JAISALMER NEWS- राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विशेष - वैज्ञानिक बनाने के ऐसे प्रयास देख कर आप सिर खुजा कर कहेंगे...

ऐसी प्रयोगशालाओं में कैसे तैयार होंगे भविष्य के वैज्ञानिक?

By: jitendra changani

Published: 28 Feb 2018, 09:45 AM IST

ऐसा कहा और माना जाता है कि, आज के विद्यार्थी कल देश का भविष्य बनेंगे।बात भी सही है।शिक्षा की मजबूत बुनियाद पर ही आने वाला कल टिका है। बात जब विज्ञान विषय की हो, तब विद्यार्थियों की वैज्ञानिक प्रतिभा को निखारने के लिए स्कूल स्तर की प्रयोगशालाओं पर बहुत कुछदारोमदार टिका होता है। विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में पत्रिका टीम की ओर से की गई प्रयोगशालाओं की पड़ताल में निराशाजनक स्थिति देखने को मिली। 

जैसलमेर. जैसलमेर जिला मुख्यालय स्थित सबसे पुराने अमर शहीद सागरमल गोपा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पर जिले भर के विज्ञान विषय के विद्यार्थियों की आशाएं टिकी हुई हैं। विद्यालय में उच्च माध्यमिक स्तर की दो कक्षाओं 11 व 12 में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के कुल 221 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन यहां विज्ञान संकाय की तीनों प्रयोगशालाओं (लेब) के हाल बुरे बने हुए हैं।सरकार की उदासीनता इन लेब कक्षों की दुर्दशा का बड़ा कारण है।प्रयोग कार्य के लिए अत्यावश्यक सुविधाओं की अनुपलब्धता से यह सवाल उठता है कि, आखिर कैसे ऐसे स्थान पर ज्ञान अर्जित कर आज के विद्यार्थी कल के होनहार वैज्ञानिक बन सकेंगे? पत्रिका टीम ने जब विद्यालय की भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान की प्रयोगशालाओं का जायजा लिया तो निराशाजनक तस्वीर उभर कर सामने आई।
63 वर्ष पुरानी इमारत
इस विद्यालय की मुख्य इमारत रियासतकाल में तैयार हुई। विज्ञान विषय को समर्पित ‘कोठारी विज्ञान कक्ष’ में कमरे व हॉल 1955 में बनाए गए।जिनका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया। उसके बाद से शायद ही कभी इन कक्षों की सार संभाल की गई।जिसके चलते एक प्रयोगशाला की दीवारों का प्लास्टर पूरी तरह से उखडचुका है।फर्नीचर वक्त की मार से बेहाल है।पानी का कनेक्शन तक नहीं है और न ही प्रयोग कार्य करने के लिए अन्य जरूरी इंतजाम।केमिकल और अन्य सामान रखने के लिए अलमारियों से लेकर दूसरे जरूरी संसाधन नहीं हैं।
विद्यार्थियों की कमी न शिक्षकों की
प्राचीन विद्यालय के विज्ञान संकाय के लिहाज से एक सकारात्मक तथ्य यह है कि यहां पढऩे वाले विद्यार्थियों की कमी है और न ही व्याख्याताओं की। मौजूदा समय में यहां कक्षा 11 में 136 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 32 बालिकाएं शामिल हैं।ऐसे ही 12वीं में 85 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, उनमें 6 बालिकाएं हैं। गत अर्से विज्ञान संकाय के सभी विषयों का अध्ययन करवाने के लिए व्याख्याताओं की नियुक्ति भी की जा चुकी है।
‘रमसा’ ने भेजे प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार गोपा विद्यालय के कक्षों में आवश्यक मरम्मत कार्य के साथ स्मार्ट क्लास की परिकल्पना को जमीन पर उतारने तथा जरूरी साजो-सामान जुटाने के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) की तरफ से प्रस्ताव लिए जा चुके हैं।विद्यालय में मुख्यमंत्री विद्यादान कोष का उपयोग करते हुए 39 लाख रुपए के प्रस्ताव गत 14 फरवरी को भिजवाए गए हैं।इसके अलावा उक्त कोष से विद्यालय 11 लाख रुपए की अन्य सामग्री भी खरीदने वाला है।अगर इनसे फर्नीचर आदि की पूर्ति प्रयोगशालाओं में की जाती है तो आने वाले समय में स्थितियों में बदलाव संभव है।

बनेगी आधुनिक प्रयोगशालाएं
विद्यालय में विज्ञान संकाय की तीनों प्रयोगशालााओं की दशा सुधारने के प्रस्ताव भिजवाए गए हैं। अतिरिक्त निर्देशक ने पिछले दिनों इनका निरीक्षण भी किया था। उम्मीद है आने वाले समय में विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
-नवलकिशोर गोयल, प्रधानाचार्य अशसागो राउमावि जैसलमेर

 

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सुविधाओं की कमी से कैसे हो बेहतर शिक्षण
पोकरण कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों में सरकार की ओर से विज्ञान संकाय अवश्य शुरू कर दिए गए है, लेकिन न तो व्याख्याता लगाए जा रहे है, न ही सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है। जिसके चलते बेहतर शिक्षण की आस आज भी अधूरी है तथा विद्यार्थी रुचि के बावजूद विज्ञान की बजाय वाणिज्य व कला संकाय लेने को मजबूर हो रहे है। पोकरण उपखण्ड मुख्यालय पर क्षेत्र का सबसे पुराना राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थित है। यहां विज्ञान के जीव, भौतिक व रसायन विषय संचालित हो रहे है, लेकिन इनमें व्याख्याताओं व विज्ञान संबंधी शिक्षण सुविधाओं की कमी के चलते विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण नहीं मिल रहा है। हालांकि विद्यालय प्रशासन की ओर से बेहतर शिक्षण के प्रयास किए जाते है, लेकिन सुविधाओं की कमी से ये प्रयास भी अधूरे साबित हो रहे है।
यह है प्रयोगशालाओं के हाल
विद्यालय में स्थित भौतिक विज्ञान प्रयोगशाला में व्याख्याता नहीं होने के कारण द्वितीय श्रेणी शिक्षक की ओर से शिक्षण करवाया जा रहा है। यहां पानी, स्पॉट लाइट, प्रायोगिक टेबल की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों को खासी परेशानी होती है। हालांकि प्रयोगशाला में सामान पूरा उपलब्ध है, लेकिन उन्हें व्यवस्थित रखने के लिए अलमारियों व रेंकों का अभाव है। रसायन विज्ञान प्रयोगशाला में भी व्याख्याता नहीं है। रसायन विज्ञान में अलग-अलग रसायनों से प्रयोग किए जाते है। इन रसायनों को रखने के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है तथा रसायन खुले में ही पड़े है। कुछ रसायन ऐसे हैं, जो पानी या केरोसीन के संपर्क में आने पर आग पकड़ लेते है। ऐसे में बचाव के लिए भी यहां पुख्ता की व्यवस्था नहीं है। प्रयोग के दौरान होने वाले धुएं व गैस को बाहर निकालने के लिए एडजस्ट फैन, भीषण गर्मी के दौरान कमरे में पर्याप्त हवा, प्रयोग के लिए बर्नर गैस की कोई सुविधा नहीं है। विद्यालय में स्थित जीव विज्ञान प्रयोगशाला में भी विशेष रेंक, अलमारियों, पानी की कोई सुविधा नहीं है। इसके अलावा फर्श भी टूटा पड़ा है। गर्मी के दौरान यहां पंखों व अन्य सुविधाओं की कमी से विद्यार्थी परेशान है।

कर रहे प्रयास
विद्यालय में स्थित तीनों प्रयोगशालाओं में समस्त सामग्री उपलब्ध है। यदि कोई समस्या होती है, तो उसे विद्यालय स्तर पर दूर कर लिया जाता है।
-रायपालसिंह रामसर, कार्यवाहक प्रधानाचार्य राउमावि, पोकरण।

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