6 माह में 8 थानों में पुलिस को मिले केवल 44 ‘मित्र’

पुलिस व आम जनता के बीच की कड़ी बनाने के लिए शुरू की गई पुलिस मित्र योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। गत छह माह में क्षेत्र के आठ थानों में मात्र 44 मित्र बन पाए है। ऐसे में यह योजना अब तक अपने उद्देश्यों पर खरी नहीं उतर पाई है। अपराधों पर लगाम लगाने के लिए गत वर्ष लागू की गई योजना कागजों में सिमटती नजर आ रही है। कुछ थानों में मित्र बनाने के लिए आवेदन आए हुए है, लेकिन उनके सत्यापन को लेकर न तो अभी तक जिम्मेदारों की ओर से कोई कवायद की गई है और न ही उन्हें प्रोत्साहित करने का कार्य किया जा रहा है।

जैसलमेर/पोकरण. पुलिस व आम जनता के बीच की कड़ी बनाने के लिए शुरू की गई पुलिस मित्र योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। गत छह माह में क्षेत्र के आठ थानों में मात्र 44 मित्र बन पाए है। ऐसे में यह योजना अब तक अपने उद्देश्यों पर खरी नहीं उतर पाई है। अपराधों पर लगाम लगाने के लिए गत वर्ष लागू की गई योजना कागजों में सिमटती नजर आ रही है। कुछ थानों में मित्र बनाने के लिए आवेदन आए हुए है, लेकिन उनके सत्यापन को लेकर न तो अभी तक जिम्मेदारों की ओर से कोई कवायद की गई है और न ही उन्हें प्रोत्साहित करने का कार्य किया जा रहा है। हालांकि छह माह में 44 मित्र तो बना दिए गए, लेकिन उन मित्रों की ओर से भी पुलिस की मदद के लिए योजना के मुताबिक कोई कार्य नहीं किया गया है। गौरतलब है कि सामुदायिक संपर्क समूह सीएलजी को मजबूत करने के साथ इस योजना के कई महत्वपूर्ण कार्य होने थे, लेकिन योजना में पुलिस व आमजन की ओर से रुचि नहीं दिखाए जाने के कारण कोई कार्य नहीं हो रहा है।
यूं किया जाता है आवेदन
पुलिस मित्र बनने के लिए राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर जाकर पुलिस मित्र योजना का ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद पुलिस की जिम्मेदारी है आवेदनकर्ता के अपराधिक रिकॉर्ड की जांच करना। आवेदन सही पाए जाने पर उसे मित्र बनाया जाएगा। इसके लिए न्यूनतम 21 वर्ष की आयु होना भी अनिवार्य है।

ये है मित्र की जिम्मेदारी
पुलिस मित्र के जिम्मे अपराध की रोकथाम में मदद, पीडि़त सहायता कार्यक्रम, जागरुकता अभियान, पुलिस जनता खेल कार्यक्रम, अपराध जागरुकता अभियान, बंदी व अन्य निषेध अपराधियों का पुनर्वास, यातायात सहायता और जागरुकता, पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम, अतिक्रमण, बाल दुव्र्यवहार या अन्य असामाजिक गतिविधियों से संबंधित जागरुकता, साम्प्रदायिक सद्भाव के प्रोत्साहन का अभियान, मानव अधिकार जागरुकता, अपराधिक सूचनाएं प्रदान करना, महिला अधिकार जागरुकता, सोशल मीडिया विषयों में सहायता, साइबर क्राइम व बैंक ठगी पर जागरुकता, एंटी नारकोटिक्स अभियान, चिकित्सकीय क्षेत्र मेें सहायता, समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए अभियान, शैक्षणिक क्षेत्र में सहायता, धार्मिक उत्सवों, जुलूस एवं मेलों आदि में सहयोग, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहायता, अपने क्षेत्र में रात्रि गश्त और वैवाहिक विवाद हस्तक्षेप और परामर्श करना जैसे कार्य है।
यह है हकीकत
पुलिस थाना मित्र
पोकरण 6
भणियाणा 10
लाठी 8
नाचना 5
नोख 1
सांकड़ा 4
फलसूण्ड 0
रामदेवरा 10

करेंगे मॉनीटरिंग
आमजन को पुलिस से जोडऩे व अपराधों पर रोकथाम के लिए पुलिस मित्र योजना शुरू की गई थी। पुलिस की ओर से मित्र बनाए जा रहे है। इसके लिए आमजन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा तथा योजना की प्रभावी मोनीटरिंग की जाएगी। मित्र बनने के बाद पुलिस की ओर से समन्वय बनाए रखा जाएगा।
मोटाराम गोदारा, पुलिस उपाधीक्षक, पोकरण।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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