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Video: परमाणु नगरी को पर्यटन नगरी बनाने को लेकर रखे विचार

locationजैसलमेरPublished: Feb 13, 2024 05:07:51 pm

Submitted by:

Deepak Vyas

पर्यटन को मिले बढ़ावा, मरु महोत्सव में हो नवाचार

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1974 व 1998 में पोकरण में परमाणु परीक्षण कर देश की ताकत का लोहा पूरे विश्व में मनवाया गया। परमाणु परीक्षण के बाद पोकरण को विश्व के मानचित्र पर जगह मिल गई, लेकिन आज भी पर्यटन के मानचित्र पर जगह नहीं मिल पाई है। प्रतिवर्ष लाखों सैलानी विश्व विख्यात स्वर्णनगरी जैसलमेर घूमने के लिए आते है। ये पर्यटन पोकरण होकर गुजरते है। इसलिए पोकरण को जिले का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। ऐतिहासिक, सामरिक व धार्मिक महत्व और जैसलमेर के समान ही कई पर्यटन स्थलों के बावजूद पोकरण पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर पा रहा है। जिसके कारण लाखों पर्यटक पोकरण रुके बिना ही सीधे जैसलमेर निकल जाते है और पोकरण को केवल एक मिड-वे के रूप में ही मान रहे है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों व प्रशासन की यदि नजरें इनायत होती है और पोकरण के पर्यटक स्थलों को पहचान दिलाई जाती है तो पर्यटकों का पोकरण में ठहराव होने के साथ यहां के पर्यटन व्यवसाय को ऊंचाइयां मिल सकती है। हालांकि गत कुछ वर्षों से जैसलमेर के मरु महोत्सव का आगाज पोकरण से किया जा रहा है और 1 दिवसीय कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे है, लेकिन स्थानीय के अलावा देशी-विदेशी पर्यटक इससे नहीं जुड़ पा रहे है। पोकरण के मरु महोत्सव का प्रचार भी जैसलमेर तर्ज पर देश के अलग-अलग राज्यों एवं विदेशों में भी किया जाता है तो इस एक दिवसीय मरु महोत्सव में भी पर्यटकों की आवक हो सकती है।
लोगों ने रखे विचार
इसी को लेकर राजस्थान पत्रिका की ओर से सोमवार को परमाणु नगरी पोकरण को पर्यटन नगरी बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों एवं मरु महोत्सव के आयोजन को लेकर टॉक-शो का आयोजन किया गया। इसमें लोगों ने पोकरण को किस प्रकार पर्यटन नगरी बनाया जा सके और मरु महोत्सव का सफल आयोजन हो सके, इसको लेकर अपने विचार रखे।
इन्होंने रखे विचार
पत्रिका के टॉक-शो में भाग लेते हुए स्थानीय निवासी महेन्द्र शर्मा ने कहा कि पोकरण में जैसलमेर जैसी ही कई क्षमताएं है। यदि प्रशासन व जनप्रतिनिधि मिलकर अलग से योजना तैयार करें और पोकरण के पर्यटक स्थलों को विशेष पहचान दिलाएं तो पर्यटकों की आवक हो सकती है एवं पोकरण के पर्यटन को पंख लग सकते है।
रेंवतदान उज्ज्वल ने कहा कि पोकरण में पहाड़ी पर स्थित कलात्मक छतरियों, कैलाश टैकरी, नरासर कुंड जैसे स्थलों को विशेष पहचान दिलाने के साथ यहां विकास कार्य करवाए जाते है एवं सुविधाएं विकसित की जाती है तो पर्यटकों के ठहराव का स्थल बन सकता है।
कैलाश पुरोहित ने बताया कि बाबा रामदेव की समाधि रामदेवरा और पोकरण के दैवीय मंदिरों में प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालुओं की आवक होती है। सरकार की ओर से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अलग से योजना बनाई जाती है तो पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिल सकता है।
महिपालसिंह चम्पावत ने बताया कि परमाणु परीक्षण को लेकर एक गैलेरी या म्युजियम बनाया जाता है तो जैसलमेर जाने वाले पर्यटकों का पोकरण में ठहराव हो सकेगा। साथ ही पर्यटकों को घूमने व देखने के लिए एक स्थल मिल सकेगा।
एकां निवासी सुरेन्द्रसिंह भाटी व जैमला निवासी मेघसिंह राठौड़ ने बताया कि प्रतिवर्ष होने वाले मरु महोत्सव में नवाचार आवश्यक है। हर बार अलग-अलग नवाचार करने से पर्यटकों की रुचि बढ़ सकेगी और उनकी आवक होगी। तभी मरु महोत्सव की सार्थकता बढ़ेगी।
सांकड़ा निवासी सवाईसिंह राठौड़, रघुवीरसिंह चंपावत व अमृतलाल प्रजापत ने बताया कि मरु महोत्सव के आयोजन के दौरान सुविधाओं का भी विस्तार होना चाहिए। दर्शकों के लिए छाया, पानी व अच्छी बैठक व्यवस्था हो तो पर्यटक का ठहराव हो सकता है।
शिवरतन गौड़ व महेन्द्रसिंह भाटी ने बताया कि जैसलमेर की तरह की पोकरण में हवेलियां, तालाब, रेतीले धोरे सहित अन्य पर्याप्त क्षमताएं है। यदि पर्यटन विभाग इनका पर्याप्त प्रचार प्रसार करता है और इन स्थलों पर विकास कार्य करवाए जाते है तो जैसलमेर जाने वाले पर्यटकों का पोकरण से जुड़ाव होगा। जिससे पोकरण के पर्यटन व्यवसाय को पंख लगाए जा सकते है।

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