जालोर में ये मुसीबत की क्रॉसिंग...गंभीर हालत में थमे एंबुलेंस के पहिए

जालोर-लेटा मार्ग स्थित रेलवे क्रॉसिंग एक बार फिर गंभीर हालत में मरीज के लिए आफत का कारण बनी। जालोर राजकीय अस्पताल से सवेरे करीब 11.30 बजे मेलावास (चितलवाना) निवासी महिला मरीज शारदा देवी को जोधपुर रेफर किया गया। जिसके बाद परिजन इसे गंभीर हालत में एंबुलेंस में डालकर जोधपुर मथुरा दास माथुर अस्पताल लेकर रवाना हुए, लेकिन उनकी मुसीबत तब बढ़ गई, जब उन्हें जालोर से रवानगी से मात्र 5 मिनट बाद ही बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।

By: Dharmendra Kumar Ramawat

Published: 24 Jan 2021, 09:20 AM IST

जालोर. जालोर-लेटा मार्ग स्थित रेलवे क्रॉसिंग एक बार फिर गंभीर हालत में मरीज के लिए आफत का कारण बनी। जालोर राजकीय अस्पताल से सवेरे करीब 11.30 बजे मेलावास (चितलवाना) निवासी महिला मरीज शारदा देवी को जोधपुर रेफर किया गया। जिसके बाद परिजन इसे गंभीर हालत में एंबुलेंस में डालकर जोधपुर मथुरा दास माथुर अस्पताल लेकर रवाना हुए, लेकिन उनकी मुसीबत तब बढ़ गई, जब उन्हें जालोर से रवानगी से मात्र 5 मिनट बाद ही बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। एक बार फिर जालोर-लेटा क्रॉसिंग मुसीबत का कारण बनी। जिस वक्त एंबुलेंस यहां पहुंची तो करीब 150 मीटर लंबी वाहनों की कतारें थी। हालांकि इमरजेंसी सेवा होने पर एंबुलेंस को प्राथकितता के तौर क्रॉसिंग के मुहाने तक पहुंच गई, लेकिन उसके बाद भी इस क्रॉसिंग पर एंबुलेंस को करीब 6 मिनट का इंतजार करना पड़ा। जब चालक से पूछा गया तो उसने बताया कि महिला के शरीर का आधा हिस्सा (पैरालाइसिस जैसे लक्षण से) प्रभावित है और लगभग अचेत जैसी अवस्था में है। गंभीर हालात में इसे रेफर किया गया, लेकिन क्रॉसिंग बंद होने से परेशानी हो रही है। करीब 11.40 बजे यह क्रॉसिंग खुली तो एंबुलेंस को रवाना किया गया, लेकिन क्रॉसिंग के दोनों छोर पर वाहनों की लंबी कतार और ट्रेफिक लोड होने से इस क्रॉसिंग को पार कर रफ्तार पकडऩे में ही एंबुलेंस को 3 से 4 मिनट लग गए। सीधे तौर पर एंबुलेंस को अस्पताल से लेकर क्रॉसिंग को पार करने में ही लगभग 15 मिनट लग गए। यह विकट हालात इस क्रॉसिंग बंद होने से हुई।
बार बार विकट हो रहे हालात
इस क्रॉसिंग पर आपात सेवाएं बाधित होने का यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी बहुत से ऐसे प्रकरण हो चुके हैं। जब गंभीर अवस्था में एंबुलेंस के क्रॉसिंग पर पहिये थमे। वहीं एक घायल को इस क्रॉसिंग तक जाने के बाद दूसरे छोर पर लोगों ने अपने हाथों में उठाकर घायल को दूसरे वाहन तक पहुंचाया। ऊण के निकट सडक़ हादसे के दौरान भी एंबुलेंस को इसी क्रॉसिंग पर रुकना पड़ा था। वहीं कई बार वीआईपी विजिट के दौरान भी इस क्रॉसिंग के चलते मंत्री, ऑफिसर्स, जनप्रतिनिधियों को भी यहां इंतजार करना पड़ा है।
जल्द हो समस्या का निदान
पिछले साल इस रेलवे क्रॉसिंग पर रेलवे ओवरब्रिज के लिए जीएडी एप्रूव होने के साथ मुख्यालय के मार्फत प्रोजेक्ट मंत्रालय को भेजा जा चुका है। यह मामला अंतिम स्तर पर अटका हुआ बताया जा रहा है। सीधे तौर पर बजट आवंटित होने के साथ इस कार्य के लिए टेंडर प्रोसेसे शुरू हो पाएगा। जल्द से जल्द यह काम शुरू होना जरुरी है, क्योंकि आरओबी निर्माण कार्य में ही लगभग 3 साल का समय लग जाएगा।
विकल्प पर भी गौर नहीं
जालोर से जोधपुर, पाली, जयपुर तक पहुंचने का यही मुख्य मार्ग है। सीधे तौर पर क्रॉसिंग बंद होने से बहुत ज्यादा दिक्कतें वाहन चालकों को होती है। वहीं आपात हालात में तो दिक्कतें और भी बढ़ जाती है। इस मार्ग का विकल्प रतनपुरा रोड से शंकर वाटिका होते हुए मामाजी मंदिर के निकट होते हुए हो सकता है। इस मार्ग पर रेलवे क्रॉसिंग पर एक अंडर ब्रिज का निर्माण किया गया है। जिसकी ऊंचाई कम है, जहां से छोटी एंबुलेंस और वाहन गुजर सकते हैं। इस तरह के आपात हालातों में यह मार्ग संजीवनी बन सकती है, लेकिन इस मार्ग पर शंकर वाटिका से लेकर मामाजी मंदिर होते हुए मुख्य मार्ग को कनेक्ट करने वाले करीब 500 मीटर क्षेत्र में मार्ग कच्चा है। जिसका डामरीकरण किया जाना जरुरी है, ताकि वैकल्पिक सुविधा आपात हालातों में मिल सके।
गेट सिग्नल के बाद भी परेशानी
रेलवे की ओर से जालोर-लेटा क्रॉसिंग पर दो साल पूर्व गेट सिग्नल लगाए गए थे। जिसका उद्देश्य आपात हालातों टे्रन को रोकने के साथ क्रॉसिंग खोलने के लिए किया गया था, लेकिन आज तक आपात हालातों में भी वाहन चालकों को क्रॉसिंग पर इंतजार करना पड़ रहा है।

Dharmendra Kumar Ramawat Reporting
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