कागजों में गुम हो गया 48 हजार असहायों का आहार!

- पशु शिविरों में बनी असमंजस की स्थिति
- प्रस्ताव भेजने के चक्कर में नहीं मिली स्वीकृति

By: Deepak Vyas

Published: 03 Jul 2021, 10:48 AM IST

पोकरण. देश में पश्चिमी राजस्थान वह इलाका है, जहां पशुपालन व खेती लोगों के मुख्य आय के स्त्रोत है। इस क्षेत्र में आए वर्ष अकाल की स्थिति उत्पन्न होती है। अकाल के दौरान सरकार की ओर से राहत कार्यों के अंतर्गत पशुओं को बचाने के लिए पशु शिविर व चारा डिपो शुरू किए जाते है, ताकि भीषण गर्मी केे मौसम में गोवंश को समय पर ठंडी छांव में चारा, दाला, पानी मिल सके, लेकिन इस वर्ष प्रस्ताव व स्वीकृति का फेर ऐसा चला कि 45 हजार से अधिक गोवंश पशु आहार से वंचित रह गए। गौरतलब है कि बारिश की कमी व पर्याप्त चारा उत्पादन नहीं होने पर सरकार की ओर से पशु शिविर खोलकर असहाय व बेसहारा पशुओं को जमा कर उनके लिए छाया, पानी, चारे, पशु आहार की व्यवस्था की जाती है। इसके साथ ही अनुदानित दरों पर चारा उपलब्ध करवाने के लिए डिपो भी शुरू किए जाते है। इस वर्ष भी जिले में 300 से अधिक पशु शिविर शुरू किए गए तथा 45 हजार से अधिक पशुओं को जमा किया गया। उनके लिए चारे, पानी आदि की व्यवस्था तो कर दी गई, लेकिन पशु आहार को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके कारण शिविरों में जमा गोवंश पशु आहार का इंतजार करते नजर आ रहे है। नियमों के अनुसार शिविर में जमा बड़े पशु को प्रतिदिन एक किलो तथा छोटे पशु को प्रतिदिन आधा किलो आहार देने का प्रावधान है।
पूर्व में ये थी व्यवस्था
पूर्व में पशु शिविरों की स्वीकृति के दौरान जिला कलक्टर की ओर से शिविर संचालक ग्राम पंचायत अथवा ग्राम सेवा सहकारी समिति को ही पशु आहार बाजार से क्रय करने, पशुओं को खिलाने व उसका बिल शिविर के बिल के साथ जोडऩे के निर्देश दिए जाते थे। पशु आहार नहीं खिलाने की स्थिति में राशि की कटौती भी की जाती थी।
इस वर्ष यह किया था प्रावधान
इस वर्ष नए नियमों के अनुसार पशु शिविर में जमा होने वाले पशुओं की संख्या तथा एक माह में उन्हें दिए जाने वाले पशु आहार की राशि का प्रस्ताव बनाकर जिला कलक्टर को प्रेषित करना था। जिला कलक्टर की ओर से जितनी राशि की आवश्यकता है, उतनी राशि के बजट की मांग की जानी थी। बजट प्राप्त होने पर राजफैड या आरसीडीएफ को पशु आहार की मांग कर अग्रिम राशि जमा करवानी थी। पशु आहार उपलब्ध होने के बाद जब शिविर संचालक की ओर से बिल जमा करवाने पर आहार की राशि की कटौती कर शेष राशि का भुगतान करना था।
नहीं मिला आहार, पशु कर रहे इंतजार
इस वर्ष पशु आहार के लिए नए नियमों के अंतर्गत शिविर संचालक को क्रय के लिए अनुमति नहीं थी। इस कारण संचालकों ने पशु आहार खरीदा नहीं और उच्च स्तर से आहार प्राप्त नहीं हुआ। इस कारण अब शिविर समाप्त होने को है, लेकिन अभी तक पशु आहार नहीं मिला है और पशु मात्र चारे व पानी से ही संतोष कर रहे है।
शिविर स्वीकृति में देरी भी एक कारण
अप्रेल माह की शुरुआत में पशु शिविर शुरू कर दिए जाते है। इस वर्ष अप्रेल माह में शिविरों की शुरुआत होने के साथ अलग-अलग पांच चरणों में जैसलमेर जिले में 331 पशु शिविर शुरू किए गए। विशेष रूप से फतेहगढ़ व भणियाणा तहसील क्षेत्र अभावग्रस्त होने के कारण यहां पशु शिविरों की संख्या अधिक है। पशु शिविर स्वीकृति की पहली सूची 26 अप्रेल को जारी हुई तथा अंतिम पांचवीं सूची दो जून को जारी हुई है। ऐसे में पशु आहार के लिए अलग-अलग बजट की मांग करना और राजफैड या आरसीडीएफ से क्रय करना मुश्किल कार्य हो गया।
समय भी बढ़ा, आहार नहीं मिला
पशु शिविरों के संचालन की अवधि 30 जून तक रहती है, लेकिन बारिश नहीं होने की स्थिति में समयावधि बढ़ाई भी जाती है। इस वर्ष मानसून ने प्रदेश में दस्तक दे दी है, लेकिन पश्चिमी राजस्थान में अभी तक बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में पशु शिविरों की अवधि 15 दिन तक बढ़ाई गई है। दूसरी तरफ अभी तक पशु आहार के लिए स्वीकृति नहीं मिल पाई है। जिसके कारण गोवंश आहार से वंचित नजर आ रहे है।
फैक्ट फाइल:-
- 5 अलग-अलग स्वीकृतियां हुई जारी
- 331 पशु शिविर हो रहे है संचालित
- 45875 है पशुओं की संख्या
- 4710 छोटे व 41165 बड़े पशु इस बार हुए आहार से वंचित
शेड्यूल में नहीं है
हर बार पशु आहार की स्वीकृति देते है, लेकिन शिविर संचालक आहार नहीं खिलाते। इसलिए बिलों से राशि कटौती कर भुगतान किया जाता है। इस बार शेड्यूल में ही पशु आहार का उल्लेख नहीं है।
- दुदाराम, उपखंड अधिकारी, भणियाणा।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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