JAISALMER NEWS- पंचायतीराज की इस व्यवस्था के विरोध में सरपंचों व कार्मिकों ने उठाया यह कदम

ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक व वित्तीय व्यवस्था का किया विरोध

By: jitendra changani

Published: 27 Mar 2018, 07:16 PM IST

जैसलमेर . ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों में फेरबदल को लेकर सरपंच संघ व मंत्रालयिक कर्मचारियों ने विरोध किया। सरपंच संघ जिलाध्यक्ष कैप्टन आम्बसिंह भाटी ने कहा कि पंचायत के मामले में कार्यालय अध्यक्ष व संस्था अध्यक्ष दोनों सरपंच ही होता है। वहीं कार्यालय के समस्त कर्मचारी उनके निर्देशानुसार प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं। वहीं पंचायत समिति व जिला परिषद में कार्यालय अध्यक्ष व संस्था अध्यक्ष अलग-अलग होते हैं। ऐसेमें ग्राम पंचायतों में किसी भी प्रकार का प्रशासनिक व वित्तीय शक्तियों का परिर्वतन नहीं होना चाहिए। इससे न्यायिक विवाद भी उत्पन्न होने की संभावना है। साथ ही सरपंचों के कर्तव्य व शक्तियां भी कम हो जाएगी। सरपंच संघ इसका पुरजोर विरोध करेगा।
मंत्रलयिक कर्मचारियों की हुई बैठक
ऐसे ही जिला मुख्यालय पर सोमवार को पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन की बैठक हुई। इसमें उन्होंने पंचायतों में प्रशासनिक फेरबदल का विरोध का निर्णय किया। जिलाध्यक्ष झब्बरसिंह राठौड़ ने बताया कि कल्याणकारी योजनाओं की कमान पंचायत के मंत्रालयिक कर्मचारियों ने बखूबी संभाल रखी है। फेरबदल को लेकर पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन विरोध करेगा। बैठक में प्रदेश संगठन मंत्री चन्द्रवीरसिंह राठौड़, गणपतसिंह, आलमाराम, जोगेन्द्रसिंह भाटी, चिम्माराम, बीरबलखां, विशनाराम ब्लॉक अध्यक्ष सांकड़ा, मूरलीधर देवपाल, गिरधारीराम सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे।

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सरपंचों ने मंत्री को सौंपा ज्ञापन
जैसलमेर . सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष कैप्टन आम्बसिंह भाटी के नेतृत्व में सरपंचों ने केन्द्रीय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को ज्ञापन सौंप अपनी मांगों से अवगत कराया। इसमें उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पंचायतीराज को समाप्त करने की ढान ली है। यह पंचायतीराज व सरपंचों के हितों पर कुठाराघात है। उन्होंने बताया कि जिले के कई क्षेत्रों में मनरेगा योजना में सामग्री का भुगतान गत डेढ़ साल से नहीं हो रहा है। इसके अलावा श्रमिकों को भी गत 6 महीनों से मजदूरी नहीं मिली है। 23 फरवरी को भी मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व मंत्री ने लिखित में आश्वासन दिया था कि सरपंच संघ की मांगों को मान लिया जाएगा व तीन दिनों में आदेश जारी कर दिया जाएगा, लेकिन आज तक आदेश जारी नहीं किया गया है, जो कि सरपंचों के साथ विश्वासघात है।

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jitendra changani Desk/Reporting
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