाज करने की जगह सकारात्मक रुख दर्शाना चाहिए।
-कैलाश कुमार व्यास, अध्यक्ष सम रिसोट्र्स वेलफेयर सोसायटी, जैसलमेर

Deepak Vyas Bureau Incharge
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