Jaisalmer- जैसलमेर में इस गांव के किसान सस्ती कीमतों पर बैच रहे अनाज

अच्छी बारिश के बाद बाजार में आ रही नई फसल
- अन्य फसलों के समर्थन मूल्य पर खरीदने का प्रावधान नहीं होने से किसान बेच रहे सस्ते दाम में

By: jitendra changani

Published: 10 Nov 2017, 12:38 PM IST


जैसलमेर (पोकरण). इस वर्ष मानसून की अच्छी बारिश व खेतों में हुई खरीफ की पर्याप्त उपज के चलते अनाज व तिलहन के व्यापारियों को अच्छा रोजगार मिल रहा है। दूसरी तरफ समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद केन्द्रों पर मात्र मूंग व मूंगफली की फसल ही खरीदने के कारण अन्य फसलों को बाजार में बेचना पड़ रहा है। इससे किसानों को कम दामों में भी अपनी उपज को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस वर्ष क्षेत्र के कुछ गांवों में हुई अच्छी बारिश से क्षेत्र के किसान खुशहाल है। उनके खेतों में ग्वार, बाजरी, मतीरे के बीज की अच्छी उपज हुई है। हालांकि इस वर्ष बारिश देरी से होने के कारण बाजरे की उपज पर्याप्त मात्रा में नहीं हुई है, लेकिन अन्य फसलों की अच्छी उपज हो जाने से किसानों को बहुत बड़ी राहत मिली है। किसान गत एक माह से अपनी उपज को स्थानीय बाजारों में बेचने के लिए आ रहे है। किसानों की उपज को खरीदने के लिए यहां मुख्य मार्गों पर अस्थाई दुकानें भी खुल गई है, जो किसानों की उपज को खरीदकर आगे बड़ी मण्डियों में ले जाकर बेचकर अपना कारोबार चला रहे है।

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IMAGE CREDIT: patrika

प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल की खरीद
कस्बे के जोधपुर रोड स्थित जोधनगर, जैसलमेर रोड, सदर बाजार रोड पर अनाज के ऐसे कई थोक व्यापारियों ने किसानों से ग्वार, तिल व मतीरे के बीज खरीदने के लिए अपनी दुकानें लगा दी हैं। इन दुकानों पर सुबह से शाम तक अपनी उपज बेचने वाले किसानों का तांता लगा हुआ है। इसके अलावा नलकूपों से किसान भी फसलों को स्थानीय व्यापारियों को लाकर बेच रहे हैं। व्यापारी इन फसलों को खरीद जोधपुर मण्डी ले जाकर बेच रहे हैं।
मात्र एक खरीद केन्द्र शुरू
पोकरण व भणियाणा दोनों उपखण्डों में फिलहाल मात्र एक राजमथाई में पोकरण को-ऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी के माध्यम से खरीद केन्द्र शुरू किया गया है। यहां मूंग की ही खरीद की जा रही है। अगले माह से मूंगफली की खरीद की जाएगी। नलकूपों व वर्षा आधारित खेतों में ग्वार, बाजरे, तिल व मतीरे के बीज की भी खासी पैदावार हुई है, लेकिन इनके खरीदने की कोई व्यवस्था नहीं होने से किसानों को यह फसलें सस्ते भावों में बेचनी पड़ रहा है।

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jitendra changani Desk/Reporting
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