JAISALMER NEWS- राजस्थान में इस जिले के किसान रो रहे खून के आंसू, जानिए क्या है इसका कारण?

उत्पादन को झटका...
रबी ने भी रुलाया, मिला 100 करोड़ का गम -बिजली-मौसम बने बैरी तो यूरिया का टोटा भी बना आफत

By: jitendra changani

Published: 24 Jan 2018, 10:33 AM IST

जीरे का खराबा तो सरसों व गेहूं के उत्पादन को भी झटका
जैसलमेर. सरहदी जैसलमेर जिले में नलकूप व नहर आधारित कृषि क्षेत्र के किसानों को रबी की अच्छी पैदावार से खरीफ में हुए नुकसान की भरपाई करने की उम्मीद थी, लेकिन रबी ने भी उन्हें रुला दिया है। जानकारों के अनुसार मौसम की मार से जीरे की फसल पनपने से पहले ही खराब हो गई, वहीं सामान्य से अधिक तापमान रहने से सरसों समय से पहले पकाव बिन्दु पर पहुंच गई और गेहूं की वृद्धि पर भी अंकुश लग गया। ऐसे में फसलों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने से किसानों को रबी फसल से भी बड़ा नुकसान होने की आशंका गहराने लगी है। संभावना यह भी है कि फसल के लागत मूल्य में दस फीसदी से अधिक इजाफा होगा, लेकिन गुणवत्ता कमजोर होने की स्थिति में बाजार में उम्मीदों के अनुसार दाम नहीं मिल सकेंगे।
यहां बिजली ने दिया झटका
मौसम की मार से रबी को बचाने के लिए किसानों ने उन्नत किस्म के सीड्स का उपयोग कर मौसम की विपरित परिस्थितियों में हौसला नहीं खोया, लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से फसलों की सिंचाई नहीं हो सकी। विशेषज्ञों के अनुसार आवश्यकता से अधिक तापमान रहने से इस बार फसल को अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत थी, लेकिन मांग के अनुपात में किसानों को बिजली की आपूर्ति कम हुई

दो सालों में बुवाई की स्थिति ( हेक्टेयर)
फसल बुवाई
2016-17 2017-18
गेहूं 28,240 23,140
जौ 1,310 750
चना 1,60,200 1,36,000
सरसों 1,09,740 84,750
तारामीरा 420 350
जीरा 42,710 36,500
ईसब 37,010 32,510
अन्य 1,865 1,000
हरा चारा 4,320 3,890
कुल 3,78,875 3,18,890

जानकारों की मानें तो मौसम में आए परिवर्तन व बारिश नहीं होने से गत वर्ष की तुलना में रबी की सभी फसलों का 30 फीसदी से अधिक उत्पादन गिरने की आशंका है, ऐसी स्थिति में जैसलमेर के किसानों को 100 करोड़ से अधिक का नुकसान झेलना पड़ सकेगा।

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इन क्षेत्रों में राहत भी
विशेषज्ञों के अनुसार जिले के चांधन, फतेहगढ़, राजमथाई व नाचना के अजासर व आसकन्द्रा क्षेत्र के किसानों की मेहनत रंग लाई है और यहां रबी से अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। उधर, जैसलमेर शहर के आस-पास डाबला, बडोड़ा गांव, अमर सागर, बड़ाबाग, काणोद हड्ड़ा, थईयात हमीरा सहित पूरे जिले में रबी की फसल को बचाने के लिए किसानों की ओर से अतिरिक्त राशि खर्च की जा रही है।


यूं समझे लाभ-हानि का गणित
-गत साल की तुलना में इस साल 60 हजार हेक्टयर जो क्षेत्रफल में बुवाई कम हुई है, जो 16 फीसदी कम है। इससे जिले का न्यूनतम 10, 19, 745 क्विंटल उत्पादन कम होगा।
-1 किलो की 10 रुपए कीमत भी मानी जाए तो भी यहां के किसानों को 100 करोड़ से अधिक का नुकसान सीधे तौर पर हुआ है।
-उधर, मौसम की विपरित परिस्थितियों के कारण गत साल की तुलना में इस बार फसल के लागत मुल्य में बढ़ोतरी हुई है।

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फैक्ट फाइल
- 32 लाख हेक्टयर से अधिक कृषि क्षेत्र है सरहदी जैसलमेर जिले में
- 6 लाख हेक्टयर क्षेत्र का उपयोग किया जाता है कृषि कार्य में
- 04 लाख हेक्टयर में की जाती है रबी की फसलों की बुवाई।
- 3.18 लाख हेक्टयर क्षेत्रफल में रबी की बुवाई हुई है इस वर्ष
- 16 फीसदी घटा है गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष रबी की बुवाई का दायरा

मौसम ने बिगाड़ा गणित
मौसम की परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने से इस वर्ष रबी की बुवाई में कम हुई है। तापमान भी सामान्य से अधिक रहा है। ऐसे में समय से पहले फसल पकाव बिन्दु की ओर अग्रसित हो गई है। कईं क्षेत्रों में फसल अच्छी लहलहा रही है, तो कुछ क्षेत्रों में परिणाम अपेक्षा के विपरीत है।
- आरएस सर्वा, सहायक निदेशक कृषि विस्तार, जैसलमेर

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jitendra changani Desk/Reporting
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