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जैसलमेर

रात में राह: 100 किलोमीटर तक अंधेरा, 2 घंटे खतरे का सफर और हादसे ताक रहे रास्ते

यहां दिन में कांच की तरह सरपट सडक़ें सफर में सुगमता व सुकून का अहसास कराते हैं, वहीं रात को हर क्षण भय व आशंका में राह कटती है। जैसलमेर व पोकरण को जोडऩे वाली करीब 110 किलोमीटर सडक़ पर रात में सफर के दौरान यह स्थिति रहती है।

जैसलमेरJun 17, 2024 / 08:39 pm

Deepak Vyas

jsm
यहां दिन में कांच की तरह सरपट सडक़ें सफर में सुगमता व सुकून का अहसास कराते हैं, वहीं रात को हर क्षण भय व आशंका में राह कटती है। जैसलमेर व पोकरण को जोडऩे वाली करीब 110 किलोमीटर सडक़ पर रात में सफर के दौरान यह स्थिति रहती है। एकाएक सडक़ों पर वाहनों की राह रोकने वाला ऊंटों का झुंड हो या एकाएक दौडक़र वाहनों का संतुलन बिगाडऩे वाले मवेशी, मृग व नील गायें। पोकरण से जैसलमेर की ओर बढऩे वाले मार्ग में चाचा, खेतोलाई, लाठी व चांधन गांव आते है। ये सभी गांव पशु बाहुल्य क्षेत्र है। खास तौर पर चाचा से खेतोलाई व धोलिया के गंगाराम की ढाणी के बीच ऊंटों की तादाद अधिक में है। पोकरण से जैसलमेर सडक़ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 11 है। जोधपुर व बीकानेर के रास्ते आने वाले लोग इसी मार्ग से गुजरते है। जिससे यहां दिन रात वाहनों की रेलमपेल रहती है ओर सर्वाधिक व्यस्ततम मार्गों में से एक है। गौरतलब है कि उक्त मार्ग पर दुर्भाग्यवश कई हादसे सामने आ चुके हैं। बड़े धोखे हैं इस राह मेंं यहां केवल धोलिया, लाठी व चांधन गांवों के आबादी से गुजरने वाली सडक़ पर डिवाइडर बने हुए है ओर रोड लाइट की व्यवस्था है। इनके अलावा कही डिवाइडर नहीं है। रात में रोशनी की व्यवस्था नही होने से हादसे का भय रहता है। आसपास गांवों के पशु बीच सडक़ आ जाते है। सडक़ पार करते समय या सडक़ के बीच बैठे रहने के दौरान वाहनों के भीड़ जाने से हादसा हो जाता है। कुछ जगहों पर संकेतक बोर्ड लगे हुए है और चाचा, धोलिया, लाठी व चांधन में गति अवरोधक भी है। आबादी क्षेत्र के अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग होने से कहीं गति अवरोधक नही है। हाइवे के कारण वाहन चालक तेज गति से निकलते है। जिसके कारण अंधेरे में पशु दिखाई नही दे पाते और पशुओ से टकरा जाने से हादसे हो जाते है।

एक्सपर्ट व्यू: संकेतक बोर्ड, तारबंदी व जागरुकता अभियान जरुरी

अधिवक्ता अरविन्द गोपा बताते हैं कि सडक़ किनारे ज्यादा से ज्यादा बड़े संकेतक बोर्ड लगाकर से वाहन चालकों की गति को रोका जा सकता है। सडक़ के दोनों तरफ तारबंदी कर पौधे लगाना बेहतर उपाय है। ऐसे में पशुओं की स्वच्छंदता रुकेगी। कुछ जगह टूट चुकी तारबंदी को दुरुस्त किए जाने से पशु सडक़ पर नही आएंगे। पुलिस की ओर से अभियान चलाकर पशुपालकों को रात के समय पशुओ को खुले में नही छोडऩे के लिए पाबंद किए जाने की जरूरत है। मार्ग में निर्धारित दूरी तय कर विद्युत पोल व रोड लाइट लगाए जाने से भी दुर्घटनाओं की आशंका को रोका जा सकेगा।

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