नवनिर्वाचित छात्रसंघ अध्यक्ष का महाविद्यालय मे किया स्वागत

नवनिर्वाचित छात्रसंघ अध्यक्ष का महाविद्यालय मे किया स्वागत

Deepak Vyas | Publish: Sep, 16 2018 05:02:45 PM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 05:02:46 PM (IST) Jaisalmer, Rajasthan, India

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से समर्थित नवनिर्वाचित छात्रसंघ अध्यक्ष महेन्द्रसिंह सोढ़ा का विजयी होने के बाद पहली बार एसबीके महाविद्यालय मे आने पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं व महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत किया गया ।

जैसलमेर. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से समर्थित नवनिर्वाचित छात्रसंघ अध्यक्ष महेन्द्रसिंह सोढ़ा का विजयी होने के बाद पहली बार एसबीके महाविद्यालय मे आने पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं व महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत किया गया । छात्रसंघ अध्यक्ष ने स्वामी विवेकानंन्द की प्रतिमा पर मालार्पण कर महाविद्यालय मे आगमन किया तथा छात्र-छात्राओं से मिलकर महाविद्यालय की समस्याओ को सुना। उन्होंने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जेके पुरोहित व सभी स्टाफ ने आशीर्वाद दिया।

देश के विकास व एकता में हिन्दी भाषी के योगदान पर चर्चा
-हिन्दी दिवस पर काव्य गोष्ठी का आयोजन
जैसलमेर. जिले भर में हिन्दी दिवस पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। स्थानीय कवियों साहित्यकारों व हिन्दी प्रेमियों की ओर से सार्वजनिक जिला पुस्तकालय में विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन कर देश के विकास एवं एकता में हिन्दी भाषी के महत्व व योगदान पर चर्चा की। वरिष्ठ साहित्यकार दीनदयाल ओझा की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी का प्रारम्भ तमिल भाषी कवि व साहित्यकार मणिक्कम द्वारा करते हुए हिन्दी में ‘गुरसा हानिकारक’ कविता से की। व्याख्याताा अशोक कुमार ने कहा कि हमें अंग्रेजी ही विकास कर सकती है, इस मानसिकता को छोडऩा होगा। तभी हम अपनी संस्कृति व विरासत को बचा पाएंगे। कवि राम लखारा विपुल ने अपनी कविता हिन्दी है... अभिमान हमारा हिन्दी जनमन गान हमारा के जरिए हिन्दी की महता को स्थापित किया। कवि ओम अंकुर ने कवि कालिदास के स्मरणों से काव्य प्रारम्भ करते हुए कहा कि हिन्दी विश्व की ऐसी अनुपम भाषा है, जिसमें हमें छंद व अलंकारों के उपहार प्राप्त है। साहित्यकार नंदकिशोर दवे ने वर्तमान समय में हिन्दी की दुर्दशा को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि आज हिन्दी व हिन्दू दोनों ही अपने घर में अपमानित है। कवि भोजराज वैष्णव ने हिन्द को हिन्दियों हिन्दी का मान बढाओं। रंगकर्मी विजय बल्लाणी ने कहा कि हिन्दी में लिखने वालो की कमी नहीं है, लेकिन पढऩे वाले कम है। साहित्य कार लक्ष्मीनारायण में मजदूर केन्द्रीत कविता प्रस्तुत कर हिन्दी भाषा की महिमा बताई। कवि आनन्द जगाणी ने हिन्दी की महता बताई। हास्य कवि गिरधर भाटिया ने वर्तमान समय में नारी अत्याचार व दुर्दशा पर कविता ओ मेरी अजन्मी बेटी नहीं दूंगी में जन्म तुझे क्योंकि यह दुनिया नही है लायक.. तुम्हारे प्रस्तुत की। डॉं. ओम प्रकाश भाटिया ने कविता के माध्यम से अजन्मी बेटी के मां की दुर्दशा का चित्रणा व्यक्त किया। कवि आरके व्यास ने भी कविता प्रस्तुत की। मांगीलाल सेवक ने कविता हिन्दी को हदय में वसाओ भाई व हिन्दी हमारी माता है प्रस्तुत की। अध्यक्ष दीनदयाल ओझा ने छंद व सवैये सुनाए। गोष्ठी में भीमसिंह भाटी सहित अन्य साहित्य अनुरूगी उपस्थित थे। अन्त में पुस्तकालय अध्यक्ष आनन्द कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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