Jaisalmer- खुशखबरी...पोकरण में बढ़ा गोडावण का कुनबा, 11 से हुए 31

- जंगल में नन्हे गोडावण की अठखेलियां मन को कर रहे मोहित

By: jitendra changani

Published: 15 Sep 2017, 10:46 AM IST

मनोहर जोशी/दीपक सोनी
जैसलमेर/ पोकरण. पोकरण के जंगल से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुश खबरी आई है। दुनिया भर में द ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के रुप में पहचाना जाने वाले दुर्लभ राज्य पक्षी के कुनबे में तीन सालों में करीब तीन गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जानकारों की माने 2015 में की गई गोडावण की गणना में पोकरण के गोडावण रहवासी क्लोजर में 11 गोडावण देखे गए थे, जो अब बढकऱ 2017 में 31 हो गए है। गोडावण के कुनबे के बढऩे का सबसे बड़ा कारण यहां के जंगल में गोडावण के अंडों को सुरक्षित व संरक्षित करने के प्रयास माने जा रहे है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार गत साल यहां आधा दर्जन मादा गोडावण ने अंडे दिए थे, वहीं इस साल करीब 11 मादा गोडावण ने अंडे दिए है, जो वर्तमान में परिपक्ता के बाद नन्हे गोडावण के रुप में इन दिनों अठखेलियां कर जंगम में हर किसी के मन को मोहित कर रहे है।
तीन सालों में गणना की स्थिति
वर्ष                                                                  गोडावण
2014-15                                                            11
2015-16                                                           20
2016-17                                                            31



Jaisalmer patrika
IMAGE CREDIT: patrika

तीन साल में तीन गुना बढ़े
विशेषज्ञों के अनुसार पोकरण स्थित गोडावण रहवासी क्लोजर में तीन सालों में गोडावण की संख्यां में तीन गुना इजाफा हुआ है, जो बड़ी उपलब्धि है। जानकारों के अनुसार पोकरण की आबोहवा गोडावण को पूर्वकाल से ही पसंद आ रही है। यही कारण है कि यहां अक्सर गोडावण परिवार की तरह देखे जा रहे है। उनके अनुसार गोडावण की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंधन होने के बाद से यह स्थिति बढ़ी है।
गोडावण बढऩे के यह बड़े कारण
- गोडावण प्रजनन व रहवासी स्थलों पर खुफिया कैमरो से नजर
- गोडावण रहवासी क्लोजरों में अन्य हिंसक वन्यजीवों के प्रवेश पर पाबंदी
- अंडो को वन्यजीवो के कुलाचों से सुरक्षा के पुख्ता प्रबंधन
- क्लोजरों में पानी की पर्याप्त व्यवस्था
- हिंसक वन्यजीवो से सुरक्षा के लिए क्लोजर के चारो ओर फेंसिंग व तारबंदी

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31 गोडावण दिखने से बढ़ी खुशी
विशेषज्ञो के अनुसार वन विभाग की डीएनपी रेंज ने तीन साल पहले गोडावण संरक्षण के लिए रेंज स्थापित कर यहां गोडावण प्रजनन केन्द्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित कार्य गोडावण संरक्षण का कार्य शुरू कर गोडावण के अनुकूल स्थान बनाए गए। जिसका परिणाम गोडावण के कुनबे में हुई बढ़ोतरी के रुप में सामने है।
फैक्ट फाइल
- 3800 वर्ग हेक्टेयर में फैला है डीएनपी
- 800 वर्ग हेक्टयर है डीएनपी की पोकरण रेंज का कार्यक्षेत्र
- 3 साल पहले 2015 में 11 गोडावण थे पोकरण रेंज में
- 31 गोडावण की संख्या पहुंची गत तीन सालो में
- 8 जलबिन्दु बने हुए डीएनपी के पोकरण रेंज क्षेत्र में।
- 4 वन्य सुरक्षाकर्मी तैनात है दुर्लभ गोडावण के संरक्षण व सुरक्षा के लिए।
- 1 क्षेत्रिय वन अधिकारी भी करते है व्यवस्था की मॉनिटरिंग
- 8 खुफिया कैमरे लगे है जलबिन्दुओं पर
नन्हे गोडवण कर रहे अठखेलिया
पोकरण-रामदेवरा मार्ग पर स्थित गोडावण रहवासी क्षेत्र में अच्छी बारिश के बाद यहां उगी दूब के बीच इन दिनों नन्हे गोडावण की अठखेलियां जंगल को मनमोहक बना रही है। सुबह व शाम की सूरज के शीतल किरणों के बीच इनकी मस्ती हर किसी को सुकून देकर वन्यजीव प्रेमियों के मन को भी आनन्दित कर रही है।
सुरक्षा के हर संभव प्रयास
गोडावण संरक्षण के लिए डीएनपी की पोकरण वन्यजी रेंज में वन्यजीवों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए है। गोडावण की सुरक्षा व संरक्षण के विशेष प्रयास रहते है। तीन सालों में यहां 20 से अधिक गोडावण बढ़े है। जिससे वन्यजीव सुरक्षा में लगे कार्मिकों में उत्साह है। यहां वन्यजीवों की रक्षा व सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए जाएंगे।
- पूरणसिंह राठौड़, क्षेत्रीय वन अधिकारी वन्यजीव, पोकरण।

jitendra changani Desk/Reporting
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