scriptThe pain of settling on the border, the concern of loved ones is immen | सरहद पर बसने का दर्द, अपनों की चिंता बेहद | Patrika News

सरहद पर बसने का दर्द, अपनों की चिंता बेहद

-आजादी की 75 वें वर्ष बाद भी जिम्मेदारों की नहीं टूटी तंद्रा
-वायदों की अधूरी कहानी बयां कर रही विकास की 'राहÓ

जैसलमेर

Published: September 09, 2022 10:10:29 pm

जैसलमेर. यह बात अचंभित करने वाली हो सकती है कि आजादी के 75 वर्ष होने के बाद भी किसी गांव के बाशिंदों के लिए सूचना भेजने का माध्यम केवल बस हो, लेकिन यह बात एकदम सही है। सरहद पर बसे कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां से जब कोई बस गांव से गुजरती है तो मौसम से लेकर परिवार के कुशल क्षेम की जानकारी उसे गांव के जा हरे किसी व्यक्ति के माध्यम से या फिर चि_ी-संदेश से भेजी जाती है। इन सरहदी गांवों में देश भक्ति का ज्वार उफान पर रहता है। पाक से घुसपैठ के इरादों को इन गांवों के बाशिंदे जागरुकता के बूते कभी सफल नहीं होने देतें, लेकिन उन्हें इस बात की पीड़ा भी है कि न तो उनके पास बेहतर चिकित्सा और न ही शिक्षा की सुविधा उपलब्ध है। फाइव जी की ओर बढ़ते देश के सबसे बड़े जिले की फेहरिस्त की शामिल सरहदी जिले में एक गांव से दूसरे गांव में रहने वाले परिचित की कुशल क्षेम नहीं पूछ सकते।
दूर होने से 'दर्शन ' नहीं
ग्रामीण लालूसिंह व गंगासिंह बताते हैं कि म्याजलार, करड़ा, पोछीना, गुंजनगढ़, लूणार, बींजराज का तला, सत्तो, केरला, मिठड़ाऊ, केसरसिंह का तला, दव, हटार, दबड़ी, मसूरिया, फलेड़ी, बीदा, नीम्बा, बैरसियाला, धाणेली, छतांगढ़, विश्रोईयाला, रावतरी, फूलिया आदि सरहदी गांव की दूरी जिला मुख्यालय से 100 से अधिक किलोमीटर है और यहां पहुंचना भी मार्ग व यातायात के लिहाज से आसान नहीं है।
पशुपालन पर टिकी अर्थव्यवस्था
-सोढ़ाण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पशुपालन व्यवसाय पर टिकी है।
-यहां रहने वाले अधिकांश ग्र्रामीणों को कृषि भूमि का हक ही नहीं मिल पाया है।
-धाणेली और रावतरी गांव आजादी के 73 वर्षों बाद भी अब तक सड़क सुविधा से वंचित है।
-बाखासर से लेकर तनोट तक भारतमाला सड़क परियोजना का काम चल रहा है, लेकिन डीएनपी की आपत्ति सुंदरा से म्याजलार तक करीब 40 किलोमीटर सड़क का काम अटका हुआ है।
-सरहदी गांवों में रहने वाले लोगों को क्षतिग्रस्त व बदहाल मार्गों के कारण गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज को वाहन में ले जाना खतरे से खाली नहीं है।

सरहद पर बसने का दर्द, अपनों की चिंता बेहद
सरहद पर बसने का दर्द, अपनों की चिंता बेहद

सबसे लोकप्रिय

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

Weather Update: राजस्थान में बारिश को लेकर मौसम विभाग का आया लेटेस्ट अपडेट, पढ़ें खबरTata Blackbird मचाएगी बाजार में धूम! एडवांस फीचर्स के चलते Creta को मिलेगी बड़ी टक्करजयपुर के करीब गांव में सात दिन से सो भी नहीं पा रहे ग्रामीण, रात भर जागकर दे रहे पहरासातवीं के छात्रों ने चिट्ठी में लिखा अपना दुःख, प्रिंसिपल से कहा लड़कियां class में करती हैं ऐसी हरकतेंनए रंग में पेश हुई Maruti की ये 28Km माइलेज़ देने वाली SUV, अगले महीने भारत में होगी लॉन्चGanesh Chaturthi 2022: गणेश चतुर्थी पर गणपति जी की मूर्ति स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त यहां देखेंJaipur में सनकी आशिक ने कर दी बड़ी वारदात, लड़की थाने पहुंची और सुनाई हैरान करने वाली कहानीOptical Illusion: उल्लुओं के बीच में छुपी है एक बिल्ली, आपकी नजर है तेज तो 20 सेकंड में ढूंढकर दिखाये

बड़ी खबरें

गाय को टक्कर मारने से फिर टूटी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की बॉडी, दो दिन में दूसरी ऐसी घटनाभैंस की टक्कर से डैमेज हुई वंदे भारत ट्रेन, मजबूती पर सवाल उठे तो सामने आया रेलवे मंत्री का जवाबगाज़ियाबाद में दिन-दहाड़े डकैती, कारोबारी की पत्नी-बेटी को बंधक बनाकर 17 लाख के ज़ेवर और 7 लाख रुपए नकद लूटेउत्तरकाशी हिमस्खलन में बरामद किए गए 7 और शव, मृतकों की संख्या बढ़कर 26 हुई, 3 की तलाश जारीNobel Prize 2022: ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट एलेस बियालियात्स्की समेत रूस और यूक्रेन की दो संस्थाओं को मिला नोबेल पीस प्राइजयुद्ध का अखाड़ा बनी ट्रेन! सीट को लेकर भिड़ गईं महिलाएं, जमकर चले लात-घूसे, देखें वीडियोलद्दाख में लैंडस्लाइड की चपेट में आए 3 सैन्य वाहन, 6 जवानों की मौतउत्तर से दक्षिण भारत तक बारिश का अलर्ट, कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में बारिश जारी
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.