दूसरी लहर से लड़ाई में काम आ रही वैक्सीन की ताकत

-निश्चिंत होकर काम में जुटे हैं हैल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स
-हजारों बड़े-बुजुर्गों को भी लग चुकी दोनों डोज

By: Deepak Vyas

Updated: 02 May 2021, 08:43 PM IST

जैसलमेर. कोरोना महामारी की दूसरी लहर पहली की तुलना में कहीं अधिक संक्रामक और घातक रूप में सामने है। सीमावर्ती जैसलमेर जैसे दूरस्थ जिले में इस लहर ने तमाम रिकॉर्ड धराशायी करते हुए भय का मंजर बना दिया है। ऐसे माहौल में अस्पतालों में काम करने वाले हमारे हैल्थ वर्कर्स और अन्य तरीकों से लोगों को कोरोना से बचाव कार्य में जुटे अग्रिम मोर्चों पर तैनात कार्मिकों का अथक रूप से किया जा रहा परिश्रम और साहस ही सबसे बड़ा सहारा है। इन हजारों लोगों की सबसे बड़ी हिम्मत के रूप में कोरोना से बचाव वाली स्वदेशी वैक्सीन उभरकर सामने आई है। चिकित्सा और अन्य महकमों के इन अग्रदूतों को पिछले महीनों के दौरान सबसे पहले कोरोना से बचाव का मंगल टीका लगाया गया। आज उसी टीके की बदौलत वे लोग दूसरों के उपचार से लेकर उनके बचाव तक में बेखौफ होकर काम कर रहे हैं।
स्वयं में जगा सुरक्षा का भाव
केंद्र सरकार ने इस साल की शुरुआत में 16 जनवरी से सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मियों का टीकाकरण शुरू किया। इसके तहत जैसलमेर जिले में भी तमाम सरकारी व निजी चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ आशा सहयोगिनीयों, तकनीशियनों के साथ चिकित्सा केंद्रों पर काम करने वाले कार्मिकों का टीकाकरण किया गया। ऐसे लगभग 4300 स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीन की पहली और 3100 को दोनों डोज लगाई जा चुकी है। ऐसे ही अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले तमाम अधिकारियों व कार्मिकों को जिनमें प्रशासन, पुलिस, राजस्व से लेकर पंचायतीराज आदि महकमों के अधिकारियों.कार्मिकों से लेकर सफाईकर्मी आदि आते हैं का दूसरे चरण में 2 फरवरी से टीकाकरण करवाया गया। इस श्रेणी के 16 हजार कार्मिकों को पहली और 12 हजार को दोनों डोज लग चुकी है। सभी विशेषज्ञ और अध्ययन यह बताते हैं कि वैक्सीन लगने के बाद ये सभी लोग स्वयं कोरोना से पूर्णतया सुरक्षित हैं। यही कारण है कि अस्पतालों में चिकित्सकों से लेकर अन्य सभी संबंधित जन पूरे हौसले के साथ दौड़ धूप कर कोरोना से मुकाबले में जुटे हैं। फिजिशियन डॉ. रोहिताश गुर्जर और अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. लोकपालसिंह भाटी, नर्सिंगकर्मी अमित कुमार आदि टीका लग जाने की वजह से खतरे से मुक्त होकर उपचार कार्य में जुटे दिखाई देते हैं।
खुलकर कर रहे काम
जिला मुख्यालय स्थित जवाहर चिकित्सालय में पत्रिका टीम ने देखा कि अधिकांश चिकित्साकर्मी बिना पीपीई किट पहने कोविड रोगियों का उपचार करने में खुद को सक्षम पा रहे हैं। ऐसे ही तमाम प्रशासनिक और अन्य विभागीय अधिकारीए जिन्हें अस्पताल में विविध व्यवस्थाओं का प्रभार दिया गया हैए वे दिनभर अस्पताल के चक्कर लगाकर कर्तव्य को अंजाम दे रहे हैं। उन्हें मास्क लगाकर और सामान्य गाइडलाइन की पालना से ही काम करने का हौसला मिला हुआ है। सभी लोग ज्यादा खुलकर काम कर पा रहे हैं। यह हिम्मत उन्हें वैक्सीनेशन से ही मिली है।

कारगर है वैक्सीन
सभी अध्ययनों से यह बात साबित है कि कोरोना से लड़ाई में वैक्सीन सबसे कारगर है। पहली डोज लगने के 10 दिनों बाद ही यह शरीर में इम्युनिटी बनाने लगती है। जिन लोगों के दोनों डोज लग चुकी है, वे कोरोना से संक्रमित भले ही हो जाएं लेकिन इससे उनका बिगाड़ नहीं हो सकता।
-डॉ. कुणाल साहू, जिला प्रभारी टीकाकरणए जैसलमेर

Deepak Vyas Bureau Incharge
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