JAISALMER NEWS- सम में ठगी और लूट का तिलिस्म कर रहा शर्मसार, यह है इसके जिम्मेदार!

सम में ‘फेक’ रिसोट्र्स चलाने वाले जैसलमेर पर्यटन को कर रहे बदनाम, पर्यटन विभाग मूकदर्शक, पुलिस जता रही बेबसी

 

By: jitendra changani

Published: 05 Mar 2018, 11:34 AM IST

टूट नहीं रहा ठगी और लूट का ऑनलाइन तिलिस्म!
जैसलमेर . गुजरात के हिम्मतभाई ने माउंट आबू पहुंचकर सम सेंड ड्यून्स पर प्रतिष्ठित रिसोर्ट के जैसलमेर स्थित प्रतिनिधि को फोन कर बताया कि, उन्होंने टे्रवल पोर्टल के जरिए उनके रिसोर्ट में अगले दिन के लिए टेंट की बुकिंग करवा रखी है और वह आ रहे हैं। इस पर उन्होंने अपना रिकॉर्ड खंगाल कर हिम्मत भाई को पुन: फोन कर बताया कि, उनके रिसोर्ट में उनकी कोई बुकिंग है ही नहीं। प्रत्युत्तर में घबराए हिम्मतभाई ने कहा कि उन्होंने तो अग्रिम भुगतान भी वेब पोर्टल में बताए बैंक अकाउंट में करवा दिया।
दरअसल, यह महज एक बानगी है। जैसलमेर के सम सेंड ड्यून्स पर ट्रेवल पोर्टल पर ‘फेक’ रिसोट्र्स संचालित कर अज्ञात तत्व मोटी कमाई कर रहे हैं। वहीं सैलानियों से ठगी के साथ जैसलमेर तथा सम पर्यटन का नाम भी खराब कर रहे हैं। इस संबंध में पुलिस ने पिछले दिनों अपने स्तर पर कार्रवाई करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रही और दूसरी तरफ पर्यटन महकमे को इस सबसे मानो कोई सरोकार ही नहीं है।
ऑनलाइन ठगी का चोखा धंधा
विभिन्न ऑनलाइन ट्रेवल पोर्टल पर सम के रिसोट्र्स की जानकारी खंगालने पर करीब पौने दो सौ रिसोट्र्स सामने आ जाते हैं। जबकि धरातल पर यहां 68 रिसोट्र्स और कैम्प्स ही संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में एक सौ से ज्यादा फेक रिसोट्र्स और कैम्प्स ऑनलाइन ठगी और पर्यटकों से एक तरह की सीधी लूट का जरिया बन रहे हैं। वेब पोर्टल संचालित करने वाले ऐसे फेक रिसोट्र्स आदि के खिलाफ कोई कार्रवाई करने को भी तैयार नहीं हैं। जानकारी के अनुसार वेब पोर्टल्स पर रिसोर्ट आदि को सूचीबद्ध करवाना बड़ा आसान है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन ही संपन्न हो जाती है। पोर्टल संचालित करने वाले उनके भौतिक सत्यापन की जहमत नहीं उठाते और न ही प्रमाणित कागजात की मांग कर रहे हैं। जिससे ऑनलाइन ठगी का धंधा जोरों से चल रहा है।
सब कुछ ‘हवा’ में
फेक रिसोट्र्स-कैम्प्स वाले वेब पोर्टल पर अपनी सम्पत्ति के नाम पर दूसरे रिसोट्र्स-होटल्स आदि के टेंट्स-हट्स आदि के फोटो उठा कर चिपका देते हैं। वास्तविकता में जिस नाम के रिसोट्र्स आदि बताकर पर्यटकों से बुकिंग ले ली जाती है, उस नाम की सम्पत्ति सम में है ही नहीं। ऐसा करने वाले बुकिंग लेकर दूसरे रिसोट्र्स वालों के यहां पर्यटकों को ठहराते हैं, जहां उन्हें बताई गई गुणवत्ता की सेवाएं नहीं मिलती और न ही कोई जवाबदेहिता होती है क्योंकि जहां पर्यटक ठहरते हैं, वे सीधे तौर पर उनके प्रति जवाबदेह नहीं होते। कई बार तो पर्यटकों से पैसा जमा करवाकर ठगी करने वाले अपने मोबाइल स्विच ऑफ कर बैठ जाते हैं। उनका कोई ठौर-ठिकाना नहीं होता, लिहाजा पर्यटक अपने नसीब को कोस कर रह जाते हैं।

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IMAGE CREDIT: patrika

पुलिस को नहीं मिले रिसोर्ट
गत दिनों सम में ऑनलाइन ठगी के एक-दो प्रकरण सामने आने पर सम थाना पुलिस ने ठगी के आरोपित रिसोट्र्स को खोजने का प्रयास किया, लेकिन संबंधित नाम वाले रिसोर्ट उन्हें नहीं मिले। यह भी गौरतलब है कि पर्यटकों के साथ आए दिन ठगी और धोखाधड़ी की घटनाओं के बावजूद वे पुलिस से शिकायत करना नहीं चाहते। चंद दिन के लिए बाहरी शहरों से यहां आने वाले सैलानी पुलिस में शिकायत कर कानूनी कार्रवाई के पचड़े में नहीं पडऩा चाहते। उनकी यह मानसिकता ठगी करने वाले तत्वों के लिए रक्षा कवच का काम ? कर रही है।

फैक्ट फाइल -
-05 लाख से ज्यादा सैलानी प्रतिवर्ष पहुंचते हैं सम
- 68 रिसोट्र्स सम और आसपास के क्षेत्र में संचालित
- 42 किलोमीटर दूर है जैसलमेर से सम सेंड ड्यून्स

टे्रवल पोर्टल नहीं कर रहे कार्रवाई
सम क्षेत्र में फेक रिसोट्र्स आदि के खिलाफ शिकायत करने के बाद भी टे्रवल पोर्टल्स की ओर से उन्हें हटाने की कार्रवाई नहीं की जा रही। इससे सम क्षेत्र की बदनामी होती है। जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग को स्वच्छ पर्यटन के लिए इस तरह की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगवाना ही चाहिए।
- कैलाश व्यास, अध्यक्ष, सम केम्प एंड रिसोट्र्स वेलफेयर सोसायटी, सम

कार्रवाई करवाएंगे
पर्यटकों के साथ ऑनलाइन ठगी पर रोक लगाने के लिए लिखित में शिकायत मिलने पर निदेशालय स्तर से कार्रवाई करवाएंगे। इस संबंध में हमने अपने स्तर पर कुछ सूचनाएं एकत्रित भी करवाई हैं।
-भानूप्रताप, उपनिदेशक, पर्यटक स्वागत केंद्र, जैसलमेर

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jitendra changani Desk/Reporting
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