स्वाइन फ्लू से एक और गर्भवती की मौत, एक जोधपुर में भर्ती

Dharmendra Ramawat

Updated: 07 Feb 2019, 06:12:21 PM (IST)

Jalore, Jalore, Rajasthan, India

चितलवाना. इसे चिकित्सा विभाग की लापरवाही कहें या अनदेखी क्षेत्र में एक और गर्भवती की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई, लेकिन अधिकारियों को इस गर्भवती की मौत के तीन बाद भी भनक तक नहीं लग पाई।जानकारी के अनुसार भादरुणा निवासी मंजूदेवी पुत्री ठाकराराम चौधरी गर्भवती होने के बाद में पीहर आई थी। जहां उसे सर्दी-जुकाम होने के बाद परिजन उसे अस्पताल ले गए। इस दौरान जांच के बाद कुछ दिन तक उसने दवा भी ली, लेकिन वह ठीक नहीं हो पाई। ऐसे में परिजन चिकित्सकों की सलाह पर उसे उच्च इलाज के लिए गुजरात के अहमदाबाद स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सकों ने जांच की तो उसे स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। बाद में उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। वहां उपचार के दौरान तीन दिन पूर्व उसकी मौत हो गई, लेकिन जिला अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं लगी। इस गर्भवती की मौत के बाद परिजनों ने उसका दाह संस्कार भी कर दिया, लेकिन तीन दिन बाद चिकित्सा अधिकारियों ने ना तो प्रभावित क्षेत्र का सर्वे करवाया और ना ही दवाओं का वितरण किया। ऐसे में क्षेत्र में दिनों दिन फैल रही स्वाइन फ्लू जैसी गम्भीर बीमारी के प्रति चिकित्सा महकमा उदासीन नजर आ रहा है। जिसके कारण स्वाइन फ्लू से एक के बाद एक मौत की चपेट में आ रहे हैं। इधर, सिवाड़ा निवासी मोरादेवी पत्नी बद्रीनारायण ब्राह्मण भी जोधपुर के अस्पताल में स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद चार दिन से जोधपुर में भर्ती है। हालांकि विभाग को इसकी जानकारी मिलने के बाद बुधवार को सिवाड़ा में पीडि़ता के परिजनों व पड़ोसियों को टीम प्रभारी डॉ. ओमप्रकाश विश्नोई व मेलनर्स बुधाराम विश्नोई ने टेबलेट बांटी।
संक्रमण का खतरा
भादरुणा गांव की सरहद में तीन दिन पहले गर्भवती की स्वाईन फ्लू से मौत होने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई सुध नहीं ली गई। ऐसे में गांव के लोगों को संक्रमण फैलने का भी अंदेशा बना हुआ। खास बात तो यह है कि पीडि़ता के परिजन भी कई दिनों तक उसके संपर्क में रहे, लेकिन चिकित्सा विभाग ने उनकी भी जांच नहीं की है और ना ही किसी प्रकार की दवाओं का वितरण किया है।
विभाग की लापरवाही पड़ रही भारी
क्षेत्रके गांवों में एक के बाद एक स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आने के बावजूद चिकित्सा विभाग लापरवाही बरत रहा है। जिसका खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गर्भवती की स्वाइन फ्लू से मौत के मामले में विभाग अनजान होकर आंखें मंूदे बैठा है। गौरतलब है कि प्रदेशभर में स्वाइन फ्लू से कई मौतें हो चुकी हैं। इसके बावजूद विभाग की ओर से इस बारे में लापरवाही बरतना विभागीय कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
खुले में दाह संस्कार
गर्भवती की स्वाइन फ्लू से मौत के बाद गुजरात से उसका शव बंद पेटी में लाया गया था। ताकि किसी तरह का संक्रमण नहीं फैले, लेकिन जानकारी के अभाव में शव का खुले में दाह संस्कार किया गया। ऐसे में संक्रमण फैलने की भी आशंका बनी हुई है।
इनका कहना...
अस्पताल से शव पैक कर दिया गया था, लेकिन हमें जानकारी नहीं होने के कारण हमने शव को खुले में जलाकर अंतिम संस्कार किया। चिकित्सा विभाग या प्रशासन ने भी इस संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं दी।
- मांगीलाल चौधरी, मृतका का भाई
गर्भवती की स्वाइन फ्लू से मौके के मामले में हमने पता किया था, लेकिन हमें स्वाइन फ्लू से मौत को लेकर पूरी तरह से जानकारी नहीं मिल पाई।
- डॉ. भैराराम जाणी, बीसीएमओ, सांचौर
गर्भवती महिला की स्वाइन फ्लू से मौत की जानकारी हमें अभी मिली है। वहीं सिवाड़ा की महिला जोधपुर में भर्ती है। इस बारे में चिकित्सा टीम को मौके पर भेजकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. बाबूलाल विश्नोई, सीएमएचओ, जालोर

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