JAISALMER NEWS- घर का है इनके बंगला, फिर भी रखते है प्रधानमंत्री आवास का लाभ

- योजना का लाभ उठाने कई धनाढ्य लाइन में

By: jitendra changani

Published: 07 Mar 2018, 11:09 PM IST

बंगला है, लेकिन प्रधानमंत्री आवास तो चाहिए
जैसलमेर. मोहनगढ़ क्षेत्र के कई धनाढ्य लोग भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए लालायित हैं। वे अपना आय प्रमाण पत्र तथा अन्य दस्तावेज तैयार करवा इसका लाभ उठाना चाहते हैं। कई ऐसे लोग उपनिवेशन तहसील में पटवारी रिपोर्ट के लिए चक्कर लगा रहे हैं। वहीं ई-मित्र केंद्रों पर भी आवेदन करने वालों की लंबी कतारें दिख रही हैं।
इनके चक्कर में वो परेशान
योजना के तहत आर्थिक कमजोर लोगों को आवेदन करना है, लेकिन कई धनाढ्य भी लाइन में लग गए हैं। ऐसे में जरूरतमंदों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे मजे की बात सरकारी कर्मचारी भी इसमें पीछे नहीं हैं। आवेदकों को आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। यहां चिकित्सकों, व्याख्याताओं के अलावा अन्य राजपत्रित अधिकारियों के यहां आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भीड़ रहती है।

 

 

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अन्न पनपता नहीं, सरकारी सहायता में रोड़ा- कहीं भूमि बंजर तो कहीं बारिश के अभाव में नहीं होती फसल
जिले के कई गांवों में ऐसे किसान हैं जिनकी जमीन में अन्न तो नहीं पनपता, लेकिन यह जमीन सरकारी सहायता में रोड़ा बन गई है। कहीं बंजर भूमि तो कहीं बारिश के अभाव में खेतों में फसल नहीं होती। वहीं कई सरकारी योजनाओं में ज्यादा जमीन होने की स्थिति में लाभ नहीं मिल पाता।
उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में कई लोग कई बीघा जमीन के मालिक तो है, लेकिन उस जमीन से उनको आमदनी बिल्कुल नहीं है। उल्टा बारिश के अभाव में नुकसान हो जाता है और यह साल दर साल होता जा रहा है। इस और सरकार की ओर से आने वाली गरीबों के कल्याण के अनेक योजनाओं में भूमिधारक को लाभ नहीं दिया जाता है। क्षेत्र में खेती मानसून की बारिश पर निर्भर है और सिंचाई के साधनों का अभाव है। ऐसे में यहां की जमीन से उत्पादन न के बराबर ही होता है। ऐसे में जमीनों के मालिक होने के बावजूद इनसे कोई फायदा नहीं हो रहा है तो किसी भी योजना के फायदे में भी रोडा़ अटक जाता है। सरकार की ओर से गरीबों के लिए आवास योजना, खाद्य सुरक्षा योजना ऋण माफी योजना सहित कई तरह की योजनाओं आती है। जिसमें जमीन के मालिक होने पर पात्र नहीं माना जाता है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद भी जमीन के बजंर टुकड़े सरकारी योजनाओं के लाभ की राह में रोड़ा बने हुए है।

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jitendra changani Desk/Reporting
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