सांचौर में आखिर कैसे मौत के मुंह में जाकर लौट आया ये बच्चा...पढ़ें पूरी खबर

Dharmendra Ramawat

Updated: 30 Mar 2019, 05:39:07 PM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

रिपोर्ट : वींजाराम डूडी
सांचौर. क्षेत्र के सेडिय़ा गांव में घर के आंगन में खेल रहे तीन वर्षीय मासूम पर शुक्रवार को मधुमक्खियों ने अचानक हमला कर दिया। जिससे ३ वर्षीय मासूम इस कदर बेहोश हो गया कि उसकी पल्स रेट भी चलना बंद हो गई। घबराए परिजन करीब एक घंटे बाद गंभीर अवस्था में इस बेहोश मासूम को सांचौर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उसकी गम्भीर स्थिति को देखते हुए आईसीयू में भर्ती तो कर दिया, लेकिन पल्स रेट नहीं चल रही थी। इस दौरान बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक तलेसरा व डॉ. पुष्कर नागदा की टीम ने उसका इलाज शुरू किया। इस दौरान परिजनों ने मासूम के बचने की उम्मीद तक छोड़ दी। चिकित्सा टीम की ओर से करीब आधे घंटे से ज्यादा समय तक इलाज करने के बाद मासूम को होश आया और पल्स रेट चलने लगी। इसे देख परिजनों के चेहरे पर खुशी के आंसू छलक पड़े। जानकारी के अनुसार सेडिय़ा निवासी दिनेशकुमार बिश्नोई का ३ वर्षीय मासूम शिवप्रकाश घर के आंगन में बच्चों के साथ खेल रहा था। इस दौरान घर से ऊपर से गुजर रहे मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक उस पर हमला कर दिया। इस दौरान तीन बच्चे तो मधुमक्खियों के काटने के बावजूद जान बचाकर वहां से भाग छूटे, लेकिन शिप्रकाश गश खाकर वहीं गिर गया। भागने के दौरान उसका मुंह धूल में दब जाने से उसे श्वास आना भी बंद हो गया। हादसे के दौरान परिवार के सदस्य बाहर गए हुए थे। बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनकर परिजन दौड़कर आए और गंभीर अवस्था में घायल मासूम को अस्पताल लेकर पहुंचे।
1 घंटे तक थमी रही सांसें
सांचौर उपखंड मुख्यालय से 30 किमी दूर सेडिय़ा गांव में मधुमक्खियों के हमले के बाद मासूम को अस्तपाल पहुंंचाने के लिए परिजनों के पास कोई वाहन तक नहीं था। वहीं घर पर महिलाओं को आपातकालीन सेवा के नंबर भी पता नहीं थे। मासूम की गंभीर स्थिति के दौरान सांचौर से निजी वाहन मंगवाया गया और उसके करीब एक घंटे बाद मासूम को सांचौर के निजी अस्पताल पहुंचाया गया।
परिजनों के भी खाफ्ता हुए होश
3 वर्षीय मासूम शिप्रकाश की पल्स रेट नहीं चलने से परिजनों के होश उड़ गए। परिजनो का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था। निजी अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों की टीम ने गंभीर स्थिति के बावजूद मासूम का उपचार कर उसे नई जिन्दगी दी। जिसके बाद से परिवार के लोग चिकित्सकों को दुआ देते नहीं थक रहे हैं।
चिकित्सक भी बता रहे करिश्मा
सेडिय़ा गांव में मधुमक्खियों के हमले के बाद बेहोश हुए मासूम की एक घंटे तक पल्स रेट नहीं चलने व उसके बाद चिकित्सकों की ओर से इलाज शुरू करने के आधे घंटे के ज्यादा समय के बाद पल्स रेट फिर से चालू होने पर मासूम अब खतरे से बाहर बताया जा रहा है। खुद चिकित्सक भी इसे कुदरत का करिश्मा मान रहे हैं। शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक तेलसरा इस मामले में जांको राखे सांईयां, मार सके ना कोय की कहावत को सटीक मान रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे गिनती के मामले ही अब तक सामने आए हैं, जिनमें पल्स रेट शून्य होने के बावजूद मरीज की जान बच पाई है।
इनका कहना है...
मरीज को मधुमक्खियां काटने के एक घंटे से ज्यादा समय के बाद अस्पताल लाया गया। उस दौरान उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी। पल्स रेट भी शून्य हो चुकी थी। डॉ. पुष्कर के साथ टीम ने मासूम का गंभीर स्थिति के दौरान इलाज किया। करीब आधे घंटे बाद माूसम की पल्स रेट फिर से चलने लगी। यह किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जाएगा। अब तक पूरे देश में ऐसे चंद मरीज ही सामने आए हैं। जिनका इस स्थिति में सफल इलाज हो पाता है।
- डॉ. अशोक तलेसरा, अधीक्षक, निजी अस्पताल, संाचौर
मधुमक्खियों ने जिस समय बच्चे पर हमला किया था, उस समय घर पर कोई नहीं था। सूचना पर मैं संाचौर से वाहन लेकर मौके पर पहुंचा। इस दौरान मासूम की हालत नाजुक थी। पल्स रेट नहीं चलने से हम डर गए थे, लेकिन सही समय पर उसे अस्पताल ले आए। इसे कुदरत का करिश्मा कहें या चिकित्सकों की टीम की कामयाबी। शिवप्रकाश को नई जिन्दगी मिली। इसके लिए ईश्वर का शुक्रिया अदा करते हैं।
- दिनेश कुमार, मासूम के पिता

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned