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जैसलमेर

बरसाती सीजन सिर पर, खतरा-ए-जान बने कई जर्जर मकान

अगले महीने मानसूनी बारिश की उम्मीदों के बीच एक बार फिर स्वर्णनगरी जैसलमेर में पुराने जर्जर मकानों की समस्या सिर उठाए सामने खड़ी है।

जैसलमेरJun 20, 2024 / 08:12 pm

Deepak Vyas

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अगले महीने मानसूनी बारिश की उम्मीदों के बीच एक बार फिर स्वर्णनगरी जैसलमेर में पुराने जर्जर मकानों की समस्या सिर उठाए सामने खड़ी है। हर साल बरसात के दिनों में प्रशासन और नगरपरिषद के जिम्मेदार इस समस्या को लेकर हाथ-पांव हिलाते नजर आते हैं लेकिन जैसे ही बारिश का समय व्यतीत होता है, सब कुछ पुराने ढर्रे पर चलने लगता है। यही कारण है कि विगत कई वर्षों से कुछ बेहद जर्जर मकानों की समस्या बनी हुई है। विशेषकर ऐतिहासिक सोनार दुर्ग में ऐसे कई मकान हैं, जो तेज बरसात के प्रहार से कभी भी धराशायी हो सकते हैं। पूर्व के बरसाती सीजनों के दौरान इनमें से कभी किसी की छत तो कभी किसी की दीवार भरभरा कर गिरी भी है। सौभाग्यवश कोई जनहानि इन हादसों से नहीं हुई लेकिन हर बार वहां आसपास रहने वाले लोगों पर भाग्य इतना ही मेहरबान रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं ले सकता। बीते कुछ सालों के दौरान शहर के कुछेक मकानों को अवश्य सुरक्षित उतारने व उनका पुनर्निर्माण करवाया गया है। जो जर्जर मकान खतरा-ए-जान बने हुए हैं, उनमें से कइयों के एक से अधिक मालिकान हैं और वे जैसलमेर में वर्तमान में रह नहीं रहे हैं। हर वर्ष ऐसे मकानों को सुरक्षित उतरवाने के लिए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जाते हैं और चेतावनी भी दी जाती है, लेकिन इससे आगे कार्रवाई नहीं करने के कारण हर बरसाती सीजन में इन जर्जर मकानों के कारण हादसा होने का अंदेशा बरकरार रहता है।

पड़ोसियों के माथे पर चिंता की लकीरें

जर्जर मकानों के आसपास रहने वाले लोगों को हर समय अपनी सुरक्षा की चिंता सताती है। बारिश के मौसम में ये लगभग जीर्ण-शीर्ण हो चुके बंद मकान कभी भी भरभराकर गिर कर आसपास रहने वाले लोगों व राहगीरों के लिए आफत का कारण बन सकते हैं। जैसलमेर नगरपरिषद बीते कई वर्षों से ऐसे मकानों को सुरक्षित उतारने के लिए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जाते रहे हैं। इससे आगे परिषद कोई कार्रवाई नहीं कर रही, जिससे जर्जर मकानों का खतरा बरकरार है। बारिश के दौरान हर बार जर्जर मकानों से आसपास के लोगों को खतरे का मुद्दा उठता रहा है। नगरपरिषद और जिला प्रशासन तक लोग गुहार लगाते हैं। नगरपरिषद बीते करीब एक दशक से प्रत्येक बरसाती सीजन में नोटिस जारी करने की कवायद करती रही है। इस अवधि में कई मकान धराशायी भी हो गए। अनेक मकानों के मालिकों ने बाद में अपनी सुविधानुसार मकान उतरवा लिए मगर अब भी कई मकान खतरे का सबब बने हुए हैं। जानकारी के अनुसार अकेले सोनार दुर्ग में ही ढूंढ़ा पाड़ा में सबसे ज्यादा उसके बाद व्यासा पाड़ा, कुंड पाड़ा, लधा पाड़ा, कोटड़ी पाड़ा, चौगान पाड़ा में भी इक्का-दुक्का घर बारिश के दौर में खतरनाक साबित हो सकते हैं।

पूर्व में हुए हैं हादसे

  • सोनार दुर्ग के साथ शहर के अन्य हिस्सों में भी पिछले वर्षों में बारिश के दौरान जर्जर मकानों के भरभरा कर गिरने की कई घटनाएं घटित हुई हैं।
  • ऐसी घटनाओं के तुरंत बाद प्रशासन व नगरपरिषद का अमला हरकत में आता है और आनन-फानन में नोटिस जारी करने जैसी कार्रवाई की जाती है।
  • गत कुछ वर्षों के दौरान जैसलमेर में मानसून और उसके बाद भी अच्छी बारिशें हो रही हैं। इस प्राकृतिक वरदान स्वरूप आसमानी पानी से जर्जर मकानों की समस्या और विकराल हो जाती है।

प्रभावी कार्रवाई करेंगे

जैसलमेर के ऐतिहासिक सोनार दुर्ग में कुछ मकान खतरनाक अवस्था में हैं। आज ही मैंने सोनार दुर्ग का भ्रमण कर स्थितियों का जायजा लिया है। संबंधित मालिकों को नोटिस दिए जाएंगे। किले में अखे प्रोल के भीतर, मोरी के हिस्सों को दुरुस्त करवाने व पानी की टंकी उतारने आदि के कार्य नगरपरिषद करवा रही है।
  • लजपालसिंह सोढ़ा, आयुक्त, नगरपरिषद जैसलमेर

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