Jaisalmer video- पत्रिका अभियान-सोनार को बचाना है स्वच्छता से निखरेगी सोनार दुर्ग की आभा


-दुर्ग में बिखरा नजर आता है कचरा और गंदगी
-नगरपरिषद के साथ आम दुर्गवासियों को करने होंगे ईमानदार प्रयास

By: jitendra changani

Published: 10 Sep 2017, 09:55 PM IST

जैसलमेरपीत पाषाण से निर्मित सोनार दुर्ग की सबसे बड़ी खासियत इसमें निवास करने वाली रिहाइष है।यही तथ्य इस दुर्ग को दुनिया भर में बेमिसाल बनाता है, लेकिन हजारों की आबादी के निवास करने के चलते कई किस्म का कचरा और गंदगी भी यहां की गलियों व खुले चौकों में दिखाई देती है। जो देश-दुनिया से दुर्ग को निहारने आने वाले लोगों के सामने इस ऐतिहासिक विरासत का आकर्षण कम करती है, साथ ही यहां के बाशिंदों के लिए भी कम परेशानी का सबब नहीं है। कहने को, नगरपरिषद की ओर से दुर्ग में विशेष सफाई व्यवस्था की गई है लेकिन सरकारी तंत्र की जो खामियां अन्य जगहों पर नजर आती है, वह इसमें भी विद्यमान है। मसलन, जितने सफाईकर्मी कायदे से काम पर जुटे रहने चाहिए, उतने यहां काम पर नहीं आते और रही-सही कसर कई दुर्गवासी स्वयं पूरी कर देते हैं।
कम पड़ रहे डस्टबिन
दुर्ग में परिषद के अलावा आई लव जैसलमेर व अन्य कई संस्थाओं की तरफसे समय-समय पर कचरा संग्रहण के लिए डस्टबिन रखवाए गए। उनमें से कई डस्टबिन तो समय के साथ गायब हो गए, लेकिन कई अब भी जगह-जगह रखे हुए हैं। इसके बावजूद कचरे की समस्या बनी रहती है क्योंकि सोनार दुर्ग में तीन हजार की आबादी निवास करने के साथ हजारों तादाद में सैलानी भी दिन के समय आवाजाही करते हैं। ऐसे में सैलानी भी पानी व अन्य पेय पदार्थों की खाली बोतलें तथा खाद्य सामग्री के रैपर तथा अन्य अपशिष्ट उनमें डालते हैं। कई बार आधे दिन में ही डस्टबिन पूरी तरह से भर जाते हैं और बाद में वे छलकते रहते हैं और कचरा उनसे बाहर गिरता है।

सभी बनें जिम्मेदार
सोनार दुर्ग को साफ-सुथरा रखने का दायित्व नगरपरिषद के साथ यहां रहने वाले लोगों व घूमने आने वाले सैलानियों, सभी का है। ऐसे में प्रयास भी सभी को जिम्मेदार बनकर करने होंगे। स्वर्णिम आभा वाले दुर्ग को स्वच्छ भारत की मिसाल बनाकर हम और खूबसूरत बना सकते हैं।
-विजय बल्लाणी, दुर्गवासी

कचरे की निकालते हैं झांकी
परिषद की ओर से दुर्ग की सांगोपांग सफाई के लिए ठेका दिया हुआ है। सफाईकर्मी पूरे दुर्ग क्षेत्र का कचरा व गंदगी यहां दशहरा चौक में इक_ा करते हैं और फिर लोडिंग टैक्सी में लादकर उसे दुर्ग से नीचे उतारा जाता है। कई बार कचरा ले जाने वाला यह वाहन सुबह 10-11 बजे दशहरा चौक पहुंचता है। तब तक सड़ांध मारता कचरा चौक में ही पड़ा रहता है और वही समय लक्ष्मीनाथ व जैन मंदिर के दर्शन करने आने वाले लोगों, दुर्गवासियों के काम-धंधों पर जाने तथा सैलानियों के आवाजाही का सबसे व्यस्त समय होता है। ऐसे में दुर्ग की बड़ी बदबूदार तस्वीर उभरकर सामने आती है। जबकि सफाई कर्मियों को कायदे से सुबह 8 बजे तक दशहरा चौक से कचरा उठा लेना चाहिए।
इन उपायों पर भी हो अमल
-दुर्ग में और ज्यादा डस्टबिन लगवाए जाएं।
-सीवरेज होदियों की समयबद्ध सफाई की व्यवस्था हो। अभी यह कार्य बिलकुल नहीं किया जा रहा, जिससे पानी का रिसाव आसपास के भवनों की दीवारों में होता है।
-दुर्ग के रैम्प पार्ट पर उगी झाडिय़ों की नगरपरिषद सही समय पर कटाई करवाए। ऐसा नहीं किया जाता, जिससे दुर्ग घास में घिरा दिखता है और वहां लगी लाइटें भी बड़ी तादाद में खराब हो जाती हैं।

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jitendra changani Desk/Reporting
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