वक्त के साथ बदला डाक विभाग का काम

वक्त के साथ बदला डाक विभाग का काम
The job of the postal department changed with time

Deepak Vyas | Updated: 09 Oct 2019, 05:35:06 PM (IST) Jaisalmer, Jaisalmer, Rajasthan, India


-भारतीय डाक सेवा के माध्यम से ही आज भी भेजे जा रहे अहम दस्तावेज

-क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटियों के फर्जीवाड़े के मामलों के बाद बढ़ा रूझान

 

जैसलमेर. बदलते वक्त में संचार के बेशुमार साधनों के कारण डाक सेवा का पारम्परिक महत्व भले ही सिमट गया हो, लेकिन कई नए कार्य डाकघरों के माध्यम से होने की वजह से वह नए अर्थों में पहचान बनाए हुए हैं। जहां तक विश्वसनीयता का सवाल है, आज भी भारतीय डाक सेवा के माध्यम से ही अहम दस्तावेज और पार्सल भेजे जाते हैं। इसके अलावा सरकारी कामकाज का महत्वपूर्ण अंग होने की वजह से डाकघरों का कार्य पहले की भांति चल रहा है। हालांकि अब वे दिन बीत गए जब कुछ दशक पहले गली-मोहल्ले में आने वाला डाकिया सबकी उम्मीदों की किरण हुआ करता था, अपनों से संवाद का वही एकमात्र जरिया जो था।
आधार, बैंकिंग और क्या-क्या
विश्व डाक दिवस के अवसर पर पत्रिका टीम ने जैसलमेर के मुख्य डाकघर का जायजा लिया तो पाया कि सरकारी कामकाज में अनिवार्य बनाए जा चुके आधार कार्ड बनाने से लेकर उनमें संशोधन करवाने का कार्य करवाया जा रहा है। इसके अलावा रजिस्टर्ड और स्पीड पोस्ट से डाक भेजने वालों की भी कमी नजर नहीं आई। उपस्थित लोगों से पूछने पर उन्होंने बताया कि, जरूरी कागजात भेजने का सबसे सुरक्षित रास्ता सरकारी डाक सेवा ही है। मौजूदा केंद्र सरकार ने पोस्ट बैंकिंग सेवा की भी शुरुआत कर दी है। सरकार ने गांव-गांव में डाकघरों की शृंखला और डाककर्मियों की अपने इलाके में प्रतिष्ठा के मद्देनजर उन्हें बैंकिंग कार्य की जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। छोटी जमाओं के साथ एमआइएस, किसान, विकास, सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करने के प्रति भी लोगों का अच्छा रुझान है। पिछले अर्से के दौरान क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटियों के फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद लोग निवेश और बचत के लिए डाकघरों के माध्यम से चलने वाली योजनाओं को अपना रहे हैं। पिछले अर्से सरकार ने डाकघरों से गंगाजल तथा पुस्तकों को बेचने तक के कार्य करवाए।
व्यावसायिक पोस्ट्स में बढ़ोतरी
आमजन अपने रिश्तेदारों-मित्रों को भले ही अब नहीं के बराबर चि_ी-पत्री लिखते हों, लेकिन सरकारी और निजी क्षेत्र की व्यावसायिक पोस्टें बड़ी तादाद में अब भी भारतीय डाक सेवा ही संबंधित लोगों तक पहुंचातें हैं। यही वजह है कि डाकियों का महत्व अब भी अपनी जगह कायम है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की कूरियर कंपनियां अब तक नहीं पहुंच पाई हैं। विशेषकर जैसलमेर जैसे दुर्गम ग्रामीण इलाकों में सरकारी डाक सेवा ही पत्रों व पार्सलों की आवाजाही का एकमात्र साधन बनी हुई हैं। जैसलमेर भ्रमण पर आने वाले विदेशी सैलानी यहां पर जो खरीदारी करते हैं अथवा ऑर्डर देकर जो सामान मंगवाते हैं, वह भारतीय डाक सेवा के माध्यम से ही उनके देशों तक पहुंचाया जाता है। मुख्य डाकघर में उनके पार्सल लेने का कार्य किया जाता है। समाचार पत्र-पत्रिकाएं आज भी बड़ी तादाद में डाकिये लेकर आते हैं।
हकीकत यह भी
- डाकघरों पर नए-नए कार्यों का दायित्व सौंपे जा रहे हैं, वहीं स्टाफ की कमी को दूर करने की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा।
-जानकारी के अनुसार जैसलमेर में 35 से 40 फीसदी कम स्टाफ काम कर रहा है।
-डाकघरों में नियुक्तियां अब एसएससी के माध्यम से ही होती हैं, जिससे नया स्टाफ देरी से मिलता है।
-जैसलमेर जैसे दूरदराज के क्षेत्र में आकर काम करने के अधिकांश कार्मिक इच्छुक नहीं रहते।
-ऐसे ही तकनीकी गड़बडिय़ों को भी यहां के स्तर पर सुधारा नहीं जाता, जिससे लोगों को बेजा परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।

काम तो पहले से बढ़ा है
संचार के कई साधन हो जाने के बावजूद डाकघरों का काम कम नहीं हुआ है, बल्कि नई जिम्मेदारियां आने से बढ़ गया है। स्टाफ की कमी के कारण कार्यरत कार्मिकों पर दबाव और तनाव भी पहले से ज्यादा है। फिर भी अपनी ओर से हम बेहतर सेवाएं देने का पूरा प्रयास करते हैं।
- रमेशचंद्र सोटवाल, पोस्टमास्टर, मुख्य डाकघर, जैसलमेर

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