PATRIKA CAMPAIGN- सिमटता-सिकुड़ता पोकरण- पोकरण में लुट रही जमीन, नियमों का बना तमाशा,

-बेशकीमती जमीन सरकारी जमीन पर अतिक्रमणों की बाढ़

By: jitendra changani

Published: 25 Apr 2018, 06:26 PM IST

जमीन खाली देखते ही बन जाता है पक्का आशियाना
जैसलमेर/पोकरण. यहां न कोई नियम है और न ही कोई कायदे, न कोई रोकने वाला है और न ही कोई टोकने वाला..। आए दिन नियमों की कमर टूटती है और सरकारी जमीन अतिक्रमण की भेंट चढ़ रहे हैं। अतिक्रमणों की बाढ़ में सिकुड़ रही पोकरण नगरी की जमीन की हालत यह है कि परशुराम जयंती पर सरकारी अवकाश होने के बावजूद नगरपरिषद को बैठक बुलानी पड़ी। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि कस्बे में स्थित बेशकीमती सरकारी जमीन पर अतिक्रमणों की भेंट चढ़ रही है। पैर जमाने के लिए पहले घास-फूस व ईंटों से अस्थाई अतिक्रमण और फिर मौका पड़ते ही खाली पड़ी जमीन पर पक्का आशियाना बना लिया जाता है। न तो नगरपालिका प्रशासन का इस ओर ध्यान है और न प्रशासनिक अधिकारियों का। ऐसे में सरकारी जमीन पर कब्जा करना आसान हो जाता है। हकीकत यह है कि अभी कुछ ही महीने पहले खाली पड़ी जमीनों पर पक्के निर्माण बन गए हैं। प्रशासन ने न तो इन्हें हटाने की कोशिश की और न ही नए बसने वालों पर नकेल कसी।
जहां नजर, वहां हो रहा कब्जा
-सरकारी जमीन पर कब्जे की शुरुआत खाली पड़ी जमीन पर अपना अवैध हक जताने के लिए चूने के घोल से, कंकर-पत्थरों की लाइन से व घास-फूस की बाड़ कर निर्धारित क्षेत्र घेर लिया जाता है।
-एक का अवैध निशान देखकर दूसरे अतिक्रमी उसके पड़ोसी बनने की कवायद शुरू कर देते हैं।
-सरकारी जमीन निगलने के लिए अलग से कुछ हिस्से पर निशान लगा जाता है।

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यहां हो रहे कब्जे
पोकरण उपखण्ड मुख्यालय पर स्थित रामदेवसर तालाब की खाली पड़ी जमीन, जैसलमेर रोड, उरमूल के पीछे, आरटीओ कार्यालय के पास, स्थाईनाथ महाराज के आश्रम के पीछे, पाउपाडिया रोड, फलसूण्ड रोड स्थित सरकारी जमीन पर कब्जे हो रहे हैं।

यूं बिक रहा कब्जा
जानकारों की मानें तो अतिक्रमण करने में गिरोह सक्रिय है।
-अतिक्रमणकारियों को कब्जे दिलाने में ऐसे लोगों का ही हाथ रहता है। कब्जा करने के बाद उसे बेच दिया जाता है।

यूं की जाती है कर्तव्य की इतिश्री
अतिक्रमणों की शिकायतें मिलने पर नगरपालिका की ओर से कार्रवाई अवश्य की जाती है। उनकी ओर से कुछ अतिक्रमणों को हटाकर इतिश्री कर ली जाती है। जहां अतिक्रमण की शिकायत होती है, वहां अतिक्रमण हटाने के बाद शेष अतिक्रमणों को यथावत ही छोड़ दिया जाता है। ऐसे में सरकारी भूमि पूरी तरह से खाली नहीं हो पा रही है।

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jitendra changani Desk/Reporting
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