पंचायतीराज चुनाव आंकलन: गत 20 वर्षों से जिला प्रमुख पद कांग्रेस के पास

कांग्रेस: भीतर और बाहर कड़ी चुनौती
भाजपा : अभी नहीं तो कभी नहीं

By: Deepak Vyas

Published: 20 Nov 2020, 06:51 PM IST

जैसलमेर. पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव का बिगुल बजने के बाद जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के कई वार्डों में सत्ताधारी कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है तो कुछ जगहों पर मजबूत निर्दलीयों ने संघर्ष को त्रिकोणीय बना दिया है। बावजूद इसके प्रमुख व प्रधान पदों की दावेदार ये दोनों पार्टियां हैं। कांग्रेस का जिले के पंचायतीराज सेटअप में पिछले दो दशक से बोलबाला रहा है। इस बार कांग्रेस में केबिनेट मंत्री शाले मोहम्मद और जैसलमेर विधायक रूपाराम मेघवाल के बीच अंदरुनी टकराहट खुलकर सामने आने से पार्टी को भीतर व भाजपा की ओर से बाहरी चुनौती है। इस दोहरी मुसीबत से पार पाना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है तो भाजपा अंदरूनी बिखराव और जमीनी स्तर पर नेताओं व कार्यकर्ताओं की उत्साहहीनता की शिकार नजर आ रही है।
कांग्रेस समर्थित मतदाता असमंजस में
चुनावों में कांग्रेस के मजबूत वोट बैंक मुस्लिम-मेघवाल के बीच असंमजस की वजह से पार्टी के मजबूत उम्मीदवार संघर्ष में फंस गए हैं। पूर्व प्रधान अमरदीन को सम पंचायत समिति के एक ब्लॉक से टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर केबिनेट मंत्री शाले मोहम्मद के परिवार से चार लोग बगावत कर कांग्रेस प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पूर्व प्रधान को पंचायत समिति सदस्य चुनाव का प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से फकीर परिवार और विधायक रूपाराम मेघवाल के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है। जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र के चार जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र और सम और जैसलमेर पंचायत समिति के आधा दर्जन निर्वाचन क्षेत्रों में बागी प्रत्याशियों ने कांग्रेस का चुनावी गणित बिगाड़ दिया है। कुल मिलाकर पंचायत चुनावों में मुस्लिम-मेघवाल गठबंधन तेजी से दरक रहा है। जिला प्रमुख पद पर विगत 20 वर्षों से कांग्रेस का कब्जा है। जिसमें पन्द्रह वर्षों तक मुखिया का पद फकीर परिवार के पास रहा है। गत पांच वर्ष तक विधायक रूपाराम की पुत्री अंजना मेघवाल जिला प्रमुख सीट पर काबिज रही। वर्तमान चुनाव में दोनों के बीच चल रहे स्पष्ट संघर्ष से जिला परिषद के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र संख्या तीन से पार्टी प्रत्याशी व जिला प्रमुख पद की दावेदार अंजना मेघवाल भी बगावत की वजह से कड़े संघर्ष में फंस गई है। इधर, पूर्व जिला प्रमुख अब्दुला फकीर के सामने भाजपा के समर्थन से मुस्लिम प्रत्याशी सरवर खां के ताल ठोकने से कांग्रेस के समीकरण बिगड़ गए हैं। इस वजह से शाले मोहम्मद और रूपाराम मेघवाल को भाजपा के साथ पार्टी के भीतर ही कड़ी चुनौती मिल रही है।
भाजपा के पास अवसर के साथ चुनौती भी
भाजपा का काडर ठेठ गांवों तक मजबूत स्थिति में है। पार्टी के पास अनुशासित कार्यकर्ताओं की लम्बी फौज है। पार्टी के चुनावी रथ के सारथी प्रतापपुरी महाराज हैं। इन चुनावों में केबिनेट मंत्री शाले मोहम्मद और विधायक रूपाराम मेघवाल के बीच की धड़ाबंदी सार्वजनिक हो चुकी है। ऐसे में तेजी से दरकते मुस्लिम-मेघवाल गठबंधन के बाद भाजपा के लिए मौजूदा परिस्थितियों में अभी नहीं तो कभी नहीं जैसे हालात हैं। भाजपा इस अवसर का कितना फायदा ले पाएगी यह उसकी चुनावी रणनीति पर टिका हुआ है। भाजपा जिला परिषद के चार मुस्लिम बाहुल्य निर्वाचन क्षेत्रों को छोड़ दें तो शेष स्थानों पर कांग्रेस के प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे रही है। पार्टी कुछ पंचायत समितियों में प्रधान की दौड़ में बराबर की स्थिति में है। हालांकि प्रमुख व प्रधान के दावेदार घोषित नहीं हुए हैं।
गत 20 वर्षों से जिला प्रमुख पद कांग्रेस के पास है। कांग्रेस में गुटबाजी और बगावत चरम पर है। ऐसी स्थिति में भाजपा के पास गंवाने के लिए भले ही कुछ न हो, लेकिन पाने के लिए बहुत कुछ है। इसके लिए भी उसको चुनौती को पार करना होगा।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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