Jaisalmer- जनता ने केन्द्र से जोड़ दी शहर की कड़ी, फिर भी यहां सब कुछ है अधूरा

By: jitendra changani

Updated: 27 Nov 2017, 08:24 PM IST

Jaisalmer, Rajasthan, India

Rajasthan patrika

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साफ-सफाई के मोर्चे पर पिछाड़ी जैसलमेर शहर में नगरपरिषद ने कुछ वार्डों में नियमित कर्मचारी तो कुछ में ठेका पद्धति से साफ-सफाई की व्यवस्था कर रखी है। वास्तविकता यह है कि, शहर के अधिकांश गली-मोहल्लों में नियमित सफाई व्यवस्था का अभाव है। जगह-जगह कूड़े-करकट के ढेर नजर आ जाते हैं। हनुमान चौराहा, गीता आश्रम मार्ग, कलेक्ट्रेट, कचहरी मार्ग, गांधी चौक, गुलासतला, गड़ीसर प्रोल जैसे मुख्य स्थलों पर भी सीवरेज प्रणाली की विफलता के चलते आए दिन गंदला पानी सडक़ों पर दरिया के रूप में बहता दिखाई देता है। प्रभावी मोनेटरिंग के अभाव से यह स्थितियां बनी हैं। पार्षद भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। सडक़ों पर स्वच्छंद विचरण करने वाले पशुओं की समस्या इतनी विकट है कि, पिछले चार दिनों में तीन सैलानी व एक स्थानीय महिला घायल हो चुकी हैं।

जैसलमेर . ‘शहर की सरकार’ यानी जैसलमेर नगरपरिषद कार्यकाल के तीन वर्ष सोमवार को पूरे हो रहे हैं। राज्य में भाजपा सरकार होने पर शहरी मतदाताओं ने भी ‘विकास की कड़ी’ जोड़ भाजपा का ही बोर्ड चुना। उम्मीद थी, राज्य व शहर में एक ही दल की सरकार होने से देश और दुनिया भर के सैलानियों को आकर्षित करने वाली स्वर्णनगरी में नागरिक सुविधाओं की स्थितियां बेहतर होंगी, लेकिन अब तक के कार्यकाल में लोगों को निराशा ही हाथ लगी है।
गैरराजनीतिक सभापति कविता खत्री की अगुवाई वाले इस बोर्ड ने जैसलमेर की स्वच्छता व सुंदरता में नए प्रतिमान जोडऩा तो दूर नगरपरिषद के सामान्य कामकाज की रफ्तार को भी धीमा कर दिया।

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