पत्रिका अभियान -सोनार को बचाना है अनजान चेहरों ने बढ़ाई सुरक्षा को लेकर चिंता


-दुर्ग में कार्यरत बाहरी लोगों की पहचान बन रही मसला
-देर रात में भी दुर्ग पहुंचने लगे हैं अपरिचित लोग

By: jitendra changani

Published: 11 Sep 2017, 09:50 PM IST


जैसलमेर . सोनार किला विश्व धरोहर के रूप में पहचान बनाने से बहुत पहले एक विशाल परिवार की तरह आबाद रहा है। यहां बसने वाले सैकड़ों परिवार सदियों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी यहां बसे हुए हैं, लेकिन सोनार दुर्ग में अब संचालित हो रही होटल्स आदि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले ऐसे बहुत से युवा हैं, जिनका सोनार दुर्ग से दूर-दूर तक का नाता नहीं है। वे यहां या तो काम करते हैं अथवा कोई इमारत किराए पर लेकर व्यवसाय कर रहे हैं। इसके अलावा किले में दिनभर सैलानियों से लेकर कामगारों की सूरत में अनजान चेहरों की आवाजाही का दौर बना रहता है, जिससे सुरक्षा पर सवालिया निशान भी लगते हैं। अभी तक पुलिस प्रषासन अथवा स्वयं दुर्गवासियों की ओर से ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई है कि, बाहरी लोगों की पहचान पुख्ता हो सके या उन पर नजर रखी जाए।यहां तक कि, किले के महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसी टीवी कैमरे तक लगाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ा जा सका है।

इन उपायों पर हो सकता है अमल
-दुर्ग में काम करने वाले बाहरी व्यक्तियों के बैज बनवाए जाएं ताकि पता चल सके कि, फलां व्यक्ति कौन है और किस जगह काम करता है?
-रात के समय दुर्ग की अखे प्रोल व दषहरा चौक में चौकीदार की व्यवस्था हो, जो एक निर्धारित अवधि के बाद किले में आने वाले बाहरी व्यक्ति से पूछताछ करने के लिए अधिकृत हो।
-दुर्ग के लोग अथवा सरकारी विभाग यहां जगह-जगह पर नाइट विजन सीसी टीवी कैमरे लगवाए।

 

महंगी न पड़े यह बेपरवाही
सोनार दुर्ग में संचालित होने वाली होटल्स तथा अन्य प्रतिष्ठानों में कामकाज के सिलसिले में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा बाहरी राज्यों के लोग रोजगार पाए हुए हैं। ये कौन लोग हैं तथा उनका बैकग्राउंड क्या है, इस बारे में उनके नियोक्ता के अलावा शायद ही किसी को पुख्ता ढंग से पता हो। पूर्व समय में जब भी कोई अनजान चेहरा दुर्ग में नजर आता तो वहां रहने वाले तपाक से उसका नाम-पता पूछ लेते और क्यों गलियों में घूम रहा है, यह भी जान लेते। लेकिन अब देर रात के समय भी ऐसा नहीं किया जाता क्योंकि यह मान लिया जाता है कि, अमुक किसी होटल में काम करने वाला होगा। यह बेपरवाही कभी घातक सिद्ध हो जाए, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। कुछ अर्सा पहले खुफिया एजेंसियों की पकड़ में आए पाकिस्तानी जासूस नंदू गर्ग ने भी सोशल मीडिया पर किले के दशहरा चौक में खींचे गए अपने फोटो अपलोड किए थे। दुर्ग की अखे प्रोल से लेकर सभी प्रोलों, दशहरा चौक, जैन मंदिर, लक्ष्मीनाथ मंदिर तथा अन्य दर्षनीय स्थानों पर सीसी टीवी कैमरे लगाने के इरादे भी पूरे नहीं हो सके हैं। कई बाहरी लोग तो दुर्ग में मकान आदि किराए पर लेकर गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट वगैरह भी चला रहे हैं।

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jitendra changani Desk/Reporting
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