धूमधाम से निकली इनकी बारात, और सात फेरों के बाद जुड़ गया रिश्ता, नहीं देखी होगी आपने ऐसी शादी

बारात के स्वागत के दौरान लड़कियों ने भांगड़े की धुन पर खूब डांस भी किया...

जालौन. बुंदेलखंड पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहा है। यहां पानी की समस्या हर बार एक मुसीबत लेकर आती है। जिससे यहां के लोग त्राहिमाम-त्राहिमाम करने लगते हैं। इसी समस्या से निजात पाने के लिये अमावस्या के दिन 12 साल तक की छोटी-छोटी बच्चियों ने गुड्डा-गुड्डी की अनोखी शादी कराई और यह शादी ठीक वैसी ही कराई जैसी हिन्दू रीति रिवाज में होती है। इस शादी को कराने का मुख्य उद्देश्य है कि बुंदेलखंड खुशहाल रहे और यहां पर किसानों की फसल की पैदावार अच्छी हो और कई सालों से पड़ रहे सूखे से यहां के लोगों को निजात मिल सके।

 

 

 

नहीं देखी होगी ऐसी शादी

आपने शादियां तो बहुत देखी होगी, लेकिन बुंदेलखंड के जालौन के उरई में आयोजित इस तरह की शादी बहुत ही कम देखी होगी। यहां पर एक कुर्सी पर दूल्हा दुल्हन बने गुड्डा-गुड्डी बैठे जिन्हें छोटी-छोटी लड़कियों और महिलाओं बनाया गया था। यह गुड्डा-गुड्डी छोटी-छोटी लकड़ियों ने कपड़े के बनाए और उन्हें सजाया भी। फिर दोनों की बड़ी धूमधाम से शादी कराई गई।

 

शहर में निकाली बारात

पहले लड़के-लड़कियों ने दूल्हा बने गुड्डा की बारात को पूरे शहर में निकाला और फिर यह बारात एक मंदिर में पहुंची जहां महिलाओं द्वारा बारातियों का तिलक लगाकर जोरदार स्वागत किया गया। स्वागत के दौरान लड़कियों ने भांगड़े की धुन पर खूब डांस भी किया और फिर जैसी लड़का और लडकी की शादी कराई जाती है वैसे ही गुड्डा-गुड्डी की शादी बड़ी धूमधाम से कराई गयी। इसमें गुड्डा-गुड्डी का जयमाला कार्यक्रम के साथ फेरे और पैर पूजन के साथ विदाई का कार्यक्रम भी कराया गया।

 

सूखे से राहत के लिए कराई शादी

गुड्डा-गुड्डी की शादी को कराने का मुख्य उद्देश्य है बुंदेलखंड जो प्रत्येक वर्ष आपदा के कारण सूखे की मार झेलता है पानी की समस्या से जूझता है। उससे यहां के किसानो को राहत मिल सके। साथ ही बारिश अच्छी होने से किसानों की पैदावार बढ़ सके। इसीलिये यहां की महिलाओं से लेकर छोटी-छोटी लड़कियां एक साथ मिलकर गुड्डा-गुड्डी की शादी कराती है।

 

अमावस्या के दिन होती है शादी

शादी आयोजित करने वाली अंशिका और आकर्षा ने बताया कि वह अमावस्था के दिन इस शादी आयोजन किया गया है और इसमें सभी लोग बढचढ़ कर हिस्सा लेते है। उन्होंने बताया कि वह बुंदेलखंड की खुशहाली के लिये यह शादी कराती है जिससे भगवान प्रसन्न रहे और यहां के किसान किसी दैवीय आपदा की चपेट में न आये और यहां किसानों की फसल की पैदावार भी अच्छी हो। उन्होंने पूरी रीतिरिवाज के साथ शादी कराई और उन्होंने बारात निकाली फिर जयमाला उसके बाद फेरे और पैर पूजन का कार्यक्रम किया और उसके बाद विदाई की गयी।

नितिन श्रीवास्तव
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned