जैसलमेर में फिर मंडराई आसमान से आफत

-सहमे किसानों तो पशुपालकों के माथे पर चिंता की लकीरें
-गत वर्ष में टिड्डियों के पड़ाव से हुआ था काफी नुकसान

By: Deepak Vyas

Published: 22 May 2020, 08:25 PM IST

जैसलमेर/नोख. जिले के अंतिम छोर पर स्थित नोख उप तहसील क्षेत्र और आसपास के जोधपुर और बीकानेर जिले के क्षेत्र में गत वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी टिड्डी दल के पहुंचने से किसानों व पशु पालकों की चिंताऐं अभी से बढ़ गई है। वर्षों बाद एक बार फिर से संकट के बादल गहराने लगे है। गत वर्ष मानसून की बारिश व फसलों की बुवाई के बाद टिड्डी दल ने पाकिस्तान की ओर से देश की पश्चिमी सीमा में प्रवेश करते हुए नोख क्षेत्र में भी जबरदस्त नुकसान पहुंचाया था । किसानों व पशुपालकों की शत्रु माने जाने वाली ये टिड्डियां मई महीने में ही हमलावर हो गया है । गत वर्ष प्रशासन व सरकार इस पर पूरी तरह से काबू नहीं कर सके थे । ऐसे में लगातार अकाल की मार झेल रहे इस क्षेत्र में टिड्डी दल परेशानियों का सबब बनती जा रहे है । गुरुवार को तालरिया के आसपास तो शुक्रवार को सुबह से दोपहर तक नोख के आसमान में टिड्डी दल का विचरण देखा गया ।
यह है हालात
नोख उप तहसील क्षेत्र में नोख नाचना सहित कुल 19 ग्राम पंचायतें शामिल है, जिसमें करीब सौ से अधिक गांव व ढाणियों और बड़ी संख्या में नहरी क्षेत्र में चकों में आबादी निवास करती है। अधिकांश क्षेत्र में नहर के पानी की सिंचाई से किसान वर्ष में दो बार फसल उगाते हैं तो नोख सहित क्षेत्र में मानसून की बारिश पर खेती निर्भर है। इसके अलावा नोख से सटे बीकानेर जोधपुर जिले के भी दर्जनों गांव व ढाणियां खेती व पशु पालन पर निर्भर है। गत वर्ष किसानों ने हजारों हैक्टर में खेती की थी और करीब 3 महीने में कई बार टिड्डी दल ने हमला करते हुए किसानों को की फसलों को नुकसान पहुंचाया था तो इस वर्ष भी टिड्डी दल ने नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है ।
सिंचित क्षेत्र में दोहरी मार
नोख उप तहसील क्षेत्र में स्थित संपूर्ण क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर से सिंचाई कर किसान वर्ष में दो फसलों को उगाते है, लेकिन गत वर्ष व इस वर्ष टिड्डियों ने किसानों की कमर तोड़ दी है । नहरी क्षेत्र में बुवाई करने वाले किसानों को टिड्डी दल दोहरी मार पहुंचा रहा है तो मानसूनी बारिश पर निर्भर खेती भी टिड्डी दल का निवाला बनती जा रही है। जानकारों के अनुसार टिड्डी दल जहां भी पड़ाव लेते है, वहां फसल, वनस्पति व पेड़ पौधों को चट कर जाती है और वही प्रजनन से बड़ी संख्या में फाका उत्पन्न हो जाता है ।
पशुपालक भी बेहाल
क्षेत्र में टिड्डियों के लगातार दूसरे वर्ष पहुंचने के कारण न केवल किसान बल्कि पशुपालक भी बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं। कारण यह है कि टिड्डी दल जहां भी पड़ाव डालती है, वहां पूरी हरियाली को चट कर जाती है । ऐसे में टिड्डी दल के क्षेत्र में विचरण करने के बाद पशुपालकों को अपने पशुधन के लिए चारागाह में चारे की उम्मीदें खत्म होती जा रही है ।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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