लालच में रचते हैं भ्रमजाल, कर रहे ऐतिहासिक नगर को बदनाम

- क्षुद्र फायदे के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार लपके
- व्यापार को पहुंच रहा नुकसान

By: Deepak Vyas

Updated: 07 Sep 2021, 08:24 PM IST


जैसलमेर। पीत पाषाणों से पूरी तरह निर्मित जैसलमेर की छवि स्वर्णनगरी की है। विदेशी पर्यटकों ने सालों पहले इसे गोल्डनसिटी नाम दिया। शहर की छवि बेहद उ दा रही है और यहां के बाशिंदों का सद्व्यवहार ने इसमें चार चांद लगाए हैं। लेकिन यह सब अब बीते जमाने की बातें होने लगी हैं। जिले में सक्रिय लपके सैलानियों के साथ दुव्र्यवहार करने के साथ इससे भी गंभीर अपराध कर रहे हैं और वह है शहर की छवि तथा साख पर बट्टा लगाने का। वे अपने क्षुद्र फायदे के लिए सैलानियों के सामने बेसिर-पैर की कहानियां गढ़ते हैं तथा विश्व धरोहर में शुमार सोनार दुर्ग से लेकर पूरे शहर को ही कई बार बदनाम करने से संकोच नहीं करते।
देते हैं भ्रामक जानकारियां
सैलानी जैसे ही जैसलमेर में प्रवेश करता है, उस पर झपट पडऩे वाले होटलों व रिसोर्ट्स के लपकों के साथ शहर में सक्रिय इस तरह तत्व उनके सामने अनाप-शनाप ढंग से अपनी बात रखते हुए भ्रम का वातावरण बना देते हैं। मसलन अगर कोई सैलानी सोनार दुर्ग स्थित होटल में ठहरने के लिए बुकिंग करवाकर आया है अथवा वहां रुकने का उसका मन होता है तो लपके यह कहने से नहीं चूकते कि किला पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। वहां पर्यटकों के ठहरने पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। वहां ठहरना जान को जोखिम में डालने जैसा है, वगैरह-वगैरह। ऐसे ही पटवा हवेलियों, गड़ीसर सरोवर, कुलधरा आदि के बारे में कपोल कल्पित बातें बताने वालों की कमी नहीं है।
कोरोना के नाम पर ठगी
पिछले दो साल से वैश्विक महामारी कोरोना की आड़ लेकर भी लपके चांदी काटने से नहीं चूकते। वे यह कहते आ रहे हैं कि जैसलमेर में कोरोना बहुत बढ़ा हुआ है। ऐसे में शहर में ठहरना पर्यटकों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल यह सब किस्से गढऩे वाले सम स्थित रिसोर्टï्स के लिए काम करने वाले होते हैं। भ्रमपूर्ण जानकारियों के कारण जैसलमेर की बेजा बदनामी की जा रही है। यह समस्या बीते कुछ वर्षों के दौरान बढ़ती जा रही है। उनकी कपटपूर्ण बातों की काट करने का मौका तक शहर के पर्यटन व्यवसायियों को कई बार नहीं मिलता और सैलानी अपनी पसंद की जगह पर ठहरने तथा मुक्त मन से भ्रमण करने का अवसर गंवा देते हैं।
भूल बैठे अपनी उज्ज्वल पर परा
पर्यटन क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पद्र्धा के साथ अब कई तरह के लोग भी रोजी-रोटी कमाने के लिए शामिल हो गए हैं। ऐसे लोग जैसलमेर भ्रमण करने पहुंचने वाले पर्यटकों से कई बार केवल राह दिखाने भर के भी पैसा ले लेते हैं। ऐसे लोग उनके साथ टैक्सी में सवार होकर या पैदल चलने लगते हैं तथा दर्शनीय स्थल तक पहुंचाकर पैसे की मांग करते हैं। पर्यटक के आनाकानी करने पर झगड़ा तक करने पर उतारू हो जाते हैं। जानकारी के अनुसार बीते दिनों ऐसा एक मामला पुलिस तक भी पहुंचा। जिसमें एक व्यक्ति ने दुर्ग तक साथ जाकर सैलानियों के दल से सैकड़ों रुपए वसूल लिए। बाद में सैलानियों ने इसकी शिकायत की तब पुलिस को देखकर उसने अधिकांश राशि लौटा दी। यह उस शहर में हो रहा है, जहां अतिथि सत्कार की उज्ज्वल पर परा रही है और घरों के बाहर बने ओटों पर कोई अनजान व्यक्ति भी सुस्ताता तो उसे चाय-पानी की मनुहार की जाती।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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