JAISALMER ME जमीन आबंटन की सुगबुगाहट के साथ ही विरोध के स्वर हुए मुखर

-पर्यटन तथा अन्य इकाइयों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आबंटन की प्रक्रिया तेज

By: jitendra changani

Published: 10 Mar 2018, 10:34 PM IST

सरकार की ‘नरमी’ से खुल रहा जमीन आबंटन का रास्ता
जैसलमेर. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन समेत अन्य इकाइयों की स्थापना के लिए जमीन आबंटन की राह सुगम होती दिखाई दे रही है। इसके साथ ही जिले की संबंधित ग्राम पंचायतों और मूल बाशिंदों की ओर से विरोध के स्वर भी मुखर कर दिए गए हैं। विधानसभा चुनाव के नजदीक राज्य सरकार की ओर से जमीन आबंटन के नियमों को सरल बनाने के चलते पर्यटन के क्षेत्र में नाम कमा चुके जैसलमेर जिले में बड़ी तादाद में राजस्व जमीन का आबंटन करने की तैयारी की जा रही है।इन जमीनों के लिए आवेदन वर्ष 2007 से 2015 तक किए जाने की बात कही जा रही है। जिले के मूल बाङ्क्षशदों के विरोध का एक कारण उन्हें एक तरफ रखकर अन्य लोगों को जमीन आबंटित किए जाने की तैयारी का है।
मूल निवासियों को वरीयता नहीं
जानकारी के अनुसार प्रशासन की ओर से जैसलमेर से सटी अमरसागर, छत्रैल और सम आदि ग्राम पंचायतों में पर्यटन और अन्य इकाइयों के लिए राजस्व भूमि के आबंटन की प्रक्रिया को तेज किया गया है।इस संबंध में संबंधित ग्राम पंचायत के निवासियों के साथ जिले के मूल बाशिंदों को किसी प्रकार की प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। यही कारण है कि ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है और शुक्रवार को जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन भेजे।
यहां जिलावासी तरस रहे जमीन को
-जैसलमेर जिले में पिछले लम्बे अर्से से बारानी भूमि आबंटन के लिए स्थानीय भूमिहीन बाशिंदे संघर्ष और मांग करते आ रहे हैं।
-समय-समय पर विरोध जुलूस, धरने-प्रदर्शन और सभाएं भी आयोजित की गई।
-इसके बीच राज्य सरकार की तरफसे पर्यटन इकाइयों की स्थापना के नाम पर जमीन आबंटन की तैयारी कर ली गई और मूल बाङ्क्षशदों की मांग को बिसरा दिया।

 

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IMAGE CREDIT: patrika

ग्रामीणों ने जताया ऐतराज
-छत्रैल ग्राम पंचायत के बाशिंदों ने शुक्रवार को अतिरिक्त कलक्टर को मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में कहा कि जिस जमीन का आबंटन किया जाना है, वह पूर्व में औरण भूमि थी। जिसे नियम विरुद्ध तरीके से किस्म परिवर्तित की गई।
-उन्होंने आरोप लगाया कि नियम विरुद्ध प्रमाण पत्रों के आधार पर आवेदनों पर आबंटन की प्रक्रिया चलाई जा रही है, जिसे तुरन्त प्रभाव से रोका जाना चाहिए।
-ज्ञापन के अनुसार राजस्व गांव काहला के कई राजस्व खसरों में करीब 1500 बीघा भूमि पशुओं की चारागाह व औरण की रही है। इस भूमि में ग्रामीण निवास भी करते हैं।
-ग्रामीणों ने इस संबंध में क्षेत्रीय सांसदों व विधायकों को भी ज्ञापन भेज कर न्यायसंगत कार्रवाई करवाने की मांग की है।
-ज्ञापन देने वालों में मांगीलाल रामदेव, सरपंच प्रतिनिधि तुर्के खां, देवीसिंह खडेर, उस्मान खां, नखताराम, राजन जोशी, मनीष रामदेव, योगेश गज्जा सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।
सम पंचायत ने भी किया विरोध
-जमीन आबंटन की जारी कार्रवाई का सम ग्राम पंचायत क्षेत्र के लोगों ने भी किया है।
-प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में कहा गया कि पंचायत की लखमणों की बस्ती में राजस्थान पर्यटन इकाई नीति के तहत तीन आवेदनों पर भूमि आबंटन की कार्रवाई की जा रही है जबकि स्थानीय लोगों को भी रोजगार के लिए जमीन की आवश्यकता है।
-सरपंच सलीमत, अब्दुल, बरियम, करीम, सुभान, दिलबर आदि ने दिए ज्ञापन में बाहरी लोगों को जमीन आबंटन नहीं करने की मांग की है।

बाहरी लोगों को आबंटन पर रोक नहीं
जिले में बाहरी लोगों को जमीन आबंटन पर किसी तरह की रोक नहीं है। वर्तमान में जिस नीति के तहत जमीन आबंटन की प्रक्रिया चलाई जा रही है, उसमें आवेदन पूर्व के वर्षों में किए गए थे।अब सरकार की ओर से नियमों को सरल बनाने से इस कार्य में तेजी आई है।आने वाले समय में आबंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
-कैलाशचंद्र मीना, जिला कलक्टर, जैसलमेर

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jitendra changani Desk/Reporting
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