वन क्षेत्र में सूख चुके जलस्रोत, चार एनिकट बनने से भालुओं का आबादी क्षेत्र में रुकेगा प्रवेश

वन क्षेत्र में सूख चुके जलस्रोत, चार एनिकट बनने से भालुओं का आबादी क्षेत्र में रुकेगा प्रवेश
वन क्षेत्र में सूख चुके जलस्रोत, चार एनिकट बनने से भालुओं का आबादी क्षेत्र में रुकेगा प्रवेश

Dharmendra Ramawat | Updated: 07 Oct 2018, 12:05:20 PM (IST) Jalore, Rajasthan, India

78 लाख स्वीकृत, बारिश का पानी सालभर बुझाएगा भालुओं की प्यास

विष्णु प्रजापत
जसवंतपुरा. भालू अभयारण्य के रूप में खास पहचान बना चुका जसवंतपुरा वन्य क्षेत्र में इस बार सूखे के हालात से भालुओं का आबादी क्षेत्र में प्रवेश हो रहा है। इस साल हालात विकट है, लेकिन इस बीच वन क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर मिली है। यहां लोहियाणा पहाडिय़ों के बीच बारिश के दौरान व्यर्थ बहने वाले पानी को संचित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बना है। जिसके तहत 78 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। प्रोजेक्ट के अनुसार कुल चार एनिकट बनेंगे। जिसमें से दो एनिकट का निर्माण जसवंतपुरा लोहियाणा की पहाडिय़ों के जोड़ में करवाया जाएगा। इसके अलावा एक एनिकट गोलाणा और एक चान्दूर में बनेगा।
12 माह तक का स्टॉक
फिलहाल बरसाती पानी व्यर्थ बह जाता है और गर्मी का मौसम आते आते पानी उपलब्ध ही नहीं होता। एनिकट का निर्माण होने से इनमें पानी संचित होगा, जिससे वन्य जीवों के लिए सालभर पानी उपलब्ध हो सकेगा।
गलजर से ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा
वन्य क्षेत्र में भालुओं के लिए पानी उपलब्ध करवाने को प्रोजेक्ट के तहत गलजर बनाए गए थे, लेकिन इनमें पानी की उपलब्धता विभाग नहीं करवा पा रहा। ऐसे में यह प्रोजेक्ट अनुपयोगी ही साबित हो रहा है। इन गलजरों में ट्यूबवैलों या टैंकरों से पानी भरा जाना था।
रुकेगा आबादी में प्रवेश
गौरतलब है कि गर्मी के दिनों में अक्सर पानी की तलाश में भालुओं का कुनबा आबादी क्षेत्र में प्रवेश कर जाता है। जसवंतपुरा व आस पास के गांवों में कई बार भालुओं के आबादी क्षेत्र में प्रवेश करने से लोगों पर हमले तक हो चुके हैं। वहीं कई लोग गम्भीर रूप से घायल भी हो चुके हैं। ऐसे में एनिकट बनने के बाद इसमें पानी भरने से भालुओं का आबादी क्षेत्र में प्रवेश भी रुकेगा।
इनका कहना
जसवंतपुरा वन्य क्षेत्र में इस साल बरसात नहीं होने के कारण वन्य जीवों के लिये पानी की समस्या है।हमारे पास जून तक बजट आता है।बजट नहीं मिलने से गलजर में पानी नहीं भर पा रहे हैं, हालांकि एनिकट के लिए स्वीकृति मिली है, जिससे भविष्य में वन्य जीवों के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।
- प्रवीणसिंह देवड़ा, क्षेत्रीय वन अधिकारी, जसवंतपुरा

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