विश्व रक्तदाता दिवस पर विशेष: कोरोना नहीं डिगा सका रक्तदाताओं का हौसला

-लॉकडाउन में भी ब्लड बैंक में खून की नहीं आई कमी
- बस एक संदेश पर रक्तदान को पहुंच रहे अस्पताल

By: Deepak Vyas

Published: 14 Jun 2020, 10:02 AM IST

जैसलमेर. कोरोना संक्रमण के भय और उसके चलते गत अर्से करीब ढाई माह तक लागू किए गए लॉकडाउन ने जहां अधिकांश लोगों को घरों में दुबके रहने के लिए मजबूर कर दिया, ऐसे कठिन वक्त में भी जैसलमेर के स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने जरूरतमंदों के जीवन को संकट में नहीं आने दिया। जिला मुख्यालय स्थित राजकीय जवाहर चिकित्सालय में स्थित ब्लड बैंक में कोरोना काल के दौरान रक्त की कमी नहीं आई और यह सामान्य दिनों की तरह ही मरीजों के हित में काम करता रहा। यह सब रक्तदान के प्रति जैसलमेर के बाशिंदों में पिछले अर्से आई जागरुकता और किसी की मदद करने के लगातार मजबूत होते जज्बे से संभव हुआ है। पिछले महीनों में जब विभिन्न तरह की पाबंदियां लागू की गई थी, तब भी कई समाजों व संगठनों ने सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए रक्तदान शिविरों का आयोजन करवाया। जिससे ब्लड बैंक में खून की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकी।
सोशल मीडिया मददगार
रक्तदान करने के प्रति जहां लोगों में जागृति आई है वहीं मोबाइल फोन और सोशल मीडिया जरूरतमंदों को खून की उपलब्धता करवाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे कम संख्या में पाए जाने वाले ग्रुप के खून की व्यवस्था भी समय रहते हो जाती है। जैसलमेर में ऐसे अनेक रक्तदाता हैं, जो मोबाइल से मिलने वाले एक कॉल पर अथवा सोशल मीडिया के एक संदेश को पढ़कर जवाहर चिकित्सालय स्थित ब्लड बैंक पहुंच जाते हैं। महिला वर्ग भी हिचक तोड़ कर परमार्थ का यह कार्य करने में आगे आ रहा है। कई लोग अपने जन्मदिन को यादगार बनाने और नियमित रूप से रक्तदान करने पहुंचते हैं तो अनेक जने व संगठन किसी विशेष अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन करते रहते हैं। जवाहर चिकित्सालय में वर्ष 1996 में ब्लड बैंक की स्थापना के बाद रक्तदान का जज्बा खूब बढ़ा है।
ब्लड बैंक में बढ़ रही उपलब्धता
वर्ष यूनिट
2004 518
2005 650
2006 850
2007 850ï
2008 875
2009 711
2010 998
2011 1050
2012 1310
2013 1077
2014 1650
2015 1779
2016 1975
2017 1815
2018 2229
2019 2600
2020 1230 (मई तक)

बढ़ रहा सिलसिला
जैसलमेर में शहरी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी अब रक्तदान करने से पीछे नहीं रहते। रक्तदान करने वाला कई बीमारियों से स्वयं भी सुरक्षित रहता है। स्वैच्छिक रक्तदान के कारण हृदयाघात की आशंका खत्म हो जाती है तथा रक्तचाप सही रहता है। पात्र लोगों को रक्तदान जरूर करना चाहिए।
- डॉ. दामोदर खत्री, प्रभारी, रक्त बैंक शाखा, जवाहर अस्पताल, जैसलमेर

मन को सुकून मिला
दिवंगत पिता की पहली पुण्यतिथि पर गत मई माह में रक्तदान शिविर का आयोजन करवाने से मेरे मन को बहुत सुकून मिला। भविष्य में भी यह कार्य करने की ललक जगी है। वास्तव में रक्तदान एक तरह का जीवनदान है।
- हरिवल्लभ कल्ला, सभापति, नगरपरिषद जैसलमेर

53 बार रक्तदान, जज्बा बरकरार
मैंने अब तक सबसे ज्यादा 53 बार रक्तदान किया है। इसके लिए राज्य व जिला स्तर तथा अनेक संस्थाओं से मुझे सम्मानित किया गया। आज भी रक्तदान करने का जज्बा बरकरार है।
- संजय खत्री, रक्तदाता

अहम सेवा कार्य
रक्तदान से बढ़कर दूसरा सेवा कार्य नहीं हो सकता। मैंने अब तक 50 बार स्वयं खून दिया है तो 600 से ज्यादा यूनिट्स की व्यवस्था करने में सहयोग दिया। यह सब करने से आत्मिक संतोष मिलता है।
- मुकेश नागौरी, रक्तदाता

स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायी
जैसलमेर ब्लड बैंक और विभिन्न शिविरों में अब तक मैंने 30 से ज्यादा बार रक्तदान किया है। इससे शरीर में किसी तरह की कमजोरी नहीं आती, बल्कि यह हमारे अपने स्वास्थ्य के लिए उत्तम है।
- संजयसिंह राहड़, रक्तदाता

जरूरतमंदों की मदद
जिस व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता होती है, उसकी मदद करना मेरा उद्देश्य बना हुआ है। मैंने स्वयं 19 बार रक्तदान किया। सभी लोगों को जीवन में एक बार रक्तदान अवश्य करना चाहिए।
- दिलीप कुमार चूरा, रक्तदाता

Deepak Vyas Bureau Incharge
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