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जैसलमेर

… ताकि भीड़ के कारण न हो भगदड़, समान हो बैरिकेड्स की व्यवस्था

हाथरस में हुए हादसे को देखते हुए रामदेवरा में भी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की दरकार है। गौरतलब है कि लोक देवता बाबा रामदेव का अंतरप्रांतीय भादवा मेले की अवधि तो केवल भादवा माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया से एकादशी तक 10 दिन की है, लेकिन श्रद्धालुओं की आवक श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में शुरू हो जाती है और भादवा माह की पूर्णिमा तक जारी रहती है।

जैसलमेरJul 03, 2024 / 08:26 pm

Deepak Vyas

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हाथरस में हुए हादसे को देखते हुए रामदेवरा में भी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की दरकार है। गौरतलब है कि लोक देवता बाबा रामदेव का अंतरप्रांतीय भादवा मेले की अवधि तो केवल भादवा माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया से एकादशी तक 10 दिन की है, लेकिन श्रद्धालुओं की आवक श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में शुरू हो जाती है और भादवा माह की पूर्णिमा तक जारी रहती है। डेढ़ माह में यहां 40 से 50 लाख श्रद्धालु पहुंचकर बाबा की समाधि के दर्शन करते है। ऐसे में रामदेवरा में की गई बैरिकेड्स की व्यवस्था असमान होने के कारण हर बार हादसे और भगदड़ की आशंका बनी रहती है। दो दिन पूर्व उत्तरप्रदेश के हाथरस में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान हुई भगदड़ में 122 लोगों की मौत हो गई, वहां श्रद्धालुओं की भीड़ केवल 20 से 25 हजार थी। जबकि रामदेवरा में भीड़ दो लाख से अधिक होती है। ऐसे में यहां मेला आयोजकों को अभी से विचार करने की जरुरत है। रामदेवरा में मेले के दौरान प्रशासन, ग्राम पंचायत व बाबा रामदेव समाधि समिति की ओर से सभी व्यवस्थाएं की जाती है। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए बेरीकेट्स लगाए जाते है। समाधि स्थल परिसर में जिग-जैग बैरिकेडिंग लगी हुई है। मुख्य द्वार से नोखा धर्मशाला तक बैरिकेडिंग की जाती है। विधिवत रूप से मेला भादवा माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को शुरू होता है, इसको लेकर श्रद्धालुओं की कतार तीन से चार किलोमीटर तक पहुंच जाती है और दिन भर में करीब दो-ढाई लाख श्रद्धालु दर्शन करते है। समाधि से नोखा चौराहे की दूरी करीब दो-ढाई किलोमीटर है। ऐसे में कतारें तीन से चार किलोमीटर पहुंचने पर वहां न तो बैरिकेडिंग होती है, न ही छाया, पानी आदि की व्यवस्था।

हकीकत यह भी

  • मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए समाधि स्थल से अंतिम छोर तक लगाए बैरिकेड्स की संख्या समान नहीं होती है।
  • मेले के पहले दिन कतार का अंतिम छोर आरसीपी गोदामों के पास तक रहता है। यहां बैरिकेड्स नहीं होते।
  • नोखा धर्मशाला के पास तक टिनशेड भी लगे हुए है और दो कतारेंं लगी रहती है।
  • यही कतारें आगे बढ़ते-बढ़ते करणी द्वार से आगे निकलने पर पहले पुलिए के पास तीन हो जाती है।
  • समाधि स्थल के मुख्य द्वार के आगे से पहले पुलिए पर चार कतारों की व्यवस्था है।
  • समाधि स्थल के अंदर 8 कतारें चलती है। साथ ही बैरिकेडिंग भी जिग-जैग लगी हुई है।
  • जिग-जैग बैरिकेडिंग के कारण मंदिर परिसर में एक साथ 10 से 15 हजार श्रद्धालु खड़े रहते है।
  • भीड़ उमडऩे पर कतारें नोखा धर्मशाला से आगे पहुंच जाती है। यहां बेरीकेडिंग की सही व्यवस्था नहीं होने के कारण श्रद्धालु कतार की बजाय भीड़ की तरह आगे बढ़ते है। – असमान बैरिकेडिंग से भगदड़ की स्थिति में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

आगे बढऩे की होड़

मेलावधि में नोखा चौराहे तक बैरिकबेरिकेट्स लगाए जाते है। जबकि कतारें नोखा चौराहे से आगे आरसीपी गोदामों व रेलवे लाइन तक पहुंच जाती है। पीछे बेरीकेडिंग नहीं होने पर श्रद्धालुओं की भीड़ अपने अनुसार ही कतारें बनाती है। समाधि स्थल तक पहुंचने के दौरान बढ़ते क्रम में बैरिकेडिंग की व्यवस्था है। ऐसे में जब श्रद्धालु आगे बढ़ते है तो पीछे जगह ज्यादा हो जाती है। इस स्थिति में श्रद्धालु कतार भूलकर जत्थे के रूप में आगे बढ़ते है। ऐसे में भगदड़ की स्थिति हो जाती है।

भीड़ उमडऩे पर परेशानी

यूं तो श्रद्धालुओं की आवक डेढ़ माह तक होती है, लेकिन दो लाख व उससे अधिक भीड़ कुछ विशेष मौकों पर ही होती है। भादवा माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया के दिन भीड़ अधिक रहती है। इस दौरान कतारें तीन से चार किलोमीटर तक पहुंचती है। ऐसे में भीड़ से भगदड़ मचने और हादसे का भय रहता है।

यह हो व्यवस्था

रामदेवरा में श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर लगाए जाने वाले बेरीकेट्स की संख्या बराबर होनी चाहिए। समाधि स्थल परिसर में आठ कतारें चलती है। जबकि यह कतारें आगे चलते-चलते दो हो जाती है। इन बैरिकेट्स को एकसमान किया जाए तो भगदड़ की आशंका नहीं के बराबर हो जाएगी। समाधि स्थल के मुख्य द्वार से चलने वाली चार कतारों को अंतिम छोर तक असमान किए जाने की दरकार है।

फैक्ट फाइल:-

  • 10 दिन तक होती है मेलावधि
  • 40 लाख से अधिक श्रद्धालु करते है दर्शन
  • 3 से 4 किलोमीटर तक पहुंचती है कतारें

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