Video Jaisalmer- पत्रिका अभियान का असर- आदत में शुमार होने लगा हेलमेट  


- जैसलमेर में हर तीसरे दुपहिया चालक ने हेलमेट पहनना शुरू किया
- ‘पत्रिका’ की पहल के बाद पुलिस की सख्ती व समझाइश दिखाने लगी रंग

By: jitendra changani

Published: 31 Aug 2017, 08:34 PM IST

जैसलमेर . सडक़ हादसों में जान गंवाने और गंभीर घायल होने वाले अधिकांश दुपहिया वाहन चालकों के हेलमेट लगाए नहीं होने के तथ्य के रोशनी में आने के बाद ‘राजस्थान पत्रिका’ की ओर से चलाए गए अभियान ‘हेलमेट बोझ नहीं, कवच’ का व्यापक असर वाहन चालकों पर देखा जा रहा है। सैन्य बलों में कार्यरत जवानों के अलावा पूर्व में जहां बमुशिकल 10 प्रतिशत तक दुपहिया वाहन चालक हेलमेट लगाकर वाहन चलाते हुए नजर आते थे, उनकी संख्या अब करीब एक-तिहाई तक बढ़ गई है। अब सडक़ों पर कई दुपहिया वाहनों पर तो अब चालक के साथ पीछे बैठने वाले के भी हेलमेट पहना दिखाई देता है। जबकि पूर्व में ऐसा सेना या बीएसएफ से संबद्ध लोग ही करते थे। आमजन के साथ पुलिस प्रशासन ने भी स्वीकार किया है कि, ‘पत्रिका’ की ओर से चलाई मुहिम का सकारात्मक असर पड़ा है।

Jaisalmer patrika
IMAGE CREDIT: patrika

पुलिस व्यस्त तो ‘पत्रिका’ आई आगे
जिला पुलिस प्रशासन की ओर से पिछले अर्से हेलमेट की अनिवार्यता पर सख्ती दिखाए जाने से शहर में दुपहिया चालकों पर हेलमेट लगाने का दबाव पड़ा था। लेकिन रामदेवरा मेला प्रारंभ होने की वजह से बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को वहां ड्यूटी पर भेज दिया गया। जिससे सडक़ों पर हेलमेट संबंधी जांच करने वाले पुलिसकर्मी नहीं के बराबर ही रह गए। ऐसे समय में ‘राजस्थान पत्रिका’ ने हमेशा की भांति सामाजिक सरोकार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए ‘हेलमेट बोझ नहीं, कवच’ शीर्षक से अभियान चलाया। इसके अंतर्गत एक के बाद एक समाचारों की श्रंखला चला पाठकों को हेलमेट की आवश्यकता के अलग-अलग पहलुओं से रूबरू करवाया। खबरों के माध्यम से जैसलमेर शहर और उसके आसपास के क्ष् ोत्रों में पिछले अर्से घटित हादसों तथा बढ़ती वाहनों की संख्या का उल्लेख करते हुए बताया गया कि, हेलमेट लगाना अब क्यों जरूरी हो गया है। ऐसे ही शहर के किन मार्गों पर बिना हेलमेट दुपहिया चलाना ज्यादा घातक है, इस पर भी प्रकाश डाला गया। साथ ही सर्वाधिक वाहनों की आवाजाही वाले शहर के बाहरी मार्गों पर रोड डिवाइडर नहीं होने का मसला उठाते हुए प्रशासन के सामने वास्तविकता रखी गई।
बदलने लगा मंजर
शहर की सडक़ों पर पत्रिका के अभियान का असर अब नजर आने लगा है। करीब एक-तिहाई दुपहिया वाहन चालक हेलमेट लगाकर वाहन चलाते नजर आते हैं। इनमें से कई जने तो शहर के भीतरी भागों में भी हेलमेट लगाकर ही रखते हैं। चालकों ने बताया कि प्रारंभ में उन्हें हेलमेट लगाना थोड़ा असहज लगा, लेकिन यह आदत में शुमार हो गया है। घर से निकलते समय वे वाहन की चाबी के साथ हेलमेट उठाना नहीं भूलते। यहां यह उल्लेखनीय है कि जैसलमेर में ज्यादातर दुपहिया चालकों ने स्तरीय कम्पनियों के हेलमेट लगाने शुरू किए हैं। उनका कहना है कि, यह उनकी अपनी सुरक्षा से जुड़ा सवाल है तो इसमें ‘शॉर्टकट’ क्यों अपनाया जाए?

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पत्रिका की मुहिम का व्यापक असर
जैसलमेर में दुपहिया चालकों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता लागू की गई है। पुलिस प्रशासन ने हादसों की दशा में चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर इसे प्राथमिकता दी। ‘राजस्थान पत्रिका’ की ओर से चलाए गए अभियान का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। अब बड़ी संख्या में वाहन चालक हेलमेट लगाकर वाहन चला रहे हैं। यह बहुत अच्छी बात है।
- गौरव यादव, जिला पुलिस अधीक्षक, जैसलमेर

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jitendra changani Desk/Reporting
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