पुलिस महकमे को छोड़ चुना शिक्षा का क्षेत्र, नवाचार से बदली सरकारी स्कूल की तस्वीर

उपखंड क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय ढाकों की ढाणी पुर में न केवल विद्यालय भवन को आकर्षक और मनोहारी बनाया गया है, बल्कि यहां शैक्षणिक विकास के लिए भी खासे कार्य हुए हैं, जिसमें इस शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका है। मनोहर लाल ढाका ने करीब 2 साल तक राजस्थान पुलिस में सेवा देने के बाद शिक्षक बनने की ठानी और कड़ी मेहनत से शिक्षक नियुक्त किए। इस विद्यालय में ड्यूटी लगी तो लगन और मेहनत से यहां की तस्वीर ही बदल दी।

By: Dharmendra Kumar Ramawat

Published: 24 Dec 2020, 09:45 AM IST

वींजाराम डूडी.सांचौर. पुलिस महकमे में सेवाएं देने के बाद अब शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े पुर गांव के एक सरकारी शिक्षक मनोहरलाल ढाका ने अपने कार्यों से विशेष छाप छोड़ी है। उपखंड क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय ढाकों की ढाणी पुर में न केवल विद्यालय भवन को आकर्षक और मनोहारी बनाया गया है, बल्कि यहां शैक्षणिक विकास के लिए भी खासे कार्य हुए हैं, जिसमें इस शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका है। मनोहर लाल ढाका ने करीब 2 साल तक राजस्थान पुलिस में सेवा देने के बाद शिक्षक बनने की ठानी और कड़ी मेहनत से शिक्षक नियुक्त किए। इस विद्यालय में ड्यूटी लगी तो लगन और मेहनत से यहां की तस्वीर ही बदल दी। विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बदहाली का आंसू बहाने वाले विद्यालय के भवनों की दीवार में चार दिवारी पर शिक्षा विधियों के चित्रांकन वह विभिन्न कोटेशन की लाइनों से की गई रंगाई-पुताई से सजी सरकारी स्कूल न केवल खूबसूरती से प्रभावित कर रही है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए अध्ययन कार्य के लिए भी ये सकारात्मक कार्य है।
भामाशाहों के सहयोग से बनाया एबीएल कक्ष
विद्यालय में एबीएल कक्ष यानी एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग कक्ष में ढाकों की ढाणी स्थित प्राथमिक विद्यालय में किए गए रंग रोगन से विद्यालय के कक्षा कक्ष की दीवार पर सजी शिक्षण विधियों के चित्रों में पहाड़े, बारहखडी को देखकर स्वाध्याय भी कर लेते हैं। विद्यालय में कार्यरत शिक्षक मनोहर लाल ढाका के दिमाग की उपज की बदौलत केवल सरकारी विद्यालय की तस्वीर ही नहीं बदली, बल्कि मूल विद्यालय में पढऩे के लिए आने वाले छोटे-छोटे बच्चों के शिक्षण कार्य को भी आसान बना दिया है।
ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर शिक्षा की सोच से की पहल
वर्तमान में 2 शिक्षकों की नियुक्ति है, लेकिन जब शिक्षक मनोहरलाल ढाका की विद्यालय में नियुक्ति हुई, तब वह अकेले ही व्यवस्थाओं को अंजाम दे रहे थे। ऐसे में उन्होंने अपने आत्मविश्वास की बदौलत ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा और सरकारी विद्यालय के प्रति अभिभावकों के विश्वास को जीतने के उद्देश्य से इस पहल को अंजाम देते हुए भामाशाहों के सहयोग से प्राथमिक विद्यालय स्तर के विद्यालय को मॉडल स्तर के विद्यालय के रूप में विकसित करने की ठानी। प्राइमरी स्तर के विद्यालय की कायापलट करने के लिए ग्रामीणों ने भामाशाह के रूप में पहल करते हुए विद्यालय के विकास को लेकर उत्साह से सहयोग दिया, जिसकी बदौलत आज विद्यालय में उच्च गुणवत्ता की सुविधाओं के साथ-साथ ग्राउंड में इंटरलॉकिंग, विद्यालय कार्य के लिए लैपटॉप, प्रिंटर, इंटरनेट सुविधा सहित आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित व्यवस्थाओं का विद्यालय को लाभ मिल रहा है।
इनका कहना
विद्यालय में नियुक्ति के दौरान उपेक्षित विद्यालय में कम नामांकन की वजह वह मूलभुत सुविधाओं की कमी की वजह से विद्यालय मर्ज की स्थिति में था, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावकों को प्रोत्साहित कर विद्यालय को नया स्वरूप प्रदान के लिए सहयोग लेकर आधुनिक सुविधाओ से सुसज्जित विद्यालय तैयार कर एक मॉडल विद्यालय के रूप में प्रस्तुत किया है।
- मनोहरलाल ढाका, प्रधानाध्यापक, राप्रावि ढाकों की ढाणी, पुर

Dharmendra Kumar Ramawat Reporting
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