Video Jaisalmer- जैसलमेर में सरस्वती नदी के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद अब सरस्वती की खोज में तेजी की उम्मीद!

-हरियाणा और राजस्थान की संयुक्त टीम जैसलमेर के सीमावर्ती  क्षेत्रों में पहुंची
-जैसलमेर में मिल चुके हैं सरस्वती के बहाव  क्षेत्रों के पुख्ता प्रमाण

By: jitendra changani

Published: 01 Sep 2017, 09:32 PM IST

जैसलमेरवैदिक काल की सरस्वती नदी जो काल-प्रवाह के दौरान लुप्त हो गई है, की पुन: खोज के लिए भारत सरकार की महत्वाकांक्ष् ाी योजना के अंतर्गत गुरुवार को अध्ययन दल ने जैसलमेर के सीमावर्ती गांवों व क्षेत्रों का दौरा किया।इस दल का नेतृत्व हरियाणा राज्य के सरस्वती नदी हेरिटेज विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष् ा प्रषांत भारद्व ाज कर रहे हैं। उनके साथ राजस्थान सरकार के भूजल विभाग के मुख्य अभियंता सूरजभान सिंह, हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग के अधीक्ष् ाण अभियंता अरविंद कौषिक, तकनीकी परामर्षदाता आदित्य व जैसलमेर से भूजल वैज्ञानिक डॉ. एनडी इणखियां दल में सम्मिलित हैं। इस दल ने गुरुवार को जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों लोंगेवाला, घोटारू, किषनगढ़, रणाऊ, तनोट आदि का भ्रमण कर सरस्वती नदी के प्रवाह क्षेत्रों  और दृष्यमान फॉसिल्स का अवलोकन किया।



 

मिथक नहीं, हकीकत है सरस्वती
राजस्थान पत्रिका से खास बातचीत में हरियाणा के सरस्वती संबंधी प्राधिकरण के उपाध्यक्ष् ा प्रषांत भारद्व ाज ने बताया कि सरस्वती नदी का प्रवाह आज से 3 से 18 हजार साल पहले तक होता रहा है।हमारे वेदों में इस नदी का बहुत विस्तार से उल्लेख है। उन्होंने कहा कि इससे यह भी साफ है कि भारत की सभ्यता और संस्कृति हजारों वर्ष से निरंतर चली आ रही है।हरियाणा में फोसिल्स के अध्ययन से साफ हो गया है कि इस क्ष् ोत्र में सरस्वती प्रवाहित होती थी।इस क्ष् ोत्र में हरियाणा और राजस्थान के अलावा गुजरात सहित कुल 7 प्रांत मिलकर काम कर सकते हैं। जिससे आने वाले समय में आर्कियोलॉजिकल, इको टूरिज्म की संभावनाएं काफी बढज़ाएंगी।

550 किमी का प्रवाह क्षेत्र
राजस्थान सरकार के भूजल विभाग के मुख्य अभियंता सूरजभान सिंह ने ‘पत्रिका’को बताया कि राजस्थान में सरस्वती का प्रवाह क्ष् ोत्र हनुमानगढ़, बीकानेर और जैसलमेर होते हुए गुजरात के कच्छ क्ष् ोत्र तक पहुंचता है।यह कुल 550 किमी. में फैला है। उन्होंने बताया कि अध्ययन दल ने पुराने अध्ययनों के निष्कर्षों को षामिल करते मौजूदा समय में जो खोजबीन की है, उससे इतना साफ है कि सरस्वती के चैनल्स के पुनर्जीवित होने से संबंधित क्ष् ोत्रों में आगामी 20 से 30 साल तक के पीने के पानी का बंदोबस्त हो जाएगा।यह इस इलाके के रहवासियों के अलावा सैनिकों व सीमा सुरक्ष् ाा बल के जवानों के लिए बेहद कारगर सिद्ध होगा।

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IMAGE CREDIT: patrika

शुरुआत तो पहले हो चुकी
जैसलमेर जिले में सरस्वती नदी के बहाव क्ष् ोत्र को लेकर करीब 22 साल पहले काम किया जा चुका है।वर्ष 1994 और 1995 में भारत सरकार के केन्द्रीय भूजल बोर्ड, राजस्थान सरकार के भूजल विभाग व अन्य एजेन्सियों ने समन्वित तौर पर जिले के सीमावर्तीतनोट तथा घोटारू क्ष् ोत्र में व्यापक स्तर पर कार्य किया था। अनुसंधान के तहत इस क्ष् ोत्र में जल नमूने के रासायनिक विश्लेषण के अलावा कार्बन डेटिंग तकनीकी से भूजल की आयु भी ज्ञात की गई थी। इस क्ष् ोत्र में नलकूप खोद कर भूमिगत जल तथा मिट्टी के नमूनों पर अनुसंधान किया गया था। केन्द्रीय भूजल बोर्ड की ओर से सीमावर्ती इलाकों में आठ नलकूप खुदवाए गए लेकिन किसी विभाग को हस्तान्तरित नहीं किए जाने से ये नलकूप आज तक काम में नहीं लिए जा सके। उस समय हुए अनुसंधान से हजारों वर्षप्राचीन सरस्वती नदी का इस क्ष् ोत्र में बहाव क्ष् ोत्र होने के प्रमाण भी मिले लेकिन बाद में इस दिषा में और आगे कदम नहीं बढ़ाए जाने से यह कार्य अधर में ही छूट गया।वर्ष 2000 में भी मुम्बई से आई टीम ने भी इस क्ष् ोत्र में अनुसंधान किया था।

इसलिए हरियाणा निकला आगे
वैदिक युग की सरस्वती नदी के बहाव क्ष् ोत्र को खोजने के लिए केंद्र सरकार की योजना के अनुसार जहां राजस्थान में अनुसंधान कार्य में देरी हुई वहीं पड़ोसी हरियाणा राज्य में इस संबंध में बड़ी कामयाबी हासिल की गई है। इसकी वजह यह है कि हरियाणा सरकार ने तत्परता दहुए एक अलग से प्राधिकरण का गठन कर दिया।जबकि राजस्थान सरकार पिछले करीब दो वर्षों से जुबानी जमाखर्च से आगे नहीं बढ़पाई।बताया जाता है कि हरियाणा की गति को देखकर राजस्थान सरकार कुछ एक्षन में आई है।

फैक्ट फाइल -
- 07 राज्यों से जुड़ा है सरस्वती का प्रवाह क्ष् ोत्र
- 550 किमी. क्ष् ोत्रफल में सरस्वती का बहाव
- 22 वर्ष पहले जैसलमेर में हो चुका सरस्वती की खोज का कार्य
- 35 से 40 मीटर है जैसलमेर में जल स्तर

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jitendra changani Desk/Reporting
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