विजय दिवस: इतिहास के जीवंत दस्तावेज

7१' के युद्ध में नापाक इरादों के साथ जैसलमेर से लगती सीमा में भीतर तक घुस आए दुश्मन को वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने सूरज की पहली किरण के साथ ध्वस्त करना शुरू किया।

By: Deepak Vyas

Published: 16 Dec 2020, 01:18 PM IST

7१' के युद्ध में नापाक इरादों के साथ जैसलमेर से लगती सीमा में भीतर तक घुस आए दुश्मन को वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने सूरज की पहली किरण के साथ ध्वस्त करना शुरू किया। देखते ही देखते लोंगेवाला का युद्धस्थल दुश्मन के जवानों व टैंकों-ट्रकों के अवशेषों से भर गया। रात के सन्नाटे को चीरकर सायं-सायं करती बर्फानी हवाओं के बीच रेत के अथाह धोरों में पाकिस्तान के करीब ६०० जवानों का मुकाबला भारतीय थल सेना के १२० जवानों ने बखूबी किया। पौ फटते ही भारतीय वायुसेना ने जिस आक्रामकता के साथ दुश्मन को धराशायी किया, वह तो भारतीय सैन्य इतिहास का अमिट अध्याय बन चुका है। वैसे, आधुनिक दुनिया के इतिहास में देशों के बीच युद्ध तो कई लड़े गए, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच १९७१ में हुई लड़ाई दो मायनों में अनूठी है । इस युद्ध ने जहां दुनिया का भूगोल बदल दिया और 'बांग्लादेशÓ बना, वहीं पाकिस्तान के ९० हजार जवानों ने हथियारबंद होने के बावजूद आत्मसमर्पण करते हुए पराजय स्वीकार कर ली। सरहदी जैसलमेर जिले में ऐतिहासिक जीत को बयां करने वाले ऐतिहासिक दस्तावेज आज ऐतिहासिक युद्ध की स्वर्णिम वर्षगांठ को दिलोदिमाग में सजीव बनाए हुए हैं।

Deepak Vyas Bureau Incharge
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