50-60 किलोमीटर प्रति घंटा रफ्तार की आंधी में घुसपैठ रोकने की तैयारी, आंधी-तूफान में भी अडिग मनोबल

50-60 किलोमीटर प्रति घंटा रफ्तार की आंधी में घुसपैठ रोकने की तैयारी, आंधी-तूफान में भी अडिग मनोबल

Deepak Vyas | Publish: May, 18 2019 07:56:49 AM (IST) | Updated: May, 18 2019 10:17:55 AM (IST) Jaisalmer, Jaisalmer, Rajasthan, India

पाकिस्तान से सटी जैसलमेर जिले की करीब 470 किलोमीटर लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी में जुटे सीमा सुरक्षा बल के जवान इन दिनों खास तौर पर चौकसी बरत रहे हैं।

जैसलमेर। पाकिस्तान से सटी जैसलमेर जिले की करीब 470 किलोमीटर लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी में जुटे सीमा सुरक्षा बल के जवान इन दिनों खास तौर पर चौकसी बरत रहे हैं। समूचे रेगिस्तानी क्षेत्र में पिछले दिनों से आंधी-तूफान के कारण सीमा पर कई बार रेतीले बवंडर उठते हैं और दृश्यता एकदम से कम हो जाती है। ऐसे में सीमापार से घुसपैठ की किसी भी आशंका से निपटने के लिए बल के जवान और अधिकारी विशेष रणनीति के तहत सघन चौकसी कर रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल ने सीमा पर खुर्रा चैकिंग, व्हीकल और फुट पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। रेत के समंदर में आए सीमा क्षेत्र में आंधी-तूफान और प्रचंड गर्मी के बीच भी बल के जवान मुस्तैदी से अपने कर्तव्य को अंजाम दे रहे हैं। उनके जोश को आंधी-तूफान से उपजे हालात इंच भर भी हिला नहीं पा रहे हैं।


आंखों पर चश्मा, सिर पर पटका
तेज गर्मी के बीच पिछले दिनों से चल रहे अंधड़ के सिलसिले के बीच सीमा प्रहरी आंखों पर काले चश्में और सिर पर खाकी पटका बांध कर ड्यूटी पर जुटे हैं। सर्दियों में कोहरे के कारण दृश्यता कम होती है, वैसी ही स्थिति आंधी के दौरान बनती है। ऐसे में बल ने व्हीकल और फुट पेट्रोलिंग में इजाफा कर दिया है। जैसे ही अंधड़ शांत होता है, जवान खुर्रा चैकिंग में जुट जाते हैं, जिससे किसी भी तरह की हरकत का तुरंत पता चल जाए। आंधी-तूफान की परेशानियों के बीच फिलहाल गर्मी से थोड़ी राहत जवानों को मिली है। तैनात जवानों को अंधड़ की पूर्व सूचना समय पर दे दी जाती है ताकि वे पहले से तैयार हो सकें।

 

गर्मी भीषण, हौसला भरपूर
मरुस्थलीय सीमा क्षेत्र में गर्मी कई बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाती है। देश की सीमाओं की रक्षा में जुटे जवानों को कई बार दिन में ५० डिग्री या उससे भी अधिक तापमान में अपने कर्तव्य को अंजाम देना होता है। एकदम निर्जन सीमा क्षेत्र में हाथों में हथियार उठाए ये जवान इतनी प्रतिकूलताओं के बीच भी भरपूर हौसले के साथ ड्यूटी कर रहे हैं। बल की तरफ से उनके लिए पीने के पानी तथा कूलरों की शीतल हवा के अलावा जरूरी बंदोबस्त किए हुए हैं। सीमा क्षेत्र में मिनी एमआई रूम बनाए हुए हैं, जहां मौसम की चपेट में आए जवानों का इलाज किया जा सकता है। हालांकि जवानों का जज्बा इतना ऊंचा है कि वे प्रचंड गर्मी का मुकाबला नींबू पानी आदि से कर लेते हैं।

 

सीमा चौकियां रहती हैं कूल-कूल
-जैसलमेर जिले में कई सीमा चौकियों पर डक कूलिंग सिस्टम स्थापित किया जा चुका है।
-शीतलता प्रदान करने के मामले में एयरकंडीशनर के समकक्ष डक कूलर के चलते सीमा चौकियों का तापमान खासा कम रहता है।
-डक कूलर अभी नहीं लगे हैं, ऐसी सीमा चौकियों पर कूलर लगवाए गए हैं।
-पीने के पानी को ठंडा रखने के लिए बड़े घड़ों की व्यवस्था भी है।
-जवानों के रहने के लिए बनाए गए बंकरों व कमरों को सूरज की सीधी किरणों से बचाने के लिए खीपें लगाई जाती है।
-कई चौकियों में वाटर कूलर की व्यवस्था है। गर्मी के इस मौसम में नीबू पानी का सेवन दिनभर करने की सलाह जवानों को दी जाती है।
-जवान भी अपने शरीर को पूरी तरह से ढक कर रखते हैं।

 

फैक्ट फाइल -
- 470 किलोमीटर लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा
- 02 सेक्टर जैसलमेर जिले में
- 3500 जवान मुस्तैदी से तैनात

 

हर मौसम में मुस्तैद
सीमा सुरक्षा बल के जवान प्रत्येक मौसम में पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी ड्यूटी करते हैं। वे किसी भी प्रतिकूल मौसम में अपनी जगह नहीं छोड़ते। अंधड़ के दौरान खास निगरानी की जाती है।
- एमएस राठौड़, उपमहानिरीक्षक, सीसुब, जोधपुर

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