Jaislamer Video- जैसलमेर के देवीय मंदिरों में चतुर्दशी को हुए कार्यक्रम, देखिए वीडिओ

जैसाणे में शक्तिपीठों पर उमड़ा आस्था का ज्वार
-देवी मंदिरों में रही भक्तों की भीड़, हुए धार्मिक आयोजन

By: jitendra changani

Published: 05 Sep 2017, 09:26 PM IST

जैसलमेर . ईष्ट के प्रति अटूट आस्था, माहौल में गूंजते जयकारे, श्रद्धा व आस्था के माहौल में भक्ति सागर में सराबोर दर्शनार्थी...। जैसलमेर जिले में भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी के दिन मंगलवार को शक्तिपीठों व देवी मंदिरों में आस्था का ज्वार उफान पर दिखाई दिया। शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र व दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग मंदिरों में मनोकामनाएं लेकर पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना की। मंगलवार को सुबह से ही जिले भर के देवी मंदिरों व शक्तिपीठों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की रेलमपेल शुरू हो गई, जो देर शाम तक बनी रही। श्रद्धालुओं ने चतुर्दशी के दिन घरों में पूजा-अर्चना की और सपरिवार विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। जैसलमेर से करीब 27 किमी दूर स्थित कालेडूंगरराय मंदिर में आयोजित मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। इससे पूर्व मेला स्थलों पर सजावट की गई थी। चतुर्दशी को श्रद्धालुओं को दर्शन करवाने के लिए नि:शुल्क बसों की व्यवस्था भी की गई। कई दर्शनाथी पैदल ही विभिन्न मंदिरों के दर्शन करते हुए कालेडूंगरराय मंदिर पहुंचे। मार्ग में दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए पानी, चाय व नाश्ते की व्यवस्था भी श्रद्धालुओं ने की। उधर, स्वर्णनगरी के देवी मंदिरों में भी काफी भीड़ रही। यहां गफूर भट्टïा स्थित कालेडूंगरराय, कालेडूंगरराय खेजडिय़ा मंदिर, सुखिया नाडा थान, मलका प्रोल स्थित पनोधराय मंदिर एवं विभिन्न मंदिरों में दिन भर भक्तों की चहल-पहल बनी रही। इसी तरह तेमड़ेराय, गजरुप सागर, भादरिया, देगराय, नभडूंगर में दिन भर भक्तों की रेलमपेल देखने को मिली।

 

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अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया
-कथा का श्रवण कर खोला उपवास
पोकरण कस्बे में अनंत चतुर्दशी का पर्व मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ परंपरागत रूप से मनाया गया। यहां पुरुषों व महिलाओं ने भगवान विष्णु के अवतार अनंत भगवान की पूजा-अर्चना व कथा की व दिन भर उपवास रखकर परिवार में सुख-समृद्धि, अमन-चैन व शांति के लिए प्रार्थना की। घरों व सार्वजनिक स्थलों पर परंपरागत रूप से अनंत भगवान की कथा का वाचन किया गया तथा विधि विधान के साथ अनंत भगवान की पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर 14 गांठे लगाकर सूत के नए धागे को पुरुषों ने अपनी दाई भुजा व महिलाओं ने अपनी बाई भुजा पर धारण कर पुराने धागे का विधिवत परित्याग कर सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। दिनभर उपवास व कथा के बाद आरती कर दान, पुण्य किया।
यह है अनंत चतुर्दशी पर्व की मान्यता
मान्यताओं व शास्त्रों में लिखित कथाओं के अनुसार **** माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को यह पर्व मनाया जाता है। जब द्वापर युग में पाण्डव द्युत क्रीड़ा में सब कुछ हारकर जंगलों में घूम रहे थे व अत्यंत दु:खी थे। तब धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से दु:खों से छुटकारा पाने का उपाय पूछा, तब उन्होंने अनंत चतुर्दशी की कथा व इसके महातम्य के बारे में बताते हुए पूरे परिवार को इस व्रत के करने का आग्रह किया। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि अनंत नाम लक्ष्मीनाथ भगवान विष्णु का है, जिसका कोई अंत नहीं, वही अनंत है और इस व्रत के करने से मनुष्य दु:खों से छुटकारा पाता है तथा सुख समृद्धि, गृह शांति व आरोग्य को प्राप्त होता है। उसी दिन से अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है।

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jitendra changani Desk/Reporting
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