scriptPrabhat Pheri taken out under the campaign to stop child marriage | बाल विवाह रोको अभियान के तहत निकाली प्रभात फेरी | Patrika News

बाल विवाह रोको अभियान के तहत निकाली प्रभात फेरी

बाल विवाह रोको अभियान के तहत निकाली प्रभात फेरी

जैसलमेर

Updated: May 02, 2022 07:14:42 pm

जैसलमेर. राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रविंद्र कुमार के निर्देशन में आगामी अक्षय तृतीय एवं पीपल पूर्णिमा के अबूझ सावो को देखते हुए बाल विवाह रोको अभियान के अंतर्गत इंदिरा इंडोर स्टेडियम से विधिक जागरुकता के क्रम में प्रभात फेरी का आयोजन किया गया। इस दौरान 10 किलोमीटर की मैराथन दौड़ इंदिरा स्टेडियम से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों व आवासीय कॉलोनियों से होते हुए एडीआर भवन पहुंची। प्रभात फेरी में बाल विवाह रोको एवं बालिका शिक्षा से संबंधित विधिक जागरूकता की तख्तियां हाथों में लिए हुए दौड़ लगायी तथा पेंपलेट बांटकर प्रचार-प्रसार किया गया। इसी मैराथन दौड़ के दौरान इस माह राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देषानुसार एक्शन प्लान के तहत ड्रॉप आउट स्कूली बच्चों को शिक्षा से जोडऩे के साथ-साथ 14 मई को आयोजित की जाने वाली आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत के अंतर्गत अधिक से अधिक राजीनामा योग्य प्रकरण यथा फौजदारी प्रकरण, एनआई एक्ट प्रकरण, धन वसूली प्रकरण, एम.ए.सी.टी प्रकरण, बिजली, पानी एवं अन्य बिल भुगतान संबंधी प्रकरण (अशमनीय के अलावा), वाणिज्यिक विवाद, बैंक विवाद को रखवाकर निस्तारित करवाने के प्रयास किए जाएंगे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुनील कुमार बिश्नोई (अपर जिला न्यायाधीश) ने मैराथन दौड़ समाप्त होने के पश्चात एडीआर भवन परिसर में पुरस्कार के रूप में बालकों को अल्पाहार करवाया जाकर कलम बांटे गए। इस कार्यक्रम में दलपतसिंह राजपुरोहित (अपर जिला न्यायाधीश), सत्येद्रप्रकाश चोटिया (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट), राकेश बिश्नोई (खेल अधिकारी) व खिलाड़ी उपस्थित रहे।
बाल विवाह रोको अभियान के तहत निकाली प्रभात फेरी
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अक्षय पुण्य की प्राप्ति पर्व अक्षय तृतीया: आचार्य
जैसलमेर. सनातन धर्म में वैषाख शुक्ल पक्ष की तृतीया ( अक्षय तृतीया ) प्रमुख त्यौहार है। स्वर्णनगरी जैसलमेर के युवा ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ पं. उमेश आचार्य ने बताया कि अक्षय तृतीया अक्षय पुण्य प्राप्ति का पर्व है। अक्षय तृतीया पर दिए गए अन्न, जल, वस्त्र व स्वर्ण दान तथा किए गए स्नान, हवन, जप-तप, व्रत आदि कर्मो का अनन्त फल जन्म - जन्मान्तर तक मिलता है। आचार्य ने बताया कि भारतीय ज्योतिष में अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त के रूप में जाना जाता है। अक्षय तृतीया पर्व पर मांगलिक, शुभ व नवीन कार्य का श्रीगणेश करना, नवीन वस्त्र एवं आभूषण धारण करना लाभकारी माना गया है। वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान ने नर - नारायण, परशुराम एवं हयग्रीव अवतार लिए थे। त्रैतायुग का प्रारम्भ भी अक्षय तृतीया तिथि को ही हुआ था।

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