सरहद पर उमड़ा मानवीय संवेदनाओं का समन्दर

-कोविड प्रबन्धन और प्रभावितों के लिए उठे सैकड़ों हाथ
-अभावों और अवसाद भरे परिवेश में गूंजा राहत भरे सुकून का संगीत

By: Deepak Vyas

Published: 03 Jul 2021, 10:55 AM IST

जैसलमेर. वैश्विक महामारी कोविड.19 से उपजे विषम हालातों के बीच राजस्थान की मीलों तक पसरी रेतीली सरहद पर स्थित जैसलमेर में खिले मानवीय संवेदनाओं के फूलों ने कोविड से निपटने और मुश्किल परिस्थितियों में अभावों और अवसादों भरे परिवेश में जी रहे लोक जीवन को खासा सम्बल प्रदान करते हुए सेवा और समर्पण की अनूठी मिसाल पेश की है। कोरोना की वजह से चौतरफा मुश्किल दौर से घिरे जनजीवन की परेशानियों को दूर करने के लिए जन प्रतिनिधियों, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों और जिला प्रशासन के साथ ही जिले के हर वर्ग और क्षेत्र में समाज-जीवन से सम्बद्ध भामाशाहों, कंपनियों, विभिन्न समाजों, संगठनों, संस्थाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं आदि की सहभागिता की बदौलत जनजीवन ने विषम हालातों पर काबू पाने में सफलता प्राप्त की। इसी का परिणाम है कि कोरोना से निपटने के लिए जिले में हर तरफ चरम आत्मविश्वास लहराते रहने के साथ ही कोविड प्रबन्धन से जुड़ी तमाम गतिविधियों पर पक्का और पूरा भरोसा निरन्तर प्रगाढ़ होता जा रहा है।
बेहतर प्रबंधन कौशल का दिग्दर्शन
कोविड प्रबन्धन की सुदृढ़ता, हर स्तर पर युद्धस्तरीय प्रयासों और सभी संबंधितों की दिन.रात की मेहनत एवं समर्पित कर्मयोग का ही परिणाम है कि सीमावर्ती जैसलमेर जिले में कोरोना के संक्रमण पर काबू पाए जाने के साथ ही संक्रमितों के ईलाज की दिशा में सकारात्मक उपलब्धियां सामने आ पाई हैं। कोविड संक्रमण पर नियंत्रण की दृष्टि से व्यापक लोक जागरण से लेकर संक्रमितों की सेहत सुरक्षा तक का तमाम सफर बेहतर ढंग से निभता रहा और आज इसी वजह से संक्रमण दर न्यूनतम स्तर पर आ पहुंची है तथा लोक जीवन पर लगी कई पाबंदियों को सशर्त हटाने की स्थिति सामने आई है।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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