सोनार दुर्ग पर जता रहे ‘अधिकार’,सुविधा व सुरक्षा कब देंगे जिम्मेदार

साढ़े आठ सौ वर्ष के बुजुर्ग सोनार दुर्ग का आकर्षण आज भी जवां है। इस पर ‘अधिकार’ जताने वालों की कमी नहीं है, लेकिन उसे मजबूती से कायम रखने की जिम्मेदारी को निभाने के लेकर जिम्मेदारों की बेरुखी का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा।

जैसलमेर. साढ़े आठ सौ वर्ष के बुजुर्ग सोनार दुर्ग का आकर्षण आज भी जवां है। इस पर ‘अधिकार’ जताने वालों की कमी नहीं है, लेकिन उसे मजबूती से कायम रखने की जिम्मेदारी को निभाने के लेकर जिम्मेदारों की बेरुखी का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। इसके साथ ही सुरक्षा को लेकर प्रबंधों को लेकर भी जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है। सोनार किला अपने स्थापत्य और क्लासिक बनावट के दम पर सात समंदर पार से सैलानियों को खींच लाता है, वहीं जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह कमजोर भी हो रहा है। पुरातत्व विभाग, जिला प्रषासन, नगरपरिषद के अलावा रूडीप, डिस्कॉम, जलदाय, दूरसंचार आदि महकमों का दखल दुर्ग में रहता आया है। उनके बीच आवश्यक तालमेल नहीं होने से कई समस्याएं उत्पन्न होती रही है। यूं तो भारतीय सर्वेक्षण एवं पुरातत्व विभाग ने दुर्ग को संरक्षित स्मारक की श्रेणी में शामिल कर दुर्ग के भीतर और उसके आसपास के 100 मीटर के दायरे में निर्माण कार्यों के संबंध में पाबंदियां तो लगा दी है। वहीं हकीकत यह भी है कि दुर्ग को नुकसान पहुंचाने वाली प्रवृत्तियों को लेकर जिम्मेदारों ने तंद्रा भी नहीं तोड़ी है। दुर्गवासियों की मानें तो कभी कभार ही जोधपुर या जयपुर से अधिकारी यहां औपचारिक दौरा कर चले जाते हैं।
हकीकत यह भी
किले में विद्युत तारों के जंजाल को समाप्त कर उन्हें अंडरग्राउंड करने की योजना कोई दो दशकों से बनाई जा रही है, लेकिन यह समस्या जस की तस है। दुर्गवासी यह भी बताते हैं कि जलदाय विभाग यहां रोजाना जलापूर्ति करता है, लेकिन मौजूदा समय में दुर्ग के लक्ष्मीनाथ मंदिर के पास अवस्थित पानी की टंकी के जर्जर होने के बाद से किले में आए दिन जलापूर्ति का संकट रहता है।
दो वार्ड होने के बावजूद नहीं हो रहे काम
सोनार दुर्ग को नगरपरिषद के दो वार्डों क्रमश: 16 व 17 में बांटा गया है। हकीकत यह है कि परिषद ने यहां अब तक बहुत कम काम करवाए हैं। साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था का दावा किया जाता है, लेकिन इसमें कई खामियां आज भी नजर आ रही है।

Deepak Vyas
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